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गणेश विसर्जन पर्यावरण के लिए हानिकारक
गणेश विसर्जन पर्यावरण के लिए हानिकारक|Baraiya Pankaj - RE
मध्य प्रदेश

शहडोल: जल स्रोतों में गणेश विसर्जन पर्यावरण के लिए हानिकारक

शहडोल, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गणेश प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों व प्रयोगशाला प्रभारियों को विसर्जन से जुड़े कुछ निर्देश दिये हैं।

Afsar Khan

राज एक्सप्रेस। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति की स्थापना करने के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उनकी प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। आज वो दिन आ गया है, जब बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। आज बप्पा 12 सितंबर को जाने वाले हैं। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गणेश प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों व प्रयोगशाला प्रभारियों को विसर्जन से जुड़े कुछ निर्देश दिये हैं।

एक सप्ताह में जल गुणवत्ता की होगी जांच:

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गणेश प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों व प्रयोगशाला प्रभारियों को निर्देशित किया है कि, प्रत्येक प्रतिमा विसर्जन स्थल की, विसर्जन के पहले, विसर्जन के दौरान हुआ, विसर्जन के 1 सप्ताह बाद जल गुणवत्ता की जांच करें। इस जांच में भौतिक रासायनिक पैरामीटर जैसे पीएच डिजाल्वड ऑक्सीजन, बायो कैमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड, कैमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड, कण्डक्टीविटी, टोटर डिजाल्वड सालिड्स, टोटल सालिड्स एवं मेटल्स (केडमियन कोमियम, आयरन, निकल, लेड जिंक कॉपर) की जांच किया जाना है।

जल गुणवत्ता की होगी सेम्पलिंग :

इस कार्य हेतु क्षेत्रीय अधिकारियों व प्रयोगशाला प्रभारियों को जल स्रोतों की क्षेत्रानुसार सेंपलिंग बिंदु निश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह उल्लेखनीय है कि जल स्रोतों में प्रतिमाओं के विसर्जन के फल स्वरुप जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है क्योंकि मूर्ति निर्माण में उपयोग किए जाने वाले अप्राकृतिक रंगों में विषैले रसायन होते हैं। साथ ही प्रतिमाओं के साथ फूल, वस्त्र एवं सजावटी सामान जैसे रंगीन कागज, एवं प्लास्टिक आदि भी विसर्जित होता है।

नदी तालाबों में न करें विसर्जन :

पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी संजीव कुमार मेहरा ने सभी गणमान्य नागरिकों से अनुरोध है कि, जल की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़े, इसलिए जल प्रदाय वाले स्रोतों पर मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाए, प्रतिमाओं के विसर्जन हेतु आवश्यकता अनुसार जल स्रोत नदी या तालाब निश्चित किए गए स्थानों पर ही विसर्जन करें। जिससे अन्य नदियों तालाबों को प्रदूषण से बचाया जा सके। प्रतिमाओं के साथ लाए गए उनके वस्त्र, पूजन सामग्री, प्लास्टिक का सामान, पॉलीथिन, बैग्स एवं अनावश्यक सामग्री को तालाब नदियों में नहीं डाला जाए।

ठोस अपशिष्ट न जलाएं :

विसर्जन के पूर्व इस प्रकार की सामग्रियों को प्रतिमाओं से हटा लिया जाए। प्रतिमा विसर्जन हेतु निर्मित स्थाई तालाब में मूर्ति विसर्जन कराया जाए। ऐसे स्थलों के उपरांत बचे हुए अवशेषों को किनारे पर लाकर, मिट्टी इत्यादि को लैंडफिल में डाला जाता है, तथा लकड़ी व बांस को पुनः उपयोग किया जाए। मूर्ति विसर्जन के बाद 24 घंटे के अंदर जल स्रोतों में विसर्जित फूल, वस्त्र एवं सजावटी सामान जैसे रंगीन कागज एवं प्लास्टिक वस्तुओं को निकाल लिया जाए, जिससे जल जीवन पर मूर्ति विसर्जन का न्यूनतम विपरीत प्रभाव पड़े। मूर्ति विसर्जन स्थलों के पास ठोस अपशिष्ट को नहीं जलाया जाए।