Gwalior : 300 करोड़ में 80 एमएलडी और 400 करोड़ में मिलता 150 एमएलडी पानी
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Gwalior : 300 करोड़ में 80 एमएलडी और 400 करोड़ में मिलता 150 एमएलडी पानी

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : चंबल नदी से ग्वालियर को पानी मिलने का प्लान स्वीकृत हो गया है। प्रदेश सरकार ने मुरैना एवं ग्वालियर को चंबल से पानी देने के लिए 214 करोड़ का टेण्डर स्वीकृत कर दिया है।

हाइलाइट्स :

  • मामला, चंबल नदी से ग्वालियर को पानी मिलने का

  • राजनीतिक उठापटक के चलते बदला गया स्वीकृत किया गया प्लान

  • पहले 400 करोड़ की लागत से 150 एमएलडी पानी लेने का प्लान किया गया था स्वीकृत

  • 2050 की आबादी को देखते हुए बनाई थी योजना

  • 80 एमएलडी पानी से 2033 तक की आबादी को ही पर्याप्त होगा पानी

  • 22 लाख की आबादी के लिए प्रतिदिन चाहिए 300 एमएलडी पानी

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। चंबल नदी से ग्वालियर को पानी मिलने का प्लान स्वीकृत हो गया है। प्रदेश सरकार ने मुरैना एवं ग्वालियर को चंबल से पानी देने के लिए 214 करोड़ का टेण्डर स्वीकृत कर दिया है। यह राशि मुरैना में किए जाने वाले कार्य के लिए स्वीकृत की गई है। इसके बाद ग्वालियर तक पाईप लाईन डालने के लिए अलग से पैसा स्वीकृत होगा। अधिकारियों के अनुसार 47 किलोमीटर लंबी लाईन डालने के लिए लगभग 300 करोड़ रूपय खर्च होंगे। इस राशि से प्रतिदिन 80 एमएलडी पानी मिल सकेगा। सवाल यह है कि पहले बनाए गए प्रस्ताव में 400 करोड़ रुपय खर्च होने थे जिससे प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी ग्वालियर को मिलता। यह प्रस्ताव शासन ने स्वीकृत भी कर दिया था। लेकिन अचानक प्रस्ताव में बदलाव क्यों किया गया इसका जबाव किसी के पास नहीं है।

दरअसल चंबल नदी से ग्वालियर को पानी मिलने के प्रस्ताव को नगर निगम द्वारा 2016-17 में तैयार कर लिया गया था। इसके बाद फिर संशोधन हुआ और पीएचई अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य ने 400 करोड़ में 150 एमएलडी पानी ग्वालियर को देने संबंधी प्रोजेक्ट तैयार किया। इसमें पानी को कोतवाल बांध में स्टोर करके रखा जाता और वहां से आवश्यकता के अनुसार पानी ग्वालियर को मिलता रहता। यह प्रस्ताव शासन ने स्वीकृत भी कर दिया था। इसमें बताया गया कि 150 एमएलडी पानी अगर चंबल से मिलता है तो 2050 तक की आबादी को पानी दिया जा सकेगा। लेकिन प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद भोपाल में चली बैठकों में कई तरह के सवाल खड़े हुए और प्रस्ताव को बदलकर कर 80 एमएलडी कर दिया गया। इस योजना में भी लगभग 300 करोड़ रुपय खर्च होंगे और यह पानी 2033 तक की आबादी के लिए ही पर्याप्त होगा। इसके बाद फिर से पानी के लिए नई योजना बनानी पड़ेगी। जब 400 करोड़ में 2050 तक के लिए पानी मिल रहा था फिर प्रस्ताव को बदला क्यों गया।

220 एमएलडी पानी तिघरा से लिया जायगा :

शहर की वर्तमान आबादी को पानी पिलाने के लिए तिघरा से प्रतिदिन 180 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। इस पानी को 2033 में बढ़ाकर 220 एमएलडी कर दिया जायगा। साथ ही चंबल से प्रतिदिन 80 एमएलडी पानी लिया जायगा। इसे मिलाकर कुल 300 एमएलडी पानी नगर निगम फिल्टर करके शहर में सप्लाई करेगा। यह पानी 22 से 23 लाख की आबादी के लिए पर्याप्त होगा।

1600 एमएम की नई लाईन से भी आयगा पानी :

तिघरा वाटर फिल्टर प्लांट से 1400 एमएम की पुरानी लाईन से मोतीझील फिल्टर प्लांट तक पानी पहुंचाया जा रहा है। जबकि जलालपुर पर बनाए गए 160 एमएलडी के नए वाटर फिल्टर प्लांट तक पानी पहुंचाने के लिए 1600 एमएम की नई लाईन डाली जा रही है। इन दोनों लाईनों से तिघरा बांध से पर्याप्त पानी फिल्टर प्लांटों तक पहुंच सकेगा। वर्तमान में तीन फिल्टर प्लांट 175 एमएमलडी पानी फिल्टर कर रहे हैं और नया प्लांट चालू होने के बाद कुल 335 एमएमडी पानी फिल्टर हो सकेगा।

मुरैना और ग्वालियर के लिए इस तरह बना है प्लान :

  • चम्बल नदी से 140 एमएलडी पानी लिया जाएगा।

  • मुरैना के लिए 214 करोड़ रुपय का टेण्डर स्वीकृत किया गया है।

  • 140 एमएलडी में से 60 एमएलडी मुरैना को और 80 एमएमलडी पानी ग्वालियर को मिलेगा।

  • पानी लेने के लिए चंबल नदी पर 43 मीटर ऊचांई तथा 12 मीटर व्यास का इन्टेकवेल बनेगा।

  • 18 किमी आरडब्ल्यूआरएम (1500 मिलीमीटी व्यास) मुरैना नगर के लिए 64 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा।

  • 35 किमी सीडब्ल्यूआरएम (100-600 मिली मीटर व्यास), कुल 19000 किलो लीटर क्षमता के 12 ओवरहेड टैंक एवं लगभग 507 किमी जल वितरण तंत्र, पाइप लाईन विछाई जाएगी।

  • ग्वालियर नगर के लिए 80 एमएलडी पानी हेतु मुरैना नगर के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक आरडब्ल्यूआरएम में प्रावधनित है।

  • वाटर ट्रींटमेंट प्लांट परिसर में एक सम्प के लिए स्थान का प्रावधान किया जाएगा। इसके बाद मुरैना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पाइप लाइन का कार्य ग्वालियर नगर निगम द्वारा किया जाएगा।

इनका कहना है :

चंबल से पानी लेने वाले प्रोजेक्ट में जितना पानी हमें मिल सकता था उसी हिसाब से प्रस्ताव तैयार किया गया है। भविष्य में अगर 'यादा पानी की आवश्यकता होगी तो उस पर भी विचार किया जायेगा।

निकुंज श्रीवास्तव, आयुक्त, नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र

मैंने इस प्रोजेक्ट को पहले तैयार किया था। इसमें 400 करोड़ की लागत थी और 150 एमएलडी पानी मिलना था। यह प्रस्ताव स्वीकृत भी हो गया था। बाद में इसमें संसोधन कर दिया गया। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट को मैं नहीं देख रहा। पूर्व निगमायुक्त संदीप माकिन को भी मैंने पत्र लिखा था। अब आगे इस प्रोजेक्ट को कौन देखेगा यह मुझे नहीं पता।

आरएलएस मौर्य, अधीक्षण यंत्री, पीएचई, नगर निगम

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