ग्वालियर : आयुष्मान हॉस्पिटल में कोविड पॉजिटिव मरीज की मौत, गंभीर लापरवाही
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ग्वालियर : आयुष्मान हॉस्पिटल में कोविड पॉजिटिव मरीज की मौत, गंभीर लापरवाही

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : प्राइवेट हॉस्पिटलों में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसका एक और उदाहरण सोमवार को सामने आया है।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। प्राइवेट हॉस्पिटलों में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसका एक और उदाहरण सोमवार को सामने आया है। सड़क दुर्घटना में घायल होकर पहुंचे युवक के सिर में चोट आई थी। इस पर हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने उसका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद मरीज में कोविड के लक्षण दिखने लगे। जांच कराने पर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन ने मरीज को शिफ्ट करने की जगह अपने अस्पताल में ही भर्ती रखा। प्रबंधन की लापरवाही के चलते सोमवार को भर्ती मरीज ने दम तोड़ दिया।

ललितपुर झांसी निवासी मृतक बृजेन्द्र सिंह के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। फिलहाल झांसी रोड थाना पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाने से मिली जानकारी के मुताबिक मृतक के परिजनों ने बताया कि इस मरीज का एक महीने पहले एक्सीडेंट हो गया था। चिकित्सकों ने सिर का ऑपरेशन कराने की सलाह दी। आयुष्मान हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने 29 अक्टूबर को मरीज के सिर का ऑपरेशन दूसरी बार किया। अस्पताल में भर्ती के दौरान मरीज में कोविड के लक्षण दिखने लगे। जब मरीज की 14 नवम्बर को जांच कराई तो 15 नवम्बर को आई रिपोर्ट में वह पॉजिटिव आया। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को सुपर स्पेशलिटी भेजने की जगह अपने अस्पताल में ही भर्ती रखा। 29 नवम्बर की देर रात्रि मरीज की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मरीज की मौत के बाद हॉस्पिटल प्रबंधन के पांव तले जमीन खिसक गईं, क्योंकि आयुष्मान हॉस्पिटल कोविड का उपचार करने के लिए अधिकृत नहीं है। उसके बावजूद भी कोविड मरीज का वहां रखकर उपचार किया गया।

अधिकृत हॉस्पिटल ही कर सकता है कोविड मरीजों का उपचार :

कोरोना को लेकर गाइड लाइन के मुताबिक मरीज के पॉजिटिव निकले के बाद उस मरीज को जेएएच, जिला अस्पताल या फिर अगर मरीज चाहता है तो उसको प्रशासन द्वारा अधिकृत निजी हॉस्प्टिल शिफ्ट कराना होता है। कोविड के मीडिया प्रभारी के मुताबिक झांसी रोड थाने के सामने स्थित यह अस्पताल अधिकृत निजी हॉस्पिटल में शामिल नहीं हैं, अगर मरीज के कोविड पॉजिटिव निकलने के बाद उपचार किया गया है जो नियम विरूद्ध है।

सख्त की जगह सुस्त हुआ विभाग :

इन दिनों प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ सीएमएचओ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग का सुस्त रवैया नजर आया। इस मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों पर मंगलवार की सुबह ही पहुंच गई थी, लेकिन सुबह से लेकर रात तक इस हॉस्पिटल में कार्रवाई के लिए कोई टीम नहीं पहुंची। ऐसी सूचना है कि अस्पताल प्रबंधन को ऑपरेशन के लिए सरकारी डॉक्टरों को भी अपने यहां बुलाया जाता है।

इनका कहना है :

आयुष्मान हॉस्पिटल संचालक ने मेरे से मृतक के पोस्टमार्टम संबंधी जानकारी मांगी थी। कोविड मरीजों को आयुष्मान हॉस्पिटल में रखकर उपचार करने की परमिशन मेरे द्वारा नहीं दी गई है। यदि वह मेरे द्वारा मौखिक परमिशन देने की बात कह रहे हैं तो वह गलत है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जाएगी।

डॉ.मनीष शर्मा, सीएमएचओ

सीएमएचओ के मौखिक आदेश पर कोविड मरीज को अलग वार्ड में आइसोलेट कर भर्ती रखा था। 29 नवम्बर को उसका ऑपरेशन हुआ था और 15 अक्टूबर को वह कोरोना पॉजिटिव निकला था।

कौशलेन्द्र सिंह तोमर, संचालक, आयुष्मान हॉस्पिटल

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