एनसीएल की खदानों में जारी है डीजल माफिया और कबाड़ियों का कहर
एनसीएल की खदानों में जारी है डीजल माफिया और कबाड़ियों का कहर|Social Media
मध्य प्रदेश

उर्जांचल : एनसीएल की खदानों में जारी है डीजल माफिया और कबाड़ियों का कहर

उर्जांचल, मध्य प्रदेश : परियोजनाओं को खोखला कर रातों-रात कर रहे है लाखों का कालाधन्धा।

Shashikant Kushwaha

उर्जांचल, मध्य प्रदेश। सिंगरौली-सोनभद्र जिले के उर्जांचल परिक्षेत्र में स्थित नॉर्दन कोल फील्ड लिमिटेड की परियोजनाएं डीजल और कबाड़ माफियाओं से सुरक्षित नहीं है। सूत्रों की माने तो खदानों से रोजाना बड़े पैमाने पर डीजल, कबाड़, मशीनरी पार्ट, लोहा के स्क्रैप, केबुल, एल्युमिनियम तार, महंगी लाईट आदि कीमती सामान इन कबाड़ियों के द्वारा आए दिन गायब किए जा रहे हैं। सरकार व प्रशासनिक अधिकारी बदलते रहते हैं लेकिन इन सीकेडी माफियाओं के अवैध कार्यों पर कभी भी नकेल नहीं कसी जा सकी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्या वजह है कि सिकेडी माफिया परियोजना में रात हो या दिन, धड़ल्ले से घुसकर अपने अवैध कार्य को दशकों से अंजाम देते आ रहे हैं। परन्तु प्रसाशन व एनसीएल प्रबंधन के लाख जतन के बाद भी आज तक सीकेडी माफियाओं पर अंकुश नहीं लग सका हैं। डीजल और कबाड़ माफिया एनसीएल की खदानों को लगातार खोखला कर रहे है।

परियोजनाओ में पर्याप्त सुरक्षा होने के बाद भी खदानों से चोरी होना तो निश्चित ही सुरक्षा विभाग पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है?

सूत्र से प्राप्त जानकारी पर विश्वास करें तो बताते हैं कि परियोजना में सुरक्षा की जिमेदारी निभाने वाले सुरक्षाकर्मी ही अपरोक्ष रूप से कबाड़ और डीजल माफियाओं को सरक्षंण देने में अपनी भूमिका निभा रहे है? जिससे डीजल-कबाड़ चोरो के हौसले बुलंद हैं और खदान में अपने गुर्गे भेज, एनसीएल को खोखला करने में सफल हो रहे है। कबाड़ माफियों के सामने सुरक्षा विभाग लाचार या कोई और वजह..?

रात ढलते ही खदानों में होती है चोरियां :

जैसे दिन गुजरते रात होने लगती है वैसे ही कवाड़ माफियों का गिरोह सक्रिय हो जाता है। सूत्र की माने तो चोरों का समय तय किया गया है जैसे ही समय आता है फ़ौरन खदानों में वे अपने गिरोह के साथ घुसकर खदानों से रातों-रात कबाड़ और डीजल निकाल बार्डर पार करा देते हैं। डीजल व कबाड़ चोरी की अनेको घटनाएं उल्लेख करने के लिए स्थानीय थानों में पंजीकृत है, जो सीकेडी माफियाओं की कहानी बयां करती है।

आखिर खदानों में इतनी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भी परियोजना में होनी वाली चोरियों को रोकने में सुरक्षाकर्मी क्यो नाकाम साबित हो रहे है? जिससे चोरों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि दिन दहाड़े भी अब चोरीयो को अंजाम देने का दुःसाहस कर ले रहे है। कबाड़ के साथ तेल का खेल भी चरम पर है। सूत्रों की माने तो खाकी व खादी के गठजोड़ से सीकेडी माफियाओं का खेल आसान हो पाता है। आखिर न जाने इन डीजल और कबाड़ चोरों को किसका संरक्षण प्राप्त है। जिससे इनका काम निर्वाध गति से निरन्तर चला आ रहा है। नवागत थाना प्रभारी मिथलेश मिश्रा ने कोयला चोरी के सरगना को जेल भेजकर सीकेडी माफियाओं को संदेश दिया है कि अवैध कार्य करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी अनुसार डीजल चोरी का खेल कंबल ओढ़कर बदस्तूर जारी है और काले हीरे के काले खेल की तैयारी शुरू होने वाली है। लॉकडाउन में जब सारी जनता के लिए रात को 8 बजे से घर से बाहर निकलना पाबंद है तो कबाड़ीयों पर यह नियम लागू क्यों नहीं होता। पूरी रात कबाड़ दुकान पर कबाड़ ढोने का खेल जारी रहता है और गश्त लगाने वाले अधिकारियों को कबाड़ियों का तांडव नहीं दिखता है।

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