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क्या ग्वालियर में आज भी चलता है राजतंत्र ?
क्या ग्वालियर में आज भी चलता है राजतंत्र ?|Social Media
मध्य प्रदेश

क्या ग्वालियर में आज भी चलता है राजतंत्र ?

सरकारी बैठक में सिंधिया की उपस्थिति पर बीजेपी ने सवाल उठाये हैं। जानिए क्या है मामला :

Rishabh Jat

राज एक्सप्रेस। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शहर में चल रहे विकास कार्यों, प्रस्तावित और लंबित योजनाओं की समीक्षा की। इसे लेकर भाजपा ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा ने पूछा है कि, सिंधिया किस हैसियत से बैठक ले रहे हैं। मामले में कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कहा कि, यह मंत्री एवं विधायकों के समक्ष शहर के विकास को लेकर बातचीत के लिए बैठक की गई थी। सिंधिया की उपस्थिति को लेकर उन्होंने चुप्पी साध ली।

बता दें, मौजूदा स्तिथि में सिंधिया न तो विधायक हैं और न ही सांसद। बुधवार को कलेक्ट्रेट में बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी, विधायक मुन्नालाल गोयल, विधायक प्रवीण पाठक, कलेक्टर अनुराग चौधरी, एसपी नवनीत भसीन, निगमायुक्त संदीप माकिन आदि मौजूद रहे। इस बैठक में सिंधिया भी शामिल हुए।

मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र है, लेकिन ग्वालियर में राजतंत्र है: बीजेपी मीडिया प्रभारी

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि, भारत में प्रजातंत्र है, शायद मध्य प्रदेश में भी प्रजातंत्र है, लेकिन ग्वालियर में आज भी राजतंत्र है। इसीलिए महाराजा (ज्योतिरादित्य सिंधिया) जिले के कलेक्टर, एसपी सहित अधिकारियों और सूबे के वजीरों को हुक्म फरमा रहे हैं। पाराशर ने कहा कि, जब वह न सांसद है, न विधायक, न पार्षद तो किस हैसियत से बैठक ले रहे हैं।

इस पर कांग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल का कहना हैं कि, ज्योतिरादित्य सिंधिया राष्ट्रीय नेता हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे और मध्य प्रदेश में भी वरिष्ठ नेता हैं। विकास के मुद्दे पर सभी को एकजुट होना चाहिए। भाजपा सांसद को बैठक में बुलाया गया था, ये आते हैं नहीं और बस आरोप लगाते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विधायक प्रवीण पाठक ने कहा कि, जिस परिवार के कारण पूरे विश्व में ग्वालियर की पहचान है, उस परिवार का प्रतिनिधि ही शहर के विकास की समीक्षा करेगा। उनके बिना शहर का अस्तित्व ही नहीं है।

लोकतंत्र के इस दौर में पूर्व नेताओं की शासकीय कार्यों में प्रत्यक्ष उपस्थिति विपक्ष को नहीं पची हैं। इसलिए शायद बीजेपी द्वारा सवाल उठाये गए हैं। अब ग्वालियर की जनता ही बता सकती है क्या इसे वाे सही मानते हैं या गलत।

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