2 महीने बीते, दस्तावेजों में उलझी जांच कमेटी
2 महीने बीते, दस्तावेजों में उलझी जांच कमेटीSocial Media

Gwalior : 2 महीने बीते, दस्तावेजों में उलझी जांच कमेटी, लगने लगे आरोप

मामला आउट सोर्स घोटाले की जांच का। 22 सिंतबर को एमआईसी के आदेश पर गठित हुई थी कमेटी। 28 सिंतबर को हुई बैठक में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने दिया था 15 दिन का समय। 50 करोड़ से अधिक के घपले का लगा है आरोप।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। नगर निगम में हुए आउट सोर्स कर्मचारी भर्ती घोटाले की जांच के लिए 7 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन 22 सिंतबर को एमआईसी के आदेश पर किया गया। कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक अधिकारी मामले से संबंधी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं करा सके हैं। हर बैठक में कमेटी 15 दिन का समय दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए दे रही है इसके बावजूद दस्तावेज नहीं मिल सके हैं। कमेटी द्वारा दी जा रही रियायत को लेकर अब आरोप लग रहे हैं। जब दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं होंगे तो कमेटी जांच कैसे करेगी। इसी तरह चलता रहा तो जांच करने में ही एक साल बीत जाएगा। कमेटी की अगली बैठक कब तक होगी यह भी किसी को पता नहीं है। यही वजह है कि आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

आउट सोर्स भर्ती घोटाले में 50 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा होने की शिकायत स्वंय सेवक अधिकारी कर्मचारी संघ द्वारा की गई है। इससे पहले संघ ने निगम कर्मचारियों के पीएफ घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा था। इस पत्र को आधार बनाते हुए भी जांच की गई थी। लेकिन जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था। स्वंय सेवक अधिकारी कर्मचारी संघ द्वारा इस मामले में जनहित याचिका दायर करने की बात भी की जा रही थी। इसी बीच मेयर इन काउंसिल द्वारा भी आउट सोर्स मामले को संज्ञान में लेते हुए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन 22 सिंतबर 2022 को किया गया। इस समिति में दो अपर आयुक्त सहित महापौर, दो एमआईसी सदस्य, विधि अधिकारी अनूप लिटोरिया एवं पूर्व लेखा अधिकारी को शामिल किया गया था। समिति द्वारा 28 सिंतबर 2022 को बैठक बुलाई गई जिसमें दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता को 15 दिन का समय दिया गया। इसके बाद दोबारा बैठक हुई जिसमें दस्तावेज उपलब्ध न होने पर फिर 15 दिन का समय दे दिया गया। दीपावली से पहले आयोजित हुई इस बैठक को हुए भी 25 दिन से अधिक समय हो गया है। लेकिन अब तक न तो बैठक हुई न ही दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सके है। समिति ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन भी नहीं लिया है, जिससे कई तरह की चर्चाएं निगम में चल निकली है।

रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने पर करें कार्यवाही :

नगर निगम विशेषज्ञों की माने तो इस तरह की जांच के लिए सख्ती होना आवश्यक है। एमआईसी द्वारा गठित कमेटी अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए 48 घंटे में सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहें। अगर अधिकारी दी गई समयावधि में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लें। ऐसा नहीं करने से समिति के ऊपर आरोप लगना तय है।

90 कर्मचारी हटाए, दो को किया निलंबित :

आउट सोर्स फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद निगमायुक्त किशोर कन्याल ने सहायक यंत्री विष्णु पाल एवं कर्मचारी विशाल जाटव को निलंबित कर दिया था। साथ ही 90 से अधिक कर्मचारियों को काम से हटाते हुए कई अधिकारियों के विभाग भी बदल दिए थे। लेकिन इस मामले में लिप्त सिक्योरिटी एजेंसियों के ऊपर शिंकजा नहीं कसा गया। इसी बीच एमआईसी द्वारा जांच कमेटी का गठन कर दिया गया, जिसके चलते निगमायुक्त स्तर की जांच पूरी नहीं हो सकी। देखना यह है कि निगम अधिकारी कब तक जांच कमेटी को पूरे दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं।

जांच कमेटी में यह थे शामिल :

  • डॉ. शोभा सतीश सिकरवार, महापौर, अध्यक्ष

  • अवधेश कौरव, एमआईसी सदस्य (सदस्य)

  • नाथूराम ठेकेदार, एमआईसी सदस्य (सदस्य)

  • मुकुल गुप्ता, अपर आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग (सदस्य)

  • रजनी शुक्ला, अपर आयुक्त वित्त एवं लेखा अधिकारी (सदस्य)

  • अनूप लिटोरिया, विधि अधिकारी नगर निगम (सदस्य)

  • दिनेश बाथम, पूर्व लेखा अधिकारी, नगर निगम (सदस्य)

इनका कहना है :

आउट सोर्स फर्जीवाड़े की जांच के लिए हमने अपर आयुक्त से दस्तावेज मांगे हैं। दस्तावेज मांगने के लिए दिया गया समय पूरा हो चुका है। अगली बैठक में अगर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो हम संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की अनुशंसा करेंगे।

डॉ. शोभा सतीश सिकरवार, महापौर

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