इंदौर : मिडिल क्लास के हाथ एक बार फिर लगी मायूसी
इंदौर में बजट को देखते व्यापारीगण और एक्सपर्ट्सRaj Express

इंदौर : मिडिल क्लास के हाथ एक बार फिर लगी मायूसी

इंदौर, मध्य प्रदेश : सोशल मीडिया के हर एक प्लेटफॉर्म पर आम लोगों का दर्द झलका, लोगों ने कहा इस बार बजट में कुछ नया नहीं।

इंदौर, मध्य प्रदेश। केंद्रीय बजट पेश होने के बाद सोशल मीडिया के हर एक प्लेटफॉर्म पर आम लोगों का दर्द झलक रहा है। लोगों का कहना हैं इस बार बजट में कुछ नया नहीं है और सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। वित्त मंत्री ने आम बजट-2021 के जरिए किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक को साधने का प्रयास किया है। हालांकि मिडिल क्लास के हाथ एक बार फिर से मायूसी ही लगी है। वहीं इनकम टैक्स के स्लैब में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई। वित्त मंत्री ने बजट में एजुकेशन सेक्टर में हायर एजुकेशन कमीशन स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जल्द ही हायर एजुकेशन कमीशन स्थापित किया जाएगा। दरअसल देशभर में उच्च शिक्षण संस्थानों को संचालित करने उच्च शिक्षा कमीशन के गठन की घोषणा की गई है। पिछले बजट में भी हायर एजुकेशन कमीशन का जिक्र किया गया था। इसके गठन के लिए कानून में संशोधन किया जाएगा।

ध्यान हीं नहीं बल्कि धन भी अधिकतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर :

एक प्रेसवार्ता में बताया गया कि बजट पेश करते हुए देशभर में चल रहे, चुनौती बन किसानों के आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में बजट में किसानों के नाम पर कई सारी घोषणाएं जरुर हुई हैं लेकिन आज भी किसानों को संपूर्ण कर्जमुक्ति और उपज का सही दाम दिलवाने के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन इस बजट में भी नहीं है। जिन मुद्दों पर लाखों करोड़ों का आवंटन बताया गया है उसका लाभ भी बीजी पूंजी निवेशक और एग्री बिजनेस करने वालों को कितना होगा और छोटे व सीमांत किसानों को प्रत्यक्ष फायदा कितना मिलेगा इसकी स्पष्टता भी नहीं है। कई घोषणाओं में न केवल संदिग्धता बल्कि फसाहट दिखाई दे रही है। बजट का अवलोकन यह भी बताता है कि न केवल ध्यान बल्कि धन भी अधिकतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर है।

शहरों में आवास की मांग बढ़ाने मेंं मददगार साबित होगा :

ओमेक्स लिमिटेड के सीईओ मोहित गोयल का कहना हैं 2021-22 के वित्तीय बजट का हम स्वागत करते हैं। इसमें स्वास्थ्य, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर अधिक जोर दिया गया है। इससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ेगी और साथ ही अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। सरकार द्वारा रोड एवं हाईवे, बंदरगाह, बिजली, शहरी विकास, रेलवे जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने से राज्य की राजधानियां व टियर 2, 3 के शहरों को अत्यधिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही किफायती आवास को बढ़ावा देना, इस तरह की परियोजना के लिए कर अवकाश की अवधि को एक वर्ष बढ़ाना, पहली बार घर खरीदने वालों के लिए होम लोन पर डेढ़ लाख रुपए की अतिरिक्त ब्याज कटौती और किफायती आवास के लिए कर में छूट शहरों में आवास की मांग को बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होगा।

आम आदमी के स्वास्थ्य का खास ख्याल :

ओल्ड जीडीसी की अर्थशास्त्र प्राध्यापक डॉ. विमला जैन का कहना हैं बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर उत्पादन लागत का 1.5 गुना किया है। कृषि उत्पादों के निर्यात में 22 और उत्पादों को सम्मिलित किया गया, जिससे एक वर्ष में 1.5 करोड़ किसान लाभांवित होंगे। किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हुए सूक्ष्म सिंचाई के लिए फंड दुगुना किया जो 10 हजार करोड़ रुपए है। कृषि ऋण की सीमा में पिछले साल से 10 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 16.5 लाख करोड़ निर्धारित की। कृषि आधुनिकता के अंतर्गत 1000 कृषि मण्डियों को इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा। डॉ. जैन का कहना हैं आम आदमी के स्वास्थ्य का खास ख्याल रखते हुए स्वास्थ्य बजट पिछले बजट की तुलना में 137 प्रतिशत बढ़ाया गया। आत्मनिर्भर स्वास्थ्य भारत योजना शुरु की जाएगी, जिस पर 6 वर्ष में 64 हजार 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें प्राथमिक क्षेत्र से लेकर उच्चतर की सेवाओं पर व्यय किया जाएगा। 2021-22 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को विशेष महत्वप देते हुए 223846 करोड़ की राशि आवंटित की। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए 75 हजार ग्रामीण हेल्थ सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा भी की गई है।

