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वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार हुआ उजागर
वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार हुआ उजागर|Balram Namdeo
मध्य प्रदेश

नरसिंहपुर: वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार हुआ उजागर

तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर: मुख्यमंत्री सरोवर योजना के अंतर्गत बनाये जा रहे 1.06 करोड़ की लागत से तालाब निर्माण के चलते ही फूट गया और पानी का दबाब पड़ते ही पानी अपने साथ मिट्टी को बहाकर ले गया।

Balram Namdeo

हाइलाइट्स:

  • मुख्यमंत्री सरोवर योजना के अंतर्गत बनाये जा रहे 1.06 करोड़ की लागत से तालाब निर्माण फूट गया
  • 10 फुट गहराई में बनाया जाना था तालाब
  • सरपंच ने किया था पहले ही आगाह
  • गर्मी के समय में बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं आदिवासी

राज एक्सप्रेस। चांवरपाठा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठित आदिवासी एवं स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महती भूमिका निभाने वाले अमर शहीद डेलनशाह नरवरशाह की शहीद स्थली ढिलवार ग्राम में मुख्यमंत्री सरोवर योजना के अंतर्गत बनाये जा रहे 1.06 करोड़ की लागत का तालाब निर्माण के चलते ही फूट गया और पानी का दबाब पड़ते ही पानी अपने साथ मिट्टी को बहाकर ले गया। गौरतलब रहे कि, इस तालाब के निर्माण को लेकर शुरू से ही भ्रष्टाचार की कहानी और गुणवत्ता की विसंगतियां सामने देखने को मिल रही थी। अनेक बार समाचार पत्रों के माध्यम से इस विषय को उठाया भी गया था। लेकिन सुधार की बजाय मनमानी चलती रही और मनमानी तेज बारिश के होते ही दबाब पड़ने पर तब सामने आ गई, जब पानी के द्वारा इसे बहा दिया गया।

10 फुट गहराई में बनाया जाना था तालाब :

लगभग 16 एकड़ के एरिया में 10 फुट गहराई के साथ इस तालाब को बनाया जाना था। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की मिली भगत से संबंधित ठेकेदारों द्वारा, इस तालाब की खुदाई किये बगैर ही फोर लाईन सड़क मार्ग निर्माण के दौरान, निकलने वाली मिट्टी इस तालाब के चारों तरफ डाल दी गई और अपने कार्य की इतिश्री समझ ली। टेक्नीकल रूप से इस तालाब को जिस गुणवत्ता से बनना था और तालाब वर्तमान जहां से फूटा है, वह स्वयं अपने भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है। संबंधित विभाग के सब-इंजीनियर महोदय भी अपनी सफाई में जो तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं, उसके ही विपरीत वह तालाब कहानी बयां कर रहा है। ओवरफ्लो जहां से पानी निकलना चाहिए, वहां से निकलने की बजाय पानी विपरीत दिशा से साथ में मिट्टी को ही बहाकर ले गया। इससे यह भी निर्धारित हो गया कि, नीचे से यदि खुदाई की गई होती और सही तरीके से मिट्टी की पिचिंग की जाती, तो शायद तालाब का पानी नहीं बह पाता।

पूर्व में ही सरपंच ने किया था आगाह :

हमारे प्रतिनिधि ने जब ग्राम पंचायत ढिलवार के सरपंच धनराज पटैल से चर्चा की, तो उन्होंने बताया कि, पूर्व में ही जब इस तालाब के सीमांकन को लेकर संबंधित निर्माण कर्ताओं से चर्चा की गई थी, एवं पुराने तालाब को इस एरिया में जोड़ने कहा गया था। उसी समय से ही निर्माण ऐजेंसी द्वारा भ्रमित कर अपने मनमाने तरीके से निर्माण करना प्रारंभ कर दिया था। रातों रात सड़क की मिट्टी निर्धारित एरिया की बजाय कम एरिया में ही काम हुआ है। कुछ ग्रामीणों ने हमारे प्रतिनिधि को बताया कि, इस तालाब निर्माण में स्वयं विभागीय अधिकारी लिप्त है। जिनके द्वारा इस तालाब के मुख्य ठेकेदार से ठेका छीनकर काम कराया जा रहा था।

वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार हुआ उजागर
वरिष्ठ अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार हुआ उजागर
Sudha Choubey - RE

बूंद-बूंद पानी को तरसता है, आदिवासी ग्राम :

शहीदों के वंशज वाले इस आदिवासी ग्राम के लोग भीषण गर्मी के समय बूंद-बूंद पानी के लिए तरसा करते है। खेतों में बने कुंओं एवं ट्यूबेलों से एक से तीन किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाते है। हेंडपंपों में पानी की जगह केवल हवा ही निकलती हे। पथरीला और पहाड़ी एरिया होने के कारण पानी की यहां कोई गुंजाईश भी नहीं है। वास्तव में यदि इस तालाब को पूरी ईमानदारी के साथ और शहीदों की शहादत उनके वंशजों को राहत पहुंचाने की मंशा से यदि वरिष्ठ अधिकारी पूरी गुणवत्ता से काम कराते तो निश्चित ही तालाब में पानी होने के साथ ढिलवार ग्राम के हेंडपंपों का जलस्तर बढ़ने के साथ निस्तार का पानी भी उपलब्ध होता रहता और यहां के लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना-भटकना नहीं पड़ता।

एक दिन पूर्व ही विधायक ने रखा था विषय :

गौरतलब रहे कि, तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय शर्मा के द्वारा जिला येाजना समिति की बैठक में ढिलवार की पेयजल समस्या और तालाब विषय को लेकर बैठक में अपनी बात रखते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी और दूसरे दिन ही तालाब फूटने की घटना घटित होने के बाद ही सारी सच्चाई निकलकर सामने आ गई। श्री विधायक ने स्पष्ट किया है कि, निर्माण कार्यों में और जल संरक्षण की दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही मंजूर नहीं की जावेगी। बल्कि दोषियों पर दंडात्मक कार्यवाही किये जाने की दिशा में पीछे नहीं हटेगें। तालाब फूटने की जानकारी के उपरांत जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी तालाब स्थल मुआयना करने के लिए वहां पहुंचे थे।

इनका कहना :

तेंदूखेड़ा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आर.एस. राजपूत का कहना है कि, निर्माणाधीन तालाब फूटने की सूचना मिलते ही मैं स्वयं तालाब स्थल पहुंचा था एवं संबंधित आर.ई.एस. विभाग के सबइंजीनियर को मौके पर तलब भी कराया गया था। निश्चित तौर पर इस निर्माण कार्य को गुणवत्ता को ताक पर रखकर किया गया है। टेक्नीकली गड़बड़ियां निश्चित तौर पर झलक रही हैं। इनकी विधिवत जांच कराई जायेगी। वरिष्ठ अधिकारियों को भी वस्तुस्थिति से अवगत प्रतिवेदन भेजकर किया जा रहा है।