Gwalior : डेंगू मरीजों ने बढ़ाई मलेरिया विभाग की टेंशन, 26 मिले संक्रमित

मंगलवार को जीआरएमसी विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में 43 लोगों को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। इसमें जिले के 21 मरीज शामिल हैं। जिला अस्पताल में की गई जांचों में 5 मरीजों को डेंगू निकला है।
Gwalior : डेंगू मरीजों ने बढ़ाई मलेरिया विभाग की टेंशन, 26 मिले संक्रमित
डेंगू मरीजों ने बढ़ाई मलेरिया विभाग की टेंशन, 26 मिले संक्रमितSyed Dabeer Hussain - RE

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। जिले भर में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी बार-बार निर्देश देने के बाद भी जाग नहीं रहे हैं। डेंगू के शिकार मरीज के घर पर पहुंचकर मलेरिया विभाग की टीमों द्वारा दवा छिड़काव की रस्मअदायगी की जा रही है, इसी का नतीजा है कि गत दिवस कहर बरपाने के बाद इस बार भी थोक में मरीज निकलना प्रारंभ हो गए है मंगलवार को जीआरएमसी विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में 43 लोगों को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। इसमें जिले के 21 मरीज शामिल हैं। ठीक इसी प्रकार जिला अस्पताल में की गई, जांचों में 5 मरीजों को डेंगू निकला है। यानि कुलमिलाकर मंगलवार को जिले के 26 लोगों को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। डेंगू मरीज बड़ी तादाद में मिलने से मलेरिया विभाग की टेंशन बढ़ गई है।

नियमानुसार जिले में जिस गली-मौहल्ले में डेंगू मरीज मिल रहे हैं। उसके घर के आसपास 400 मीटर की हद में आने वाले सभी घरों में दवा का छिड़काव करना है । जबकि टीम केवल 8 से 10 घरों में टीम छिड़काव कर रही है । इस बात को मलेरिया विभाग की टीम भी स्वीकार कर रही है । टीम का कहना है कि हमें आवश्यक सामान के नाम पर केवल टॉर्च और सेल दे दिए गए है मग्गे अभी तक नहीं दिए गए हैं। इसके साथ ही पायराथरम दवाई काफी कम दी जाती है, नगरनिगम की टीम फोंिगग नहीं कर रही है। दोनों विभागों के तालमेल के अभाव में डेंगू का लार्वा मिलने के बाद जुर्माना भी नहीं किया जा रहा है।

यह बरतें सावधानी :

  • घर में पानी जमा न होने दें। यदि साफ पानी भरकर रखना आवश्यक है तो उसे एयर टाइट बर्तन या कंटेनर में रखें।

  • जमा पानी में डेटॉल डिसइंफेक्टेंट लिक्विड जैसे तरल पर्दा डालें, जिससे पानी कीटाणु रहित बना रहे। इससे एडीज म'छर का प्रजनन स्थान वह पानी नहीं बन पाता है, जिसमें डिसइंफेक्टेंट लिक्विड पदार्थ डला होता है।

  • घर के दरवाजे व खिड़कियों पर स्क्रीन का प्रयोग करें और क्षतिग्रस्त दरवाजे व खिड़कियों की मरम्मत भी कराएं। बिना स्क्रीन वाले दरवाजे और खिड़कियां हर समय बंद रखें।

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