इम्युनिटी बढ़ाने वाला बजट :

आयुष मंत्रालय का बजट इम्युनिटी बढ़ाने वाला है। आयुष मंत्रालय का बजट 2970 करोड़ रुपए है, जो पिछले साल के 1784 करोड़ से 66 प्रतिशत अधिक है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बताया बजट में लोगों की सेहत का विशेष ख्याल रखा गया है। 75 हजार ग्रामीण हेल्थ सेंटर खोलने का कहा है। सभी जिलों में जांच केंद्र, 602 जिलों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल खुलेंगे। सरकार ने नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वल्र्ड हेल्थ बनाने की भी घोषणा की है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के लिए 2663 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले साल 2100 करोड़ रुपए थे, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का आवंटन 71268 करोड़ रुपए है। उन्होंने बताया कोविड-19 महामारी की वजह से स्वास्थ्य को खास तरज़ीह मिली है लेकिन सेस लगाने से महंगाई भी बढ़ेगी।

जीएसटी ऑडिट की आवश्यकता को खत्म किया गया :

इंदौर सीए ब्रांच के सचिव सीए गौरव माहेश्वरी का कहना हैं वित्त विधेयक 2021 में जीएसटी में एक बड़ा बदलाव करते हुए सीजीएसटी अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (5) को हटाते हुए जीएसटी ऑडिट की आवश्यकता को खत्म किया गया है। वहीं 75 साल से ज्यादा उम्र वाले करदाता को इनकम टैक्स फाइल करने से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि इसके लिए उनके पास पेंशन एवं ब्याज के अलावा आय का कोई ओर साधन नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर रिफंड लेना है तो रिटर्न फाइल करना होगा। टेक्स असेसमेंट के लिए टाइम लिमिट को घटाकर छह साल से तीन साल किया गया। गंभीर मामलों में भी असेसमेंट केस इनकम टैक्स के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर से मंजुरी लेकर तभी खोले जा सकेंगे, जब एक साल में 50 लाख या इससे ज्यादा इनकम छुपाने के सबूत हों। विवाद से विश्वास स्कीम की तर्ज पर डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन कमेटी बनाई जाएगी जिसमें 50 लाख तक की टैक्सेबल इनकम वाले करदाता जिनकी 10 लाख की आय विवादित है वे विवाद सुलझाने के लिए इस कमेटी के पास जाएंगे। टैक्स ऑडिट के लिए टर्नओवर की लिमिट 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी गई है। इसके लिए शर्त रखी कि 95 प्रतिशत ट्रांजेक्शन डिजिटल होना चाहिए। सभी के लिए अफोर्डेबल हाउस के ब्याज पर 1.5 लाख की अतिरिक्त छूट को एक साल और बढ़ाकर 31 मार्च 2022 तक कर दिया, लेकिन इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया।

ज्यादातर फोकस रेग्युलेटरी संस्थाओं के गठन पर :

एक्सपर्ट दिनेश पाटीदार का कहना हैं बजट में दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाया गया है जिसमें कोविड जैसी महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है। इस बजट से लगभग सभी सेक्टर की बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है। कुछ जटिल कराधान प्रक्रियाओं को आसान ओर सरल बनाने पर बल दिया गया है। स्टील और कॉपर की कीमतों में जो अनावश्यक उछाल आ रहा था उस पर अंकुश लगाने के लिए 2.5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी कम करना और सोलर इंवर्टर पर 20 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाकर मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने के साथ-साथ भारतीय पावर इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट्स को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वागत योग्य कदम है। इस बार 'यादातर फोकस रेग्युलेटरी संस्थाओं के गठन पर किया गया है जिससे उन संस्थाओं की कार्य प्रणाली को भली-भांति दिशा दी जा सके।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

No stories found.
Raj Express
www.rajexpress.co