राजधानी में अकीदत से मनाया गया ईद उल अजहा त्योहार

भोपाल, मध्यप्रदेश : राजधानी त्याग और बलिदान का त्योहार ईद उल अजहा राजधानी में शनिवार को अकीदत के साथ मनाया गया।
राजधानी में अकीदत से मनाया गया ईद उल अजहा त्योहार
राजधानी में अकीदत से मनाया गया ईद उल अजहा त्योहारShahid Kamil

भोपाल, मध्यप्रदेश। राजधानी त्याग और बलिदान का त्योहार ईद उल अजहा राजधानी में शनिवार को अकीदत के साथ मनाया गया हर साल की तरह इस बार का त्यौहार थोड़ा अलहदा था ना तो ईदगाह में सामूहिक नमाज अदा की गई नाही मोहल्ले की मस्जिदों में सभी मस्जिदों के अंदर पांच-पांच लोगों नहीं ईद उल अजहा की विशेष नमाज अदा की बाकी लोगों ने अपने घर में ही नमाज अदा करके कुर्बानी का फर्ज अदा किया।

नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक दूसरे को एक दूसरे को बगैर गले मिले बधाई और मुबारकबाद दी, कोरोना वायरस के बाद वह लॉक डाउन की वजह से इस बार ईद उल अजहा का त्यौहार फीका दिखाई दिया ना दो बकरों की हॉट लगी और ना ही लोगों को जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार खोलें।

दिनभर चलता रहा कुर्बानी का सिलसिला :

ईद उल अजहा की नमाज अदा करने के बाद लोग दिनभर कुर्बानी के बकरों पर कुर्बानी करते रहे यह सिलसिला श्याम असर की नमाज तक चला इस बार हर साल की तरह कुर्बानी के बकरों की आवाजाही शहर में नहीं दिखाई दी, पिछले चार-पांच महीने से लॉक डाउन के चलते आर्थिक रूप से कमजोर हुए लोगों ज्यादातर लोगों ने कुर्बानी कीइस बार बिरयानी पूर्व में की दावत ए नहीं हुई। हर साल की तरह इस बार एक दूसरे को बुलाकर दावत नहीं दी गई और ना ही बिरयानी कोरमा की लजीज दावतें भी नहीं हुई दरअसल को करुणा वायरस के चलते लोगों ने एहतियात बरता और सावधानी बरतते हुए एक दूसरे के घर भी नहीं गए।

करोड़ों रुपए का खाल का धंधा :

कुर्बानी के बकरे और बड़े जानवरों से निकलने वाली खाली बार मारी मारी फिरती रही इसको खरीदने के लिए कोई भी मैं भारी नजर नहीं आए आमतौर पर यह हर साल में इनके दामों में बिकती है और यहां से करोड़ों रुपए का खाल का कारोबार होता था ट्रकों से भरकर यह खाले कानपुर यूपी की तरफ जाती थी।

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