गैसपीड़ित संगठनों का मंत्री को पत्र
गैसपीड़ित संगठनों का मंत्री को पत्रसांकेतिक चित्र

गैसपीड़ित संगठनों का मंत्री को पत्र : गैसपीड़ितों पर लादी गई आयुष्मान व्यवस्था रद्द करें

भोपाल, मध्यप्रदेश : पत्र में संगठनों ने आयुष्मान योजना से गैसपीड़ितों को ना जोड़कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इलाज मुहैया कराने की मांग उठाई है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। आयुष्मान कार्ड के चक्कर में इलाज के लिए लगातार परेशान हो रहे गैसपीड़ित मरीजों के मामले को लेकर शनिवार को राजधानी के 5 गैसपीड़ित संगठनों ने गैस राहत मंत्री विश्वास सारंग को पत्र लिखा है। इस पत्र में संगठनों ने आयुष्मान योजना से गैसपीड़ितों को ना जोड़कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इलाज मुहैया कराने की मांग उठाई है।पत्र में संगठनों ने गैस पीड़ितों को मुफ्त इलाज में आ रही भारी समस्याओं से अवगत कराया है। पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज पाने के अधिकार को संविधान प्रदत्त जीने के अधिकार के समतुल्य माना है और यही वजह है कि रिट याचिका 50/98 में 9 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेशित किया कि गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को मुफ्त और सही इलाज देने की जिम्मेदारी केंद्र एवं राज्य सरकार की है। इस आदेश में गैस राहत विभाग द्वारा संचालित अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भर्ती, दवा गुणवत्ता में सुधार, गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य सम्बन्धी आंकड़ों के कम्प्यूटरीकरण करने के लिए भी निर्देश दिया गया था। लेकिन जनवरी 2022 से मध्य प्रदेश सरकार की गैस राहत विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के गैस पीड़ितों को मुफ्त और सही इलाज मुहैया कराने के आदेश का निरंतर उल्लंघन किया जा रहा है। सभी गैस पीड़ितों को मजबूर किया जा रहा है कि वह आयुष्मान कार्ड बनवाने और आयुष्मान कार्ड के बगैर उनका इलाज नहीं हो पाएगा। इसी क्रम में 28 जनवरी 2022 को गैस राहत विभाग के उप सचिव द्वारा संचालक गैस राहत को पत्र लिखकर यह बताया गया की सभी गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों के आयुष्मान कार्ड बनवाए जाएं, ताकि गैस पीड़ितों का इलाज आयुष्मान योजना से किया जा सके।

कैंसर पीड़ित मरीजों को भारी समस्या :

पत्र में कहा गया है कि विभाग के आयुष्मान कार्ड के अनिवार्य नियम की वजह से कैंसर ग्रस्त गैस पीड़ितों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है जिससे ना तो उनका इलाज समय पर हो पा रहा है और ना ही मुफ्त हो पा रहा है। यह अत्यन्त दु:ख की बात है कि कई कैंसर ग्रस्त गैस पीड़ित समय पर आयुष्मान कार्ड नहीं बना पाने की वजह से इलाज के अभाव में ही खत्म हो गए। ये भी गौरतलब है की जिन गैस पीड़ितों ने आयुष्मान कार्ड बनवा कर इलाज करवाया तो उनको अपने पैसे लगाने पड़े क्योंकि आयुष्मान में कैंसर इलाज में होने वाले पूर्ण खर्च का पैसा पारित नहीं होता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मिले पूरा इलाज :

इस पत्र में लिखा गया है कि जल्द से जल्द गैस पीड़ितों पर लादी गई अव्यवाहारिक आयुष्मान नीति को तुरंत रद्द करें और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी गैस पीड़ितों को सही और मुफ्त इलाज प्रदान करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। यह पत्र भोपाल गैस पीड़ित स्टेशनरी कर्मचारी संघ,भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा,भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा एंव भोपाल गु्रप फॉर इन्फर्मेंशन एंड एक्शन ने संयुक्त रूप से लिखा है।

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