Electricity Bill : बिजली विभाग ने भेजा 80 हजार खरब रुपये का बिल
रिचकन तिवारी बिल लिए हुएShashikant Kushwaha

Electricity Bill : बिजली विभाग ने भेजा 80 हजार खरब रुपये का बिल

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। बिजली विभाग ने उपभोक्ता को थमाया 80 हजार खरब रुपये का बिल, उपभोक्ता रिचकन तिवारी और उनका परिवार बिल देख हुए अचंभित और परेशान। विभाग ने बिल को ठहराया फर्जी।

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। बिजली हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है, बिजली के बिना हम अपने जीवन की परिकल्पना भी नहीं कर सकते हैं। आज जब पूरी तरह से मशीन युग है ऐसे में बिजली कितनी महत्वपूर्ण है यह बखूबी समझा जा सकता है। आज हम अपनी दिनचर्या में जिस प्रकार से विद्युत उपकरणों का उपयोग करके अपने कार्यों को सरलता एवं सुगमता के साथ कर रहे हैं जिससे स्पष्ट है कि बिजली हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही बिजली विभाग के द्वारा भी कई बार उपभोक्ताओं को जब बिल थमाया जाता है तो उस बिल के कारण बिजली की तरह बिल देखने के बाद झटका भी लगता है। आज ऐसा ही एक वाकया सिंगरौली जिले में देखने को मिला।

क्या है मामला :

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले की डिग्गी गांव के रहने वाले रिचकन तिवारी जो कि पेशे से किसान है और गांव में रहते हैं। जब बिजली विभाग के द्वारा बिल थमाया गया बिजली बिल को देखकर श्री तिवारी सहम गए और परिवार सकते में आ गया और आए भी क्यों ना बिजली विभाग के द्वारा भारी भरकम बिल भेज दिया गया जिसके बाद से किसान के माथे में चिंता की लकीरें आ गई। अगर हम बिल की बात करें तो बिजली विभाग के द्वारा 80000 खरब रुपए का बिल थमा दिया गया।

बिजली बिल
बिजली बिलShashikant Kushwaha

बिजली विभाग के कर्मचारी दे रहे हैं धमकी :

80000 खरब रुपए बिजली बिल की बात जिले में आग की तरह फैल गई और जैसे ही इस बात की भनक मीडिया को लगी मीडिया ने मामले को उठा लिया और मीडिया के सामने मामला आते ही बिजली विभाग के कर्मचारी द्वारा उन्हें फोन के माध्यम से धमकाने का प्रयास किया धमकाने की बात को लेकर स्पष्ट करना चाहेंगे कि यह उपभोक्ता के द्वारा स्वयं बताया गया।

इनका कहना है :

संबंधित मामले को लेकर जब बिजली विभाग के अधीक्षण यंत्री श्री एस.पी. तिवारी से बात की गई तब श्री तिवारी के द्वारा कहा गया कि यह बिल फर्जी एवं गलत है।

बहरहाल जिस तरह का मामला सामने आया है, उसने बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आखिर इतनी बड़ी चूक विभाग के द्वारा कैसे हो गई और यदि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जब बिल को फर्जी बता रहे हैं ऐसे में न्याय की उम्मीद और क्या लगाई जा सकती है।

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