नाले से अतिक्रमण ही नहीं हटा तो कैसे होता निर्माण
नाले से अतिक्रमण ही नहीं हटा तो कैसे होता निर्माणRaj Express

Gwalior : नाले से अतिक्रमण ही नहीं हटा तो कैसे होता निर्माण

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : ब्लेक लिस्ट हुए ठेकेदार ने निगमायुक्त से की जांच कराने की मांग। 2019 में मौलिक निधि का हुआ था टेण्डर, कार्यकाल समाप्त के बाद कैसे होता भुगतान।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। नगर निगम में कार्य करने वाले राम सिया कंन्ट्रेक्शन कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया है। कंपनी के संचालक विजय शिवहरे ने निगमायुक्त को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। इस मामले में जांच शुरू हो गई है। जनकार्य अधीक्षण यंत्री जेपी पारा ने मौके पर जाकर वास्तु स्थिति देखी है। जिस नाले का टेण्डर किया गया है वहां लोगों ने पक्के रैम्प बना रखे हैं। इस स्थिति में निर्माण शुरू करना संभव नहीं थी। साथ ही किया गया टेण्डर 2019 में तत्कालीन पार्षद की निधि का था। पार्षद निधि उसके कार्यकाल तक ही मान्य रहती है। परिषद जनवरी 2020 में अस्तित्व विहीन हो गई थी। ऐसे में ठेकेदार का भुगतान संभव नहीं था। यही वजह है कि ब्लैक लिस्ट करने की कार्यवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्वालियर विधानसभा के वार्ड 3 विनय नगर सेक्टर 2 देव स्थल पार्क के सामने नाला निर्माण करने के लिए 2019 में टेण्डर किए गए। 8 लाख 11 हजार का टेण्डर 22 प्रतिशत ब्लो पर राम सिया इंटरप्राईजेज को मिला। 26 दिसंबर 2019 को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके बाद ठेकेदार को काम शुरू करना था लेकिन मौके पर बने घरों के रैम्प के नीचे से नाला जा रहा था। रैम्प पक्के बने थे जिन्हें तोड़ने पर स्थानिय लोगों द्वारा हंगामा किया जा सकता था। इसे देखते हुए ठेकेदार ने इस मामले की जानकारी देते हुए 19 फरवरी 2020 को पत्र लिखा और साईड क्लीयर करने के लिए कहा लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। यह काम पार्षद की मौलिक निधि का था और जनवरी 2020 में पार्षद का कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद मौलिक निधि के कार्यों का भुगतान होना संभव नहीं था। इसी बीच ठेकेदार का एक्सिडेंट हो गया और वह 6 महीने तक अस्पताल में भर्ती रहा। पिछले दिनों नाला निर्माण न होने पर शिकायत शुरू हुई और क्षेत्रीय पार्षद द्वारा ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर से शिकायत कर मौके का निरीक्षण करा दिया गया। मंत्री ने तीन साल में काम न शुरू करने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दिए। इन निर्देशों के परिपालन में जेडओ द्वारा प्रस्ताव तैयार करके सहायक यंत्री एवं सीसीओ की ओर भेज दिया गया। दोनों अधिकारियों ने प्रस्ताव पर साईन करके अधीक्षण यंत्री से साईन कराकर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करा दिया। इस कार्यवाही के विरोध में ठेकेदार ने निगमायुक्त को पत्र लिखा है। इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। जल्द ही अधीक्षण यंत्री अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

इनका कहना है :

मेरी फर्म को नियम विरूद्ध तरीके से ब्लेक लिस्ट किया गया है। इस संबंध में मैंने निगमायुक्त को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। जांच में सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।

विजय शिवहरे, संचालक, राम सिया इंटर प्राईजेज

इस मामले में जांच शुरू की गई है। मैंने मौके पर जाकर वास्तु स्थिति का आंकलन किया है। हम जांच कर पूरे मामले की रिपोर्ट निगमायुक्त के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद निगमायुक्त द्वारा ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

जेपी पारा, अधीक्षण यंत्री, जनकार्य विभाग, नगर निगम

ठेकेदार द्वारा पत्र लिखते हुए कार्यवाही को नियम विरूद्ध बताया था। उनके द्वारा जो तथ्य दिए गए हैं उनके आधार पर हमने जांच शुरू कराई है। जांच रिपोर्ट में जो जाएगा उसके आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी।

किशोर कन्याल, निगमायुक्त

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