यूरिया की किल्लत से परेशान अन्नदाता
यूरिया की किल्लत से परेशान अन्नदाता|Social Media

शहडोल : यूरिया की किल्लत से परेशान अन्नदाता

शहडोल, मध्य प्रदेश : किराना दुकानों सहित अन्य स्थानों पर खुलेआम कालाबाजारी। मौजूदा समय में किसानों को यूरिया न मिल पाने से उन्हें अब फसल बर्बाद होने की चिंता भी सता रही है।

शहडोल, मध्य प्रदेश। कोरोना महामारी ने किसानों की पहले ही कमर तोड़ दी थी, बारिश अच्छी होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इस बार फसल भी अच्छे दाम देगी, लेकिन अब फसल तैयार करने के लिए उन्हें यूरिया के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, सरकार के नियंत्रण में यूरिया का पूरा काम होता है, 80 फीसदी यूरिया सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिलता है, वहीं 20 प्रतिशत दुकानदारों के माध्यम से बिक्री के प्रावधान हैं, लेकिन जिले भर में इन दिनों किसान यूरिया के  संकट से जूझ रहे हैं, कालाबाजारी भी चरम पर है, अगर जल्द ही इस मामले में ध्यान नहीं दिया गया तो, धान सहित अन्य फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच सकती है।

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चेहरे पर चिंता की लकीरें :

सीजन में धान की खेत पूरे जिले भर में किसान सबसे अधिक करते हैं, कुछ प्रतिशत ही अन्य फसले जिले में किसानों के द्वारा लगाई जाती है, इस बार सभी तहसीलों में बरसात अच्छी हुई कोरोना के दौरान परेशान किसानों को उम्मीद थी कि अच्छे पानी के बाद उन्हें फसल से दाम भी अच्छे मिलेंगे, मौजूदा समय में किसानों को यूरिया न मिल पाने से उन्हें अब फसल बर्बाद होने की चिंता भी सता रही है। एक बार फिर से अन्नदाताओं के चेहरे पर चिंता की लकीर भी देखने को मिल रही है।

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3 बार उपयोग में आता है यूरिया :

किसी भी खेती के लिए यूरिया खाद का उपयोग किसान तीन बार करते हैं, रोपा लगाने के बाद और फिर जब फसल बढ़ने लगती है, उसके साथ ही खड़ी फसल तथा तैयार होने के समय यूरिया का उपयोग किसानों के द्वारा किया जाता है, कड़ी मेहनत कर अन्नदाता फसल को तैयार करते हैं, लेकिन यूरिया की कालाबाजारी और सहकारी समितियों में बैठे जिम्मेदारों के द्वारा मुनाफाखोरी के चलते इस बार फिर किसानों को यूरिया के लिए परेशान कर रहे हैं। समितियों में तो किसानों को जितना यूरिया मिलना चाहिए, वह नहीं दिया जा रहा है।

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मांग से कम आपूर्ति :

नरगी के किसान कैलाश त्रिपाठी ने बताया कि सहकारी समितियों में बैठे जिम्मेदार कालाबाजारी करा रहे हैं, किसानों को 40 किलो यूरिया दी जा रही है, एक एकड़ में 40 किलो यूरिया फसल में लगता है और उसे तीन बार फसल तैयार करने के लिए यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन कागजी कोरम पूर्ति करते हुए समितियों में बैठे जिम्मेदार किसानों को परेशान कर रहे हैं, अगर सही वक्त पर यूरिया नहीं मिला तो, फसल बर्बाद हो सकती है, एक एकड़ में पूरी फसल तैयार करने के लिए लगभग 1 क्विंटल 20 किलो यूरिया की आवश्यता होती है, लेकिन आधी मात्रा में यूरिया प्रदान किया जा रहा है, जो कि अन्नदाताओं के साथ सरासर न इंसाफी है, अगर फसल बर्बाद हुई तो, इसका जिम्मेदार कौन होगा, स्थानीय स्तर पर किसानों की सुनने के लिए कोई भी तैयार नहीं है।

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समितियों के चक्कर लगाते अन्नदाता :

पूरे जिले भर से यह मामला सामने आ रहा है कि यूरिया के लिए किसान परेशान हैं और वह अपनी फसलों को चौपट होने से बचाने के लिए यूरिया के लिए सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, कोरोना महामारी ने किसानों की कमर पहले से ही तोड़ रखी है, अगर वह दुकान से यूरिया खरीदते हैं तो, उन्हें अधिक दाम अदा करने पड़ते हैं, ऐसे में समिति ही एक चारा है कि किसानों को समिति से ही यूरिया मिल सकता है, जितने एकड़ का कास्तकार है, उससे कम मात्रा में पूरे जिले भर में किसानों को दी जा रही है। कोरोना काल में भी सहकारी समितियों में बैठे जिम्मेदार काली कमाई करने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं।

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किराना दुकानों तक में कालाबाजारी :

2019 में जब सूबे में कांग्रेस की सरकार थी तो, भाजपा ने विधानसभा में यूरिया के मुद्दे को जमकर उठाया था, उस दौरान तात्कालीन कृषि मंत्री सचिन यादव ने दिल्ली जाकर केन्द्रीय उर्वरक मंत्री से मुलाकात की थी, जिसके बाद यूरिया की आपूर्ति केन्द्र के द्वारा की गई थी, एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बार केन्द्र ने राज्य सरकार को अधिक मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया है, वहीं सत्ता परिवर्तन होने के बाद भाजपा सूबे में काबिज है, लेकिन एक साल पहले किसानों के लिए यूरिया का मुद्दा उठाने वाली भाजपा सरकार इस बार गंभीर नजर नहीं आ रही, आलम यह है कि पूरे जिले भर में किराना दुकानों सहित अन्य स्थानों पर यूरिया की कालाबाजारी चरम सीमा पर है।

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500 के पार बिक रहा यूरिया :

कृषि विभाग सहित प्रशासन के अधिकारियों ने अभी तक किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया है कि सहकारी समितियां किसानों को निर्धारित मापदण्डों के तहत यूरिया उपलब्ध करा रही हैं कि नहीं, सहकारी समिति में किसानों को 45 किलो की यूरिया की बोरी 270 रूपये में मिलती है, बाजार में 450 रूपये में यूरिया मिल रहा है, कालाबाजारी इस हद तक बढ़ चुकी है कि अगर किसानों को यूरिया चाहिए तो, उन्हें 500 से 650 रूपये तक अदा करने पड़ रहे हैं। जिले में अंधेर नगरी चौपट राजा के तर्ज पर यूरिया वितरण का खेल चल रहा है। कृषक, समाजसेवी व बसपा नेता कैलाश त्रिपाठी ने कलेक्टर सहित संभागायुक्त से इस मामले में जल्द ही संज्ञान लेकर किसानों को यूरिया उपलब्ध कराने के साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।

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इनका कहना है :

यूरिया की किल्लत और कालाबाजारी की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद भोपाल के अधिकारियों से बात कर हल निकाल लिया गया है, 850 मैट्रिक टन यूरिया जिले में पहुंच चुकी है, 250 मैट्रिक टन वाहनों के माध्यम से कवाना कर दी गई है, अब यूरिया की परेशानी किसानों को नही होगी, जहां-जहां पर कालाबाजारी की जानकारी मिली है वहां पर रैडम जांच कराई जायेगी और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

डॉ. सतेन्द्र सिंह, कलेक्टर शहडोल

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