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तो क्या ठेकेदार नदी में रेत की जगह राख ढूंढेगा
तो क्या ठेकेदार नदी में रेत की जगह राख ढूंढेगा|Satish Tiwari
मध्य प्रदेश

तो क्या ठेकेदार नदी में रेत की जगह राख ढूंढेगा

शहडोल, मध्य प्रदेश: गोहपारू तहसील में पंचायत के द्वारा संचालित की जा रही भुरसी और सोन टोला रेत खदान की ईटीपी बंद कर दी गई है।

Satish Tiwari

राज एक्सप्रेस। शहडोल के गोहपारू तहसील में पंचायत के द्वारा संचालित की जा रही भुरसी और सोन टोला रेत खदान की ईटीपी बंद कर दी गई है। खबर है कि, भोपाल से भुरसी की आईडी ब्लाक की गई है, वहीं अनियमितता मिलने पर सोन टोला रेत खदान की आईडी जिला प्रशासन के द्वारा बंद की गई है और पंचायत को नोटिस भी जारी किया गया है। ईटीपी तो बंद हो गई, लेकिन इन खदानों से रेत का खनन अभी भी जारी है। जयसिंहनगर तहसील की भठगवां खदान कटनी के खनिज कारोबारी के कब्जे में है, उसके गुर्गाे के द्वारा खदान का संचालन किया जा रहा है। ब्यौहारी की रसपुर रेत खदान में भाजपा नेताओं ने कब्जा जमा रखा है, बुढ़वा और ब्यौहारी के क्षेत्र का भी साथ संचालन में देखने को मिल रहा है।

आईडी बंद, खनन जारी

भुरसी और सोन टोला रेत खदान की आईडी जरूरी बंद कर दी गई है, लेकिन यहां पर वाहनों की आवाजाही बनी हुई है, बताया गया है कि रात में छोटे-बड़े वाहन इन खदानों में रेत लेने के लिए पहुंच रहे हैं, जिन्हें दूसरी खदानों की टीपी देकर रेत की निकासी कराई जा रही है, खदान में मोर्चा सम्हालने वाले कारिंदों के द्वारा अनूपपुर जिले की खदानों की टीपी वाहनों के सड़क पर आने के बाद दी जाती है।

मशीनों पर नहीं रोक

भठगवां और रसपुर रेत खदान वैसे तो पंचायत की है, लेकिन यहां पर खनिज कारोबारी और भाजपा नेताओं ने कब्जा जमा रखा है, सोन टोला और भुरसी के बंद होने का फायदा भी इन्हें जमकर मिल रहा है, रीवा और सतना की ओर से आने वाले वाहन अब इन खदानों में पहुंच रहे हैं, पोकलेन, जेसीबी मशीन लगाकर नदी से रेत का खनन कराया जा रहा है। खबर है कि रेत के परिवहन के लिए हाइवा सहित बड़े वाहनों को सीधे नदी में उतारा जा रहा है, जो कि पर्यावरण स्वीकृति के नियमों के विपरीत है, मैनेजमेंट के चलते खनिज, राजस्व, वन, पीसीबी और वर्दीधारियों की मौन स्वीकृति है।

सड़क के उड़ गये परखच्चे

भठगवां से बड़े वाहन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क से गुजर रहे है, जिससे पूरी सड़क ही जर्जर हो चुकी है, जयसिंहनगर से रीवा तक सड़क का यही हाल है, रसपुर से भी ओव्हर लोड वाहन रेत लेकर रीवा की ओर जा रहे हैं, जिससे पूरा मार्ग ही क्षतिग्रस्त हो चुका है, आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। संबंधित विभाग ने भी कई पत्राचार किये, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों ने उन कागजों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया, जिसका खामियाजा राहगीर उठा रहे हैं, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल के अलावा जिले के प्रभारी मंत्री ओमकार सिंह मरकाम माफिया के खिलाफ अपनी सरकार की वाह-वाह बताने में कोई परहेज नहीं कर रहे, लेकिन जिले में इसका असर शून्य दिखाई दे रहा है, जिसका उदाहरण भठगवां और रसपुर रेत खदाने हैं।

...तो क्या राख छानेगा ठेकेदार

रोजाना रसपुर और भठगवां खदान के अलावा भुरसी और सोन टोला से अवैध रूप से रेत की 500 से 700 गाड़ियां निकाली जा रही हैं, शासन को राजस्व की हानि हो रही है, वंशिका ग्रुप ने 43 करोड़ रूपये में शहडोल जिले की खदानों का ठेका लिया है, अगर हाल ऐसा ही चलता रहा तो, लगता है कि ठेकेदार को खदानों में रेत की जगह राख मिलेगी। प्रशासन को जल्द से जल्द इस पर अंकुश लगाना होगा।

भुरसी रेत खदान की आईडी भोपाल से बंद है, सोनटोला में अनियमितता मिलने के चलते आईडी बंद की गई है, भठगवां और रसपुर की आईडी चालू है। मशीनें और भारी वाहन लग रहे हैं तो टीम भेजकर जांच कराई जायेगी।

सुश्री फरहत जहां खनिज अधिकारी शहडोल

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