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अवैध उत्खनन कलेक्टर-कमिश्नर नहीं कर रहे कार्यवाही
अवैध उत्खनन कलेक्टर-कमिश्नर नहीं कर रहे कार्यवाही |Social Media
मध्य प्रदेश

शहडोलः अवैध उत्खनन कलेक्टर-कमिश्नर नहीं कर रहे कार्यवाही

शहडोल, मध्यप्रदेशः सोशल मीडिया पर सोन घड़ियाल अभ्यारण अवैध उत्खनन का वीडियो हो रहा ट्रेंड, लेकिन इस संबंध में शिकायतों के बाद भी कमिश्नर और कलेक्टर कार्यवाही को तैयार नहीं हैं।

Afsar Khan

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में सोन घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र में अवैध उत्खनन का मामला प्रकाश में आया है, जिस संबंध में एनजीटी ने सख्ती दिखाते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब करने के साथ ही सभी कलेक्टरों से प्रदेश शासन के माध्यम से रिपोर्ट मांगी थी और माना था कि सोन नदी में रोजाना 1 हजार ट्रक रेत का अवैध उत्खनन कर परिवहन होता है, जिससे 1 करोड़ 20 लाख रूपये की चोरी हो रही है।

शिकायतों के बाद भी कमिश्नर और कलेक्टर कार्यवाही को नहीं है तैयार
शिकायतों के बाद भी कमिश्नर और कलेक्टर कार्यवाही को नहीं है तैयार
Afsar Khan

शिकायतों के बाद भी कमिश्नर और कलेक्टर कार्यवाही को नहीं हैं तैयार:

सुनवाई के दौरान मुख्य पीठ ने अवैध उत्खनन और परिवहन में शामिल वाहनों पर एक्स-शो रूम प्राइज की आधी कीमत लिए बगैर वाहनों को न छोड़ने के आदेश जारी किये थे, लेकिन जिले में इसका असर होता दिखाई नहीं दे रहा है।

संरक्षित क्षेत्र को बचाने के लिए युवाओं ने अब वीडियों को ट्रेंड करते हुए शेयर के माध्यम से सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। उसमें उल्लेखित है कि, शिकायतों के बाद भी कमिश्नर और कलेक्टर कार्यवाही को तैयार नहीं हैं।

यह हो रहा सोशल मीडिया में ट्रेंड:

सोशल मीडिया में वॉयरल हो रहे संदेश में सतीश पाण्डेय ने लिखा है कि यह वीडियो शहडोल जिले के ब्यौहारी तहसील के बुड़वा गांव के सतनी और पन्ना घाट से सोन घड़ियाल प्रतिबंधित क्षेत्र का है, जहां से हर रोज हजारों ट्रैक्टर रेत निकालकर स्टोर की जाती है, फिर हर रात 80 से 100 हाइवा से रीवा जाती है, पुलिस-प्रशासन आंखे बंद करके बैठे हैं, रोड के हालात यह हैं कि पैदल तक चला नहीं जा सकता है, इस रोड से बच्चे हर रोज स्कूल जाते हैं, अगर कोई किसी भी प्रकार की घटना होती है तो जवाबदार कौन होगा? फेसबुक के माध्यम से कलेक्टर और कमिश्नर को इसकी जानकारी दी, पर कभी कोई कार्यवाही नहीं हुई।

नहीं रूका अवैध कारोबार

अभ्यारण में घड़ियाल भले ही अस्तित्व की लड़ाई से जूझ रहे हैं, इसके अलावा अन्य जलीय जीव-जन्तु का भी अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है, लेकिन रेत तस्कर पुलिस और प्रशासन की शह पर प्रतिबंधित क्षेत्र में न सिर्फ अवैध उत्खनन करा रहे हैं, बल्कि रोजाना 100 से अधिक वाहन भी रीवा सहित उत्तरप्रदेश भेजने का काम कर रहे हैं। संरक्षित क्षेत्र से रेत के अवैध उत्खनन को रोकने के नाम पर महज कोरम पूर्ति ही की जा रही है।

नये नियम लगाकर छूट गया हाईवाः

लगातार सोन घड़ियाल अभ्यारण से बीते माह रेत के अवैध उत्खनन का मामला मीडिया में सामने आने के बाद एसडीएम ब्यौहारी पी.के. पाण्डेय ने प्रतिबंधित क्षेत्र से रेत निकलने वाले रास्तों पर जेसीबी से गड्ढा खुदवा दिया था, उसके कुछ ही दिनों बाद सोन घड़ियाल अभ्यारण के बुड़वा से अवैध रेत लोड कर रीवा ले जाते समय तीन हाइवा वाहनों को पकड़ा था, जिनमें वाहन क्रमांक एमपी 18 एच 4957, एमपी 18 जीए 3179 और एमपी 18 एच 5220 शामिल थे, जिन्हें देवलोंद थाना में खड़ा कराया गया था, 30 अगस्त को रेत नियम 2019 लागू किया गया, वाहन क्रमांक एमपी 18 जीए 3179 का प्रकरण खनिज विभाग पहुंचा, जहां से कलेक्टर के द्वारा नये नियमों के तहत 2 लाख रूपये का जुर्माना लगाया था।

कौन भरेगा 50 प्रतिशत जुर्मानाः

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की दिल्ली स्थित मुख्य पीठ ने प्रकरण क्रमांक 606/2018 में फैसला सुनाया था कि सोन नदी से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन करते हुए पकड़े गये वाहनों को वाहन की एक्स-शो रूम प्राइज का 50 प्रतिशत जुर्माना लिए बगैर न छोड़ा जाये, आदेश के परिपालन में खनिज संसाधन विभाग के संचालक के द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों को आदेश के पालन करने के लिए आदेशित भी किया गया था। इसके बाद भी मामले लगातार बढ़ रहे हैं।सवाल यह खड़ा होता है कि उक्त वाहन के 50 प्रतिशत जुर्माने की राशि जो कि एनजीटी के द्वारा पारित की गई है, उसे कौन भरेगा?