महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप्प हुईं, सरकार के आय स्त्रोत हुए कम
महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप्प हुईSyed Dabeer Hussain - RE

महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप्प हुईं, सरकार के आय स्त्रोत हुए कम

इंदौर, मध्यप्रदेश : लगातार आखिर क्यों बढ़ रही है पेट्रोल-डीजल की कीमत विशेषज्ञ ने दी महत्वपूर्ण जानकारी, भारत करता है अपनी जरुरत का 80 प्रशित तेल आयात।

इंदौर, मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर 31.55 रुपए प्रति लीटर वैट लगता है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। डीजल पर 21.68 रुपए प्रति लीटर वैट है। डीजल पर सबसे अधिक वैट राजस्थान में है जो 21.82 रुपए प्रति लीटर है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। अपनी जरुरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार का प्रभाव भारत पर ज्यादा पड़ता है। पिछले कुछ समय से महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप्प हो गई, सरकार के आय स्त्रोत कम हुए, राजकोषीय घाटा भी बढ़ने लगा। इस स्थिति में आर्थिक प्रबंधन व्यवस्थित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले करों में वृद्धि की। यह कहना है माता जीजाबाई शा.स्ना. कन्या महाविद्यालय की अर्थशास्त्र प्राध्यापक डॉ. विमला जैन का। लगातार आखिर क्यों बढ़ रही है पेट्रोल-डीजल की कीमत विषय पर उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी दी।

यह है पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ने के कारण :

डॉ. जैन ने बताया ओपेक संगठन अर्थात कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों की चालाकी भी कीमत बढ़ाने के लिए उत्तरदायी है। ये देश जानबूझकर तेल के उत्पादन में कमी कर रहे हैं। जैसे सउदी अरब तेल उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती कर रहा है। विश्व में तेल की मांग अधिक है और पूर्ति कम, परिणाम स्वरुप कीमतों में वृद्धि हो रही है।

कल्याणकारी योजानाओं पर खर्च होता है राजस्व :

उन्होंने बताया तेल पर लगाए जाने वाले करों से प्राप्त राशि का उपयोग, अनेक कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है। जैसे गरीब कल्याण योजना, इसके अंतर्गत देश में लाखों परिवार लाभांवित हो रहे हैं। इसमें गरीब वर्ग के लोगों को मुफ्त पांच किलों अनाज दिया जाता है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, नि:शुल्क टीकाकरण लक्ष्मी, जननी सुरक्षा, मिशन इन्द्रधनुष आदि अनेक जन कल्याण की योजना चलाई जा रही है। इन योजनाओं से कम आय वर्ग व गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला वर्ग लाभांवित हो रहा है।

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत कम करने के लिए जीएसटी का दायरा :

डॉ. जैन ने बताया यदि पेट्रोलियम पदार्थ जीएसटी के दायरे में आते हैं तो उनकी कीमत मेें काफी कमी हो सकती है। जीएसटी की उच्चतम दर 28 प्रतिशत है जबकि केंद्र, राज्य सरकार के कर 100 प्रतिशत से अधिक हो जाते हैं। साथ ही विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा के नए स्त्रोत ठभी तलाशने की आवश्यकता है।

इस तरह तय होती है पेट्रोल डीजल की कीमतें :

डॉ. जैन ने बताया विदेश से कच्चा माल खरीदने के बाद रिफायनरी में जाता है। शुद्ध होने पर तेल कंपनियां पेट्रोल पम्पों पर पहुंचाती है। पेट्रोल पम्प उपभोक्ताओं को बेचते हैं। इस चरण तक आते-आते कीमत आधार मूल्य की तुलना में तीन गुना बढ़ जाती है, क्योंकि इसमेंं मालभाड़ा, कम्पनी का मुनाफा, पेट्रोल पम्प मालिक का कमिशन, केंद्र और राज्य सरकार के कर, सरचार्ज शामिल होते हैं।

पेट्रोल का विवरण :

  • आधार मूल्य - 41.00 रु. प्रति लीटर

  • माल भाड़ा - 0.36

  • उत्पादक शुल्क (केंद्र सरकार) - 32.90

  • पेट्रोल पम्प मालिक का कमीशन - 3.85

  • वैट (राज्य सरकार) - 31.55

  • कुल कीमत - 109.66

डीजल का विवरण :

  • आधार मूल्य - 42.00 रु. प्रति लीटर

  • माल भाड़ा - 0.33

  • उत्पादक शुल्क (केंद्र सरकार) - 31.90

  • पेट्रोल पम्प मालिक का कमीशन - 2.60

  • वैट (राज्य सरकार) - 21.68

  • कुल कीमत - 98.51

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