Gwalior : बागी नहीं माने तो बिगड़ सकता है दोनों दलों का समीकरण
बागी नहीं माने तो बिगड़ सकता है दोनों दलों का समीकरणShahid - RE

Gwalior : बागी नहीं माने तो बिगड़ सकता है दोनों दलों का समीकरण

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : नगर निगम चुनाव के लिए दोनों दलों में प्रत्याशी घोषित होने के बाद से ही पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओ ने बगावत शुरू कर दी है। इस बगावत से दोनों ही दलों के समीकरण बिगड़ सकते है।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। नगर निगम चुनाव के लिए दोनों दलों में प्रत्याशी घोषित होने के बाद से ही पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओ ने बगावत शुरू कर दी है। इस बगावत से दोनों ही दलों के समीकरण बिगड़ सकते है, इसलिए दोनों ही दलों को अधिकृत प्रत्याशियों ने ऐसे बागियों को मनाने का काम शुरू कर दिया है और उनको संतुष्ट करने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओ से भी बात कराई है। अब देखना यह है कि नामांकन वापसी के समय तक कितने बागी समझाईश को मानते है कि नहीं। अगर नहीं माने तो दोनों दलों के अधिकृत प्रत्याशियो के लिए परेशानी पैदा कर सकते है।

छोटे चुनाव में सबसे अधिक परेशानी पार्टियो को यह रहती है कि जिसको टिकट नहीं मिला वह मैदान मे आ जाता है। इसके पीछे कारण यह भी है कि भाजपा व कांग्रेस में इस बार कई ऐसे प्रत्याशियो को मौका दिया गया है जो राजनीतिक समीकरण के हिसाब से कहीं से फिट नहीं बैठते, जबकि काम करने वालो को नजरअंदाज किया गया। यही कारण है कि भाजपा में वार्ड 18 से सिंधिया समर्थक भाजपा नेता दिनेश शर्मा ने पार्टी से बगावत कर फार्म भर दिया और अब अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है। इसी तरह से वार्ड 1 से सिंधिया समर्थक सत्येन्द्र शर्मा को दरकिनार किया गया, लेकिन उन्होंने बगावत तो नहीं की है, लेकिन वहां के मंडल अध्यक्ष के माध्यम से एक पत्र प्रत्याशी चयन करने वाली कमेटी को भिजवाकर विचार करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही वार्ड 19 से जब पूर्व पार्षद बलवीर सिंह तोमर की पत्नी का भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पाला बदलकर कांग्रेस से अपनी पत्नी के लिए टिकट ले लिया और अब मैदान में भाजपा के लिए वह परेशानी पैदा कर सकते है। इसी तरह से छावनी मंडल की महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष ममता कुशवाह लम्बे समय से वार्ड 65 में काम कर रही थी और इस बार वार्ड पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरिक्षत भी हो गया था, लेकिन ममता कुशवाहा को नजरअंदाज किया गया और पहले जो पार्षद थे उनकी पत्नी को ही भाजपा ने मैदान में उतारा है। टिकट न मिलने से नाराज ममता कुशवाहा ने भी नामांकन भरकर निर्देलीय मैदान में उतरने का मन बना लिया है। रविवार को ऐसे ही नाराज भाजपाईयो को मनाने के लिए दिनभर प्रत्याशी लगे रहे, लेकिन संभावना है कि उनकी बात से नाराज भाजपाई मानने को तैयार नहीं है, लेकिन इसके बाद भी नामांकन वापिसी के समय ही पता चलेगा कि कितने लोगो को पार्टी संतुष्ट कर सकने में सफल रही।

कांग्रेस में कई लोगो ने मैदान में ताल ठोक दी चुनौती :

भाजपा की तरह ही कांग्रेस में भी कई लोगो ने विरोध करते हुए नामांकन भर मैदान मेें आकर कांग्रेस प्रत्याशियो के लिए चुनौती पेश कर दी है। इसको लेकर दिनभर कांग्रेस नेता नाराज कांग्रेसियो को मनाने में लगे रहे है, लेकिन लगता है कि उसमें फिलहाल उनको सफलता नहीं मिली है। कांग्रेस में वार्ड 33 से अतुल जैन, वार्ड 1 से राजेश खान, वार्ड 26 से रामबाबू शर्मा और वार्ड 59 से राहुल बघेल ने बगावत कर मैदान संभाल लिया है। यहां बता दे कि अतुल जैन, राजेश खान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा के नजदीकी है,जबकि रामबाबू शर्मा को अशोक सिंह का नजदीकी बताया जा रहा है। वहीं वार्ड 65 से हेवरन कंसाना को टिकट देकर कांग्रेस ने विरोध मोल ले लिया है, क्योंकि इस वार्ड में जो कांग्रेसी रहते है वह हेवरन की पत्नी को टिकट मिलने से खासे नाराज बताएं जा रहे है। रविवार को कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी बगावत करने वाले कांग्रेसियो को मनाने में लगे रहे है और अपने वरिष्ठ नेताओ से भी उनकी बात कराकर संतुष्ट करने का काम किया, लेकिन क्या समझाईश को वह समझ गए है कि नहीं इसका पता तो नामांकन वापिसी के बाद ही पता चलेगा, लेकिन यह तय है कि इस बार दोनों ही दलों में जिस तरह से टिकट वितरण को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता नाराज है उससे दोनों ही दलो के समीकरण तो बिगड़े हुए है साथ ही दोनों दलों के अध्यक्षो पर भी पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाए गए है जिसको लेकर दोनों ही दलों के अध्यक्ष चुप्पी साधे हुए है।

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