Gwalior : नेता प्रतिपक्ष के गृह जिले पर टिकी अब भाजपा की नजर
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Gwalior : नेता प्रतिपक्ष के गृह जिले पर टिकी अब भाजपा की नजर

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : बसपा के विधायक को भाजपा ने अपने पाले में किया। अब भाजपा के अंदर भिण्ड विधानसभा में एक साथ दो विरोधी।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। भाजपा जब भी कोई चुनाव आता है तो उसके पहले वह विपक्ष को झटका देने में लग जाती है। नगरीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविन्द सिंह के गृह जिले पर अपनी नजर डाली तो पहली ही बार में बसपा के विधायक संजीव सिंह कुशवाह को अपने पाले में कर एक तरह से यह बताने के संकेत दिए कि अब अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा का टारगेट नेता प्रतिपक्ष को उनकी विधानसभा में घेरना होगा। वैसे इस तरह की घेराबंदी पहले भी भाजपा कर चुकी है, लेकिन उस चक्रव्यूह को तोड़ते हुए डॉ. गोविन्द सिंह विधानसभा में पहुंचते रहे है।

बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह पहले भी भाजपा में थे, लेकिन जब उनको भाजपा से भिण्ड विधानसभा से टिकट नहीं मिला था, तो उन्होंने पार्टी को अलविदा कहते हुए बसपा का दामन थामा था और उसी के चिन्ह पर चुनाव लड़कर भाजपा के नरेन्द्र सिंह कुशवाह को हराया था। संजीव सिंह के पिता डॉ. रामलखन सिंह चार बार भिण्ड-दतिया लोकसभा से भाजपा से सांसद चुने गए थे, लेकिन बेटे के साथ उन्होंने भी बसपा का दामन थाम लिया था। प्रदेश में जब 2018 में कांग्रेस की सरकार आई थी उस समय बसपा विधायक संजीव सिंह ने कांग्रेस का साथ दिया था और वह डॉ. गोविन्द सिंह के काफी करीबी भी थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही बसपा विधायक संजीव सिंह ने भाजपा के साथ नजदीकिया दिखाना शुरू कर दी थी। इसके पीछे कारण यह भी है कि वह मूल रूप से भाजपाई थे इस कारण उनके संबंध भाजपा नेताओ से काफी पुराने थे। नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविन्द सिंह बने तो उसके बाद लगा था कि भिण्ड से बसपा के विधायक अब भाजपा में नहीं जाएगे, लेकिन राजनीति में हमेशा नेता अपना स्वार्थ देखता है और पाला बदलने में कोई दल बदल कानून का खतरा भी सामने नहीं था तो निकाय व पंचायत चुनाव से पहले एकाएक संजीव सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया, इससे नेता प्रतिपक्ष डॉ. सिंह को एक तरह से भाजपा ने उनके गृह जिले में ही झटका देने का काम किया है।

अब दो विरोधी नेता एक ही विधानसभा कैसे साथ निभाएंगे :

भिण्ड विधानसभा में नरेन्द्र सिंह कुशवाह को केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का सबसे नजदीकी माना जाता है और उनको विधायकी का टिकट मिलने के बाद दो बार एमएलए भी रह चुके है। अब ऐसे में उनके विरोधी बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह के भाजपा में आ जाने से भिण्ड विधानसभा के समीकरण फिर बिगड़ सकते है, क्योंकि एक बार सांसदी के बाद जब डॉ. रामलखन सिंह को भाजपा से टिकट दिया गया था तो नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने सपा के बैनर पर चुनाव लड़ा था। अब ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में संजीव सिंह कुशवाह को भाजपा से अगर टिकट मिलता है(जैसा की शर्त रखी होगी) तो नरेन्द्र सिंह कुशवाह फिर बगावत कर सकते है। अंचल के राजनीतिक जानकारो की माने तो कहा जा रहा है कि इससे भाजपा को अगल विधानसभा चुनाव में फायदा नहीं होगा। अब दो विरोधी एक ही विधानसभा से टिकट के दावेदार है तो फिर किसको टिकट दिया जाएगा और जिसको नहीं मिलेगा तो फिर वह पाला बदलेगा यह तय माना जा रहा है।

सत्ता के सहारे चलने के आदी होते है छोटे दल के विधायक :

राजनीति में जब भी किसी दल के विधायक व सांसद छोटी संख्या में होते है तो सत्ता के सहारे चलने के आदी हो जाते है। जब कमलनाथ की सत्ता थी उस समय सपा से लेकर बसपा व निर्दलीय विधायक कांग्रेस के साथ कदमताल कर रहे थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद एकाएक सभी के स्वर बदल गए और भाजपा नेताओ के साथ नजदीकियां दिखाने लगे थे। यही कारण है कि नेता प्रतिपक्ष डॉ. सिंह अपने गृह जिले के बसपा विधायक को कांग्रेस के साथ रखने में सफल नहीं हो सके। सूत्र का कहना है कि बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह ने भाजपा में एंट्री से पहले दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओ के साथ बात की थी और उन्होंने शर्त भी रखी थी जिसमें नगर पालिका से लेकर जिला पंचायत में उनकी बात मानी जाए साथ ही विधानसभा का टिकट पक्का किया जाए। अब राष्ट्रपति का चुनाव आने वाला है ऐसे में भाजपा अपने वोट बैंक को बढ़ाने में लगी हुई है। अब अगर बसपा विधायक की शर्त मानी जाती है तो फिर नरेन्द्र सिंह कुशवाह का नाराज होना स्वाभाविक है, वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष भिण्ड की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, इसी को ध्यान में रखते हुए पूर्व विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने अपनी पत्नी को सदस्य बनने के लिए चुनावी मैदान में उतारा हुआ है।

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