कालाबाजारी की जांच में गोलमाल : मलगो में ग्रामीणों ने गेहूं की चोरी पकड़ी
मलगो में ग्रामीणों ने गेहूं की चोरी पकड़ीसांकेतिक चित्र

कालाबाजारी की जांच में गोलमाल : मलगो में ग्रामीणों ने गेहूं की चोरी पकड़ी

सिंगरौली : जरूरत मंद पात्र लोगों के लिए जारी कोटे के राशन में गोलमाल की घटना में शासकीय जांच को खानापूर्ति कहा जा रहा है। इसी आधार पर कलेक्टर को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। जरूरत मंद पात्र लोगों के लिए जारी कोटे के राशन में गोलमाल की घटना में शासकीय जांच को खानापूर्ति कहा जा रहा है। इसी आधार पर कलेक्टर को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इसमें ग्रामीणों ने अब तक हुई जांच पर सवाल भी उठाया है। अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से इस आशय की शिकायत ज्ञापन में की गई है। किसान सभा के जिला सचिव श्रवण विश्वकर्मा ने शुक्रवार को इसी सम्बंध में कलेक्टर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन से सामने आया कि ग्रामीण इस मामले में जारी जांच से संतुष्ट नहीं हैं।

घटना के अनुसार ग्रामीणों ने 6 सितम्बर को गांव मलगो की उचित मूल्य की दुकान के लिए आवंटित गेहूं व चावल की कथित काला बाजारी का मामला पकड़ा। इस दिन ग्रामीणों ने एक ट्रैक्टर ट्राली में लाए गए कोटा के गेहूं व चावल को सेटेलाइट प्राथमिक पाठशाला मनरहवा टोला के रसोई घर में पकड़ा। संदेह है कि वहां कोटे के अनाज काला बाजारी के लिए रखा गया था। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने पाठशाला के रसोई घर पर ताला भी जड़ दिया और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। बताया गया कि इस दौरान ग्रामीणों की कोटेदार से बोलचाल भी हुई। कोटेदार की ओर से इसे आंगनवाड़ी का गल्ला बताया गया था।

कलेक्टर को दिया ज्ञापन :

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला सचिव श्रवण विश्वकर्मा व ग्रामीणों की ओर से इसी सम्बंध में कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में घटना की सही जांच नहीं होने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से एस डी एम से मामले की जांच करवाई जा रही है।

ज्ञापन में कहा गया है कि घटना के दिन कोटे का गेहूं व चावल पकड़ने के बाद माडा थाना पुलिस को सूचना दी गई मगर शिकायत है कि कोई वहां नहीं पहुंचा। ज्ञापन में कहा गया है कि इसके बाद कलेक्टर को घटना से अवगत कराया गया। इस पर तहसीलदार गांव में आए और केवल कोटेदार से पूछताछ कर चले गए मगर उन्होंने छिपाई गई जगह का मौका नहीं देखा। शिकायत है कि तहसीलदार ने गेहूं व चावल पकड़ने वाले किसी भी ग्रामीण से कोई बात करने की जरूरत ही नहीं समझी। इसके चलते ही ग्रामीण जांच के नाम पर खानापूर्ति होने का संदेह जता रहे हैं।

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