माँ नर्मदा की कृपा से किसान होंगे समृद्ध : पटेल
माँ नर्मदा की कृपा से किसान होंगे समृद्ध : पटेलSocial Media

माँ नर्मदा की कृपा से किसान होंगे समृद्ध : पटेल

बड़वानी : किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल नर्मदा परिक्रमा के दौरान किसानों को बता रहे हैं नए कृषि कानूनों के फायदे। शनिवार सुबह बड़वानी से रवाना होकर शाम को विमलेश्वर, गुजरात पहुंचे।

भोपाल, मध्य प्रदेश। किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल नर्मदा परिक्रमा के दौरान शनिवार सुबह बड़वानी से रवाना होकर शाम को गुजरात के विमलेश्वर पहुंचे। परिक्रमा के दौरान बड़वानी जिले के सिलावद, पलसूद, निवाली, दोंदवाड़ा, पानसेमल, खेतिया इत्यादि स्थानों पर श्री पटेल ने किसानों को नवीन कृषि कानूनों और प्रदेश सरकार द्वारा किसान हित में लिये गए निर्णय के फायदे बताए। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर कृषि मंत्री का जनता ने स्वागत-अभिनंदन किया।

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि देश-प्रदेश के विकास और किसानों की समृद्धि की कामना के साथ वे माँ नर्मदा की परिक्रमा सपरिवार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा मैया ने अपने तट पर रहने वाले किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया है। देश के नए कृषि कानून माँ नर्मदा की कृपा से सभी किसानों को समृद्धशाली बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश की सरकार लगातार किसानों के लिए काम कर रही है। मात्र 11 महीनों में किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं।

15 मार्च से गेहूं के साथ चना, मसूर और सरसों का उपार्जन :

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि इस वर्ष 15 मार्च से प्रदेश में गेहूं के साथ ही चना, मसूर और सरसों का उपार्जन किया जाएगा। गेहूं उपार्जन के साथ ही लगभग 80 लाख मेट्रिक टन चना, मसूर और सरसों का उपार्जन किया जाएगा। कृषि मंत्री श्री पटेल ने कहा कि चना, मसूर, सरसों का उपार्जन गेहूं के साथ होने से किसानों के खाते में अतिरिक्त लगभग 16 हजार करोड़ की राशि जाएगी। उपार्जित होने वाली चना, मसूर, सरसों लगभग 80 लाख मीट्रिक टन अर्थात आठ करोड़ क्विंटल होगी। यदि प्रति क्विंटल न्यूनतम एक हजार रुपए का लाभ किसान को होता है, तो आठ हजार करोड़ रुपए और यदि 2000 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ किसान को होगा, तो लगभग 16 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ किसानों को होगा। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चने का समर्थन मूल्य 5100 रुपए घोषित किया गया है। किसान अब सीधे समर्थन मूल्य पर ही अपनी फसल विक्रय करेगा, जिससे किसान को खाते में सीधे 1500 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ होगा, क्योंकि बाजार मूल्य 3400 रुपए से 4000 रुपए तक का ही है।

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