ग्वालियर : प्रशासन के दावे खोखले, इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे मरीज

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : प्राईवेट अस्पतालों ने भर्ती करने से किया इंकार, अपर परिवहन आयुक्त के सेवानिवृत निज सहायक ने तोड़ा दम।
ग्वालियर : प्रशासन के दावे खोखले, इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे मरीज
प्रशासन के दावे खोखले, इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे मरीजSyed Dabeer-RE

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन द्वारा किए जा रहे वादे खोखले साबित हो रहे हैं। इलाज के अभाव में मरीज दम तोड़ रहे हैं, लेकिन यह किसी को दिखाई नहीं दे रहा। ऐसा ही एक ममला सामने आया कि अपर परिवहन आयुक्त के सेवानृवित निज सहायक की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। इस पर परिजन प्रशासन द्वारा कोविड-19 के उपचार के लिए चिन्हित किए अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन उन्होंने मरीज का उपचार करने से इंकार कर दिया। अंत में परिजनों ने उन्हें जेएएच स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां उपचार में देरी के कारण शनिवार की शाम को उन्होंने दम तोड़ दिया।

कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह स्वास्थ व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के मामले में फेल साबित होते दिख रहे हैं, उन्होंने कोविड-19 के उपचार के लिए जिन अस्पतालों को चिन्हित किया है। वह मरीजों को उपचार नहीं दे रहे हैं। इससे आए दिन मरीज दम तोड़ रहे हैं। इलाज के अभाव में मरीज के दम तोड़ने का यह पहला मामला नहीं है। 15 सितम्बर को भी एक प्रोफेसर की इलाज के अभाव में फूलबाग स्थित अपोलो हॉस्पिटल के बाहर मौत हुई थी। इस पर परिजनों ने काफी आक्रोश जताया था, प्रशासन और पुलिस विभाग के अमले ने परिजनों को आश्वसन दिया था कि इस प्रकार की घटना की पुर्नवृति नहीं होगी। चार दिन बीते ही हैं कि एक नया घटनाक्रम सामने आया है कि अपर परिवहन आयुक्त के सेवानिवृत निज सहायक नीलकंठ खर्चे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जैसा कि परिजनों ने बताया कि प्रशासन द्वारा कोविड-19 के उपचार के लिए चिन्हित किए अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन उन्होंने उपचार करने से इंकार कर दिया। काफी मशक्कत करने के बाद भी जब उन्हें प्राईवेट हॉस्पिटल मेें भर्ती नहीं किया गया, तो अंत में उन्हें सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

कार्रवाई के नाम पर मौन :

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.व्हीके गुप्ता की कार्य प्रणाली को देखकर ऐसा लगता है मानों कि शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। प्राईवेट हॉस्पिटल संचालक मरीजों को इलाज नहीं कर रहे, वहीं इनके रा'य में झोलाछाप डॉक्टर खूब फल-फूल रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमणकाल में भी झोलाछाप डॉक्टर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। उसके बावजूद भी सीएमएचओ इन पर कार्रवाई नहीं कर रहे।

ये सवाल मांग रहे जबाव :

Q

प्राईवेट हॉस्पिटल आखिर क्यों भर्ती नहीं कर रहे मरीज ?

Q

मरीज भर्ती न करने वालों पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई ?

Q

प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग क्यों बना है मूक दर्शक ?

Q

आखिर इलाज के अभाव में कब तक दम तोड़ेंगे मरीज ?

Q

क्या अब जागेगा प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ?

इनका कहना है :

प्राईवेट हॉस्पिटलों के पास आईसीयू में सीमित बेड़ हैं और कोरोना संक्रमण के मरीजों की ऑक्सीजन खपत भी अधिक है। साथ ही उनके बेड़ भी फुल हैं, इसलिए वह भर्ती करने से इंकार कर देते हैं, लेकिन हम एमपीसीटी और आईटीएम कॉलेज में 170 बेड़ की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे मरीजों को आसानी से उपचार मिल सके।

डॉ. व्हीके गुप्ता, सीएमएचओ

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