Gwalior : क्षमता से अधिक रेत लाने पर कलेक्टर ने लगाई रोक

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : ठेकेदार को दिया आदेश, वाहन की क्षमता से अधिक रेत देना बंद करें। डम्फर व ट्रॉलियों में पटा लगा कर रेत भरने पर लगाया प्रतिबंध। शासन को हो रही राजस्व हानि को लेकर उठाया गया कदम।
Gwalior : क्षमता से अधिक रेत लाने पर कलेक्टर ने लगाई रोक
क्षमता से अधिक रेत लाने पर कलेक्टर ने लगाई रोकसांकेतिक चित्र

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। वाहन में क्षमता से अधिक रेत लाने पर कलेक्टर ने रोक लगाई है। कलेक्टर ने आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब रेत ठेकेदार ही वाहनों में सिर्फ उतना ही रेत भरेगा, जितनी उसकी क्षमता वाहन कंपनी की ओर से दी गई है। यह निर्णय पूर्व में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के आयुक्तों द्वारा ली गई बैठक को लिया गया था। उस पर अमल करने के लिए कलेक्टर ने आदेश जारी किए हैं।

आमतौर पर देखने में आता है कि डम्फर चालक अपने डम्फर में क्षमता से अधिक रेत भरवा लाते हैं। वहीं रेत ठेकेदार भी उसी रॉयल्टी में अधिक रेत भरकर दे देता है, लेकिन देखने में यह आया है कि ठेकेदार रॉयल्टी तो सिर्फ डम्फर की काटता है। जिसमें डम्फर अथवा ट्रॉली की क्षमता निश्चित होती है। वहीं ठेकेदार डम्फर में क्षमता से अधिक रेत भरकर वाहन चालक से अतिरिक्त वसूली कर लेता है। इस पूरे मामले में ठेकेदार को सबसे बड़ा फायदा होता है। क्योंकि ठेकेदार जो अतिरिक्त माल वाहन चालक को देता है। उसकी रॉयल्टी का भुगतान नहीं होता है। इस वजह से शासन के राजस्व की हानि होती है। इसे ध्यान में रखते हुए वाहनों की क्षमता से अधिक अथवा डम्फर और ट्रॉली पर पटे व पटिया लगाकर रेत देने पर रोक लगाई गई है।

इस बार ठेकेदार को सौंपी जिम्मेदारी :

अब तक वाहनों में क्षमता से अधिक रेत लाने वाले वाहनों पर निगरानी पुलिस, मायनिंग अथवा प्रशासनिक अधिकारी रखते थे। लेकिन इस बार कलेक्टर ने आदेश कर कहा है कि वाहनों में अतिरिक्त रेत ठेकेदार की ओर से ही नहीं भरी जानी चाहिए। ऐसा होने पर पुलिस, मायनिंग अथवा अन्य विभागों को रेत परिवहन करने वाले वाहनों पर निगरानी कम रखना होगी।

क्षमता से अधिक होने पर बना रहता है खतरा :

डीजल आदि ईधन को बचाने के चक्कर में वाहन चालक क्षमता से अधिक रेत अपने वाहन में भरना चाहते हैं। वाहन चालक अथवा मालिक दोनों ही समय और ईधन बचाने के लिए इस प्रकार के कदम उठाते हैं, लेकिन इस लालच की वजह से कई बार गलत परिणाम सामने आते हैं। कई बार क्षमता से अधिक माल होने की वजह से वाहन हल्की से चूक पर भी बहक जाता है और चालक के नियंत्रण से बाहर चला जाता है। इस वजह से बड़े- बड़े हादसे और एक्सीडेंट होते हैं। साथ ही वाहनों की हालत भी जल्द खराब होती है।

वाहन मालिकों को मिलेगी राहत, रेत ठेकेदार को होगी हानि :

कलेक्टर के इस आदेश की वजह से एक तरफ जहां वाहन चालकों को फायदा होगा। वहीं रेत ठेकेदार को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि जो रेत ठेकेदार हर रोज हजारों घन मीटर रेत बिना रॉयल्टी के ही खपा रहा था। अथवा कम मात्रा की रॉयल्टी के नाम पर ज्यादा मात्रा रेत देकर मोटी कमाई कर रहा था। अब उस कमाई पर रोक लग जाएगी। वहीं वाहन मालिकों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा, कि उनके वाहन अब सुरक्षित रहेंगे। क्योंकि वह क्षमता के अनुसार से रेत लेकर आएंगे। उनके वाहनों का जीवन बढ़ जाएगा। साथ ही दुर्घटना होने की आशंका भी कम हो जाएगी। चूंकि सभी वाहन क्षमता के अनुसार ही रेत लेकर आएंगे तब आपस की प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाएगी।

लाखों रुपए की हो रही हर माह हानि, आम जन को रेत मिलेगी महंगी :

क्षमता से अधिक रेत ले जाने की वजह से हर माह शासन को लाखों रुपए की हानि हो रही है। इस हानि पर अब रोक लग जाएगी। जिससे सरकारी खजाने में अधिक से अधिक राजस्व पहुंचने लगेगा। वहीं आमजन के लिए रेत महंगी हो जाएगी। रेत परिवहन करने वाले लोग कलेक्टर के उक्त आदेश का हवाला देते हुए रेत को बढ़े हुए दाम में बेचना शुरू कर देंगे।

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