Jaya Arogya Hospital
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मध्य प्रदेश

जेएएच : मरीज की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : मरीज की मौत होती देख उसके परिजनों में शामिल महिलाओं ने इलाज कर रही नर्स व पैरामेडिकल स्टॉफ की जमकर मारपीट की।

राज एक्सप्रेस

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ग्वालियर, मध्य प्रदेश। पैरालाइसिस व सांस की बीमारी के चलते जेएएच के न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती किए गए सत्तर वर्षीय मरीज की गुरूवार-शुक्रवार की रात के बाद हालत बिगड़ती देख वार्ड में मौजूद स्टॉफ ने उसे लाइफ सेविंग्स ड्रग दी। दवा देने के कुछ देर बाद ही मरीज की सांस थम गई। मरीज की मौत होती देख उसके परिजनों में शामिल महिलाओं ने इलाज कर रही नर्स व पैरामेडिकल स्टॉफ की जमकर मारपीट की। यही नहीं नर्स को बचाने जब महिला सुरक्षा कर्मी बीच-बचाव करने पहुंचीं तो मृतक के परिजनों ने उनके साथ भी झूमाझटकी कर डाली। हंगामे की सूचना मिलते ही थाना कंपू पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हंगामा कर रहे मृतक के परिजनों को शांत कराया। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने जब परिजनों से पीएम कराने की बात कही तो परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।

न्यूरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. दिनेश उदैनिया ने बताया कि भिण्ड जिले के ग्राम जतारपुरा निवासी सत्तर वर्षीय वृद्ध जगदीश कुमार को शुक्रवार को पेरालाइसिस का अटैक के साथ ही सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। हालत अधिक गंभीर होने पर परिजनों ने उपचार के लिए जेएएच के न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती कराया था। लेकिन उपचार देने के बाद भी वृद्ध जगदीश की हालत और बिगड़ती देख इलाज कर रहे डॉक्टर व नाइट ड्यूटी कर रही महिला नर्स व अन्य पैरामेडिकल स्टॉफ ने सीनियर कंसलटेंट के परामर्श पर लाइफ सेंविग्स ड्रग दिया। ड्रग देने के कुछ ही देर बाद जगदीश की मौत होने पर परिजन भड़क गए और उन्होंने डॉक्टरों व नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए वार्ड में मौजूद पैरामेडिकल स्टॉफ के साथ मारपीट कर डाली। हंगामा व मारपीट की खबर मिलने के बाद मौके पर पहुंची थाना कंपू पुलिस से परिजनों का कहना था कि इंजेक्शन लगाने से पहले उनका मरीज बातचीत कर रहा था, इंजेक्शन लगाने से ही मौत हुई है इस मौत के जिम्मेदार इलाज कर रहे डॉक्टर व नर्स हैं।

स्टॉफ ने काम करने से किए हाथ खड़े :

मरीज के परिजनों द्वारा पैरा मेडिकल स्टॉफ के साथ की गई मारपीट के बाद न्यूरोलॉजी में पदस्थ पैरोमेडिकल स्टॉफ ने ड्यूटी करने से इंकार कर दिया। पैरामेडिकल स्टॉफ का कहना था कि मरीज के परिजन रोजाना ही मरीज के इलाज में लापरवाही करने का आरोप ही नहीं लगाते हैं बल्कि गालीगलौज व मारपीट करने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसे दहशत भरे माहौल में हम काम नहीं कर पाएंगे। काफी देर की समझाइश के बाद स्टाफ काम करने को तैयार हुआ।

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