Gwalior : बगावत का अंदेशा, इसलिए अटकाई जा रही पार्षदों की सूची
दोनों ही पार्टियों ने नहीं जारी की पार्षद उम्मीदवारों की सूचीसांकेतिक चित्र

Gwalior : बगावत का अंदेशा, इसलिए अटकाई जा रही पार्षदों की सूची

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : 18 जून है नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख, इसलिए ऐन वक्त तक होगा इंतजार। 17 जून को नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सिंधिया के आने पर जारी हो सकती है सूची।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। ग्वालियर में भाजपा द्वारा महापौर पद के उम्मीदवारों की घोषणा तो कर दी गई है लेकिन पार्षदों की सूची पर अब तक मंथन चल रहा है। कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि संभाग एवं जिला प्रभारियों की बैठक के बाद 16 जून को सूची जारी हो जाएगी। दिन भर सभी इंतजार करते रहे और देर रात पार्टी कार्यालय से घूमते हुए अपने-अपने घर चले गए। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो भाजपा नेता यह बात जान रहे हैं कि सूची घोषित होते ही बड़े स्तर पर हंगामा होगा और बगावत होना भी तय है। यही वजह है कि सूची को नामंकन की अंतिम तारीख से पहले जारी किया जाए, ताकि बगावत करने वालों को नामांकन जमा करने के लिए समय न मिले। यही स्थिति कांग्रेस की भी है।

नगरीय निकाय चुनाव के लिए पार्षद पद के उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। इसमें भाजपा एवं कांग्रेस सहित अन्य दलों के उम्मीदवार भी शामिल हैं। 18 जून नामांकन की अंतिम तारीख है और 16 जून तक भाजपा एवं कांग्रेस में से किसी भी दल ने पार्षदों की सूची जारी नहीं की है। दोनों ही दलों के नेता पार्षदों के टिकिट वितरण के लिए सहमति नहीं बना पा रहे हैं। सबसे बड़ी मुश्किल भाजपा नेताओं को हो रही है। भाजपा में पहले से ही उम्मीदवारों की संख्या अधिक थी और कांग्रेसी नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद यह संख्या स्वभाविक रूप से बढ़ गई है। भाजपा नेता 20-20 साल से समर्पित कार्यकर्ताओं को टिकिट दिलाना चाह रहे हैं, जबकि कांग्रेसी भाजपाई अपने समर्थकों के लिए अड़े हुए हैं। यही स्थिति महापौर प्रत्याशी के लिए हो रही थी लेकिन संगठन के आगे किसी की नहीं चली। अब पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए टिकिट वितरण में भी यही स्थिति निर्मित हो रही है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस से आए नेताओं ने अपने समर्थकों को तीन दर्जन से अधिक टिकिट देने के लिए सूची सौंप दी है जिससे हालात बिगड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी ग्वालियर एवं पूर्व विधानसभा के टिकिट फाईनल करने में हो रही है। इन दोनों ही जगहों पर कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं का हस्तक्षेप है जिससे भाजपा के सर्मर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। ऐसा हुआ तो भाजपा का बड़ा वोट बैंक कटना तय है। साथ ही टिकिट घोषित होते ही कई उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामंकन भरेंगे। इससे स्थिति बिगड़ जाएगी। यही वजह है कि भाजपा एवं कांगे्रसी नेता सूची जारी करने में देरी कर रहे हैं।

दूसरे वार्डों से आए उम्मीदवारों का होगा विरोध :

भाजपा नेताओं ने बताया था कि 49 वार्डों में सिंगल नाम है और 17 वार्ड में दो से तीन नामों की सूची है। यह सूची जिन लोगों के पास थी उन्होंने अपने समर्थकों को फोन करके नामंकन भरने की तैयारी की जानकारी दे दी। यह बात अन्य प्रत्याशियों को भी पता चल गई जिसके बाद से सभी ने रोष प्रकट करना शुरू कर दिया। रात में कई जगहों पर बैठकें चली जिसमें तय किया गया कि अगर उम्मीदवार वार्ड से बाहर का होगा तो उसका खुलकर विरोध किया जाएगा। यह स्थिति कई उम्मीदवारों का गणित बिगाड़ सकती है।

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