भोपाल : बजट में पेट्रोल, डीजल सस्ता करो सरकार
बजट में पेट्रोल, डीजल सस्ता करो सरकारSyed Dabeer Hussain - RE

भोपाल : बजट में पेट्रोल, डीजल सस्ता करो सरकार

भोपाल, मध्य प्रदेश : प्रदेश सरकार से उम्मीद है कि बजट में उनकी मांगों पर गौर किया जाएगा, जिससे कोरोना काल में संघर्ष कर रहे छोटे उद्योगों को नई ऊर्जा तथा गति मिलेगी।

भोपाल, मध्य प्रदेश। 28 फरवरी को प्रदेश सरकार द्वारा बजट पेश होगा। केन्द्रीय बजट के बाद उद्योग जगत को अब प्रदेश सरकार से उम्मीद है कि बजट में उनकी मांगों पर गौर किया जाएगा, जिससे कोरोना काल में संघर्ष कर रहे छोटे उद्योगों को नई ऊर्जा तथा गति मिलेगी। अर्थ जगत के विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई की सर्वहारा वर्ग का ख्याल रखने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान निश्चित रूप से पेट्रोल, डीजल सहित अन्य मुद्दों पर उद्योग जगत के साथ आम जनता को राहत देंगे। ज्यादातर औद्योगिक संगठनों ने एक सुर में पेट्रोल-डीजल पर ना केवल वैट घटाने की मांग की, बल्कि यह भी बताया कि वैट घटने से सरकार को होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई बिक्री बढ़ाकर की जा सकती है। एफएमपीसीसीआई ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए फंड देने और समय पर सब्सिडी देने का आग्रह किया तो रियल्टी सेक्टर ने स्टॉम्प ड्यूटी में छूट देकर मांग बढ़ाने का सुझाव दिया। गौरतलब है कि प्रदेश में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपए प्रति लीटर तक जा पहुंची हैं। इससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ है। जिसके चलते कारोबारी लागत बढ़ी है। कारोबारी संगठनों का कहना कि ट्रांसपोर्टेशन लगात बढऩे का बोझ आम जनता पर पड़ेगा। सरकार यदि पेट्रोल, डीजल सस्ता करती है तो एक साथ सभी वर्ग लाभान्वित होंगे। उल्लेखनीय है कि देशभर में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल प्रदेश में बिक रहा है, क्योंकि प्रदेश सरकार पेट्रोल डीजल पर अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक टैक्स वसूलती है। आइए जानते हैं औद्योगिक संगठन प्रदेश सरकार के बजट से क्या-क्या आस लगाए हैं।

प्रति लीटर पर वैट वसूले सरकार :

सरकार को चाहिए कि इस बजट में पेट्रोल डीजल पर प्रतिशत की जगह प्रति लीटर पर टैक्स फिक्स करे। इससे जनता पर बोझ घटेगा। उदाहरण के लिए पेट्रोल के रेट प्रति लीटर 80 रुपए हैं। इस पर सरकार यदि 20 रुपए टैक्स वसूलती है तो यह एक बार फिक्स हो जाएगा। फीसदी में टैक्स वसूलने के चलते अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश में जनता पर अधिक बोझ पड़ता है। जैसे यदि पेट्रोल के रेट केन्द्र से एक रुपए बढ़ता है, तो वह प्रदेशवासियों के लिए 1.05 रुपए बढ़ जाता है। इस तरह हर बार जब भी पेट्रोल की कीमत बढ़ती है, प्रदेशवासियों पर अधिक मार पड़ती है और प्रदेश सरकार को हर बाद अधिक फायदा होता है। इसके अलावा टैक्सेशन का एक बड़ा पार्ट स्टाम्प ड्यूटी से आता है। सरकार ने कोरोनाकाल में स्टाम्प ड्यूटी में 2 फीसदी की छूट दी थी, इसे जारी रखना चाहिए। उद्योग जगत को कोरोना काल से उबारने के लिए विभिन्न मदों में छूट की घोषणा करनी चाहिए। मेरी माने तो सरकार को कर्ज पर निर्भरता खत्म करनी चाहिए। बजट से सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी संपत्ति से आय प्राप्ति के स्थायी स्रोत बनाने चाहिए। साथ ही ऐसे उपाय करने चाहिए कि भष्ट्राचार, बिचौलिये खत्म हो और खर्च के मद में गुणवत्ता आए।

राजेश जैन, वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट

स्टाम्प ड्यूटी में छूट व सीमेंट, सरिया के दाम नियंत्रित करे सरकार :

इस बजट में सरकार से रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने के लिए स्टाप ड्यूटी में छूट और कलेक्टर गाइड लाइन में कमी की उम्मीद है। कोरोनाकाल में रियल एस्टेट की बिक्री प्रभावित हुई है। फिलहाल स्टाम्प ड्यूटी 12.5 फीसदी है, वहीं जीएसटी 18 फीसदी है। इस तरह रियल एस्टेट में सबसे अधिक टैक्स है। रियल्टी में मांग बढ़ाने के लिए सरकार को स्टाम्प ड्यूटी में कम से कम चार फीसदी की कमी करनी चाहिए। साथ ही सीमेंट, सरिया की कीमतों में जारी बेतहाशा बढ़ोतरी को सरकारी नीतियों की मदद से नियंत्रित करना चाहिए। इससे लागत घटेगी और मकान सस्ते होने के कारण ग्राहकों की खरीदी क्षमता बढ़ेगी।

