ग्वालियर : निगम का भ्रष्ट सहायक आयुक्त नागेंद्र गुर्जर सस्पैंड
निगम का भ्रष्ट सहायक आयुक्त नागेंद्र गुर्जर सस्पैंडSocial Media

ग्वालियर : निगम का भ्रष्ट सहायक आयुक्त नागेंद्र गुर्जर सस्पैंड

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : वायरल ऑडियों में कहा था श्रम जन्म मृत्यु विभाग दे दूंगा 10 हजार महीना चाहिए। निगम प्रशासन अशीष सक्सेना ने की निलंबन की कार्रवाई।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा जब यह कहा गया कि दस फुट जमीन में गाढ़ दूंगा तो कुछ लोगों ने इसे भावावेश में कही गई बात कहकर हवा में उड़ा दिया, लेकिन अब सीएम की कही बात का असर धरातल पर नजर आने लगा है। नगर निगम के भ्रष्ट सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा के बाद अब मनमाफिक विभाग देने के लिए पैसे की मांग करते हुए वीडियो वायरल होने पर सहायक आयुक्त नागेंद्र गुर्जर पर भी गाज गिर गई।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले दिनों शहर में आयोजित हुए प्रतिष्ठापूर्ण तानसेन समारोह में मंच पर प्रस्तुति देने देश के प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी इसी भ्रष्ट अफसर नागेंद्र गुर्जर को दी गई थी। यहां बता दें कि नगर निगम ग्वालियर में पदस्थ सहायक आयुक्त नागेन्द्र गुर्जर का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें श्रम, जन्म-मृत्यु विभाग दिए जाने का ऑफर देते हुए 10 हजार रूपए महीना की मांग की गई थी, जिसके बाद संभागीय आयुक्त व प्रशासक आशीष सक्सेना ने सहायक आयुक्त नागेंद्र गुर्जर के निलंबन आदेश जारी कर दिए। जानकारों की मानें तो इस मामले में प्रशासक की ओर से उपायुक्त प्रदीप श्रीवास्तव को निर्देश दिए हैं कि वह गुर्जर के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कराएं।

3 सदस्यीय कमेटी देगी 7 दिन में रिपोर्ट :

प्रशासक की ओर से ऑडियो के वायरल होने के बाद सहायक आयुक्त नागेन्द्र गुर्जर व विनियमित कर्मचारी करन वर्मा के बीच हुई बातचीत की जांच के आदेश दे दिए हैं। जिसके लिए किशोर कन्याल अपर कलेक्टर, मुकुल गुप्ता अपर आयुक्त व नागेन्द्र सक्सैना नोडल अधिकारी कम्प्यूटराईजेशन को 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

अब इसके बाद किस भ्रष्टाचारी की बारी?

भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी नगर निगम में भ्रष्टाचारी धरपकड़ का शुरू हुआ यह सिलसिला कहां जाकर थमेगा अभी कहना मुश्किल है। भ्रष्टाचार के आरोप में अपना पद और रुतबा गंवा चुके प्रदीप वर्मा की चर्चा अभी शहर में थमी भी नहीं है कि नागेंद्र गुर्जर का नया मामला सामने आ गया है। अब सवाल यह है कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी नगर निगम के अफसरों में क्या उपरोक्त कार्रवाई से कुछ डर पैदा होगा? या फिर पूर्व की तरह हर विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी का सिलसिला यू ही अनवरत जारी रहेगा। यहां बता दें कि निगम में ठेकेदारों को काम स्वीकृत कराने एवं पेमेंट कराने के लिए मोटा कमीशन देना पड़ता है, जिसकी वजह से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है। जिसकी वजह से घटिया निर्माण करने पर निगम अफसर एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इसी तरह मकान बनाने की परमीशन लेने से लेकर निगम में कोई भी काम बिना लिए दिए नहीं होता है, लेकिन सीएम के एक्शन मोड में आने के बाद पहली बार भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई देखने को मिल रही है।

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