मनोज सिंह मीक, प्रदेश प्रवक्ता, क्रेडाई

पेट्रोल, डीजल कीमतें घटने से ट्रांसपोर्टेशन होगा सस्ता :

प्रदेश के बजट से रियल्टी सेक्टर को काफी उम्मीद हैं। सरकार को चाहिए कि रेत सप्लाई पर एक निश्चित नियम बनाए, जिससे आसानी से रियल्टी सेक्टर को रेत उपलब्ध हो सके। साथ ही इस बजट में सरकार को रेत, गिट्टी पर रायल्टी घटानी चाहिए। इससे लागत घटेगी और फायदा आम जनता को मिलेगा। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल पर प्रदेश सरकार देशभर में सबसे अधिक वैट वसूल रही है, जिसके चलते ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने टैक्स लगाकर जमकर राजस्व कमाया, अब जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, तो सरकार का फर्ज बनता है कि टैक्स घटाकर आम जनता सहित उद्योग जगत को राहत दे। डीजल पेट्रोल का रेट घटने से सीमेंट, सरिया, रेत, गिट्टी, ईंट का ट्रॉसपोर्टेशन सस्ता होगा और इसका फायदा आम जनता को मिलेगा।

वासिक हुसैन, अध्यक्ष क्रेडाई

पेट्रोल-डीजल पर ऊंचे टैक्स की जगह बिक्री बढ़ाकर राजस्व जुटाए सरकार :

इस बजट में सरकार को पेट्रोल-डीजल पर ऊंचे टैक्स से राजस्व जुटाने की जगह, बिक्री बढ़ाने पर जोर देना चाहिए, क्योंकि सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीजल सस्ता है, जिसके चलते सीमावर्ती क्षेत्रों के अधिकांश लोग प्रदेश से तेल खरीद न कर दूसरे राज्यों से कर हैं। इससे बिक्री प्रभावित होती है। यदि सरकार सीमावर्ती राज्यों के समतुल्य डीजल, पेट्रोल की कीमतें कर देती है तो खपत के साथ-साथ बिक्री बढ़ेगी, जिससे प्रदेश की जनता को राहत भी मिलेगी और बिक्री बढऩे से सरकार को राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा। साथ ही कोरोना काल में सरकार ने 15 फरवरी तक मंडी शुल्क 50 पैसे कर दिया था। इस व्यवस्था को प्रदेश भर में 15 फरवरी के बाद भी जारी रखना चाहिए। साथ ही प्रोफेशनल टैक्स को पूरी तरह से खत्म करना चाहिए। साथ ही डिजिटल लेनदेन में लगने वाला एक फीसदी टैक्स जो बैंक व्यापारियों से वसूलते हैं। उसमें व्यापारियों को छूट मिलनी चाहिए।

भूपेन्द्र जैन, अध्यक्ष कंफडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, कैट

वैट घटाकर सबको राहत दे सरकार :

बजट में फूड सेफ्टी एक्ट को लेकर रियायतें मिलनी चाहिए, क्योंकि मिलावट के नाम पर सरकारी अधिकारी व्यापारियों को बिना वजह परेशान करते हैं। पेट्रोल, डीजल में वसूला जा रहा भारीभरकम वैट घटाना चाहिए, क्योंकि इससे हर कोई प्रभावित हो रहा है। ट्रांसपोर्टेशन सस्ता होने से महंगाई पर भी लगाम लग सकेगी। बजट में कारपोरेट जगत का अधिक ध्यान रखा जाता है और छोटे व्यापारियों को दरकिनार किया जाता है, लेकिन पेट्रोल, डीजल पर वैट घटाकर सरकार सबको राहत दे सकती है। कोरोना काल में व्यापारियों को राहत देने के लिए प्रोफेशनल टैक्स पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए।

ललित जैन, अध्यक्ष, भोपाल चेंबर ऑफ कामर्स

उद्योग संवर्धन के लिए प्रावधान बढ़ाया जाए :

उद्योग संवर्धन के लिए बजट का प्रावधान बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही सरकार यह सुनिश्चित करे कि उद्योगों को समय पर सब्सिडी मिले, क्योंकि कोरोना काल में यदि समय पर सब्सिडी नहीं मिलती तो उद्योग के समक्ष समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। साथ ही बजट में छोटे जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर व डेवलपमेंट में खर्च बढ़ाने पर जोर देना चाहिए, क्योंकि छोटे जिलों में बेरोजगारी अधिक है, सरकार को वहां ध्यान देने की जरूरत है।

डॉ. राधाशरण गोस्वामी, प्रेसीडेंट, एफएमपीसीसीआई

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