ग्वालियर : फोरलेन होती सड़क तो बच सकती थीं 13 जिंदगियां
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ग्वालियर : फोरलेन होती सड़क तो बच सकती थीं 13 जिंदगियां

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : 8 साल में फॉर लाईन नहीं हो सकी पुरानी छावनी से गोला का मंदिर की सड़क। मई 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने जताई थी नाराजगी।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। पुरानी छावनी पर गत दिवस हुई दुर्घटना लोगों के जेहन से नहीं निकल पा रही है। जरा सी असावधानी के चलते बस एवं ऑटो की टक्कर में 13 लोग काल के गाल में समा गए। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यह सड़क फॉर लाईन होती तो इस तरह की दुर्घटना नहीं होती। लोगों की बात गलत नहीं है। पुरानी छावनी से गोला का मंदिर तक की सड़क 2013 में फॉर लाईन होनी थी और इसका बजट भी स्वीकृत हो गया था। लेकिन स्थानीय नेता एवं अधिकारियों की अनदेखी के चलते सड़क फॉर लाईन नहीं हो सकी।

महानगरों को जोडऩे वाले हाईवे एवं अंदर की मुख्य सड़कों को फॉर लाईन किया जा चुका है। यह कार्य पांच साल पहले हो चुका था। ग्वालियर की बात करें तो शहर के अंदर आने वाले चारों मुख्य मार्गों को फॉर लाईन किया जा चुका है। इसमें शिवपुरी लिंक रोड, भिण्ड रोड, मुरैना रोड एवं झांसी रोड शामिल हैं। लेकिन पुरानी छावनी से गोला का मंदिर को जोडऩे वाले रास्ते की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। यह मुख्य सड़क है जो भिण्ड से मुरैना सड़क को जोड़ती है। इस सड़क पर सुबह से लेकर रात तक हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। साथ ही सड़कों के आसपास बड़े स्कूल से लेकर सरकारी संस्थान एवं आसासिय परिसर बने हुए हैं। इसके बावजूद इस सड़क को फॉर लाईन नहीं किया गया। यहां आए दिन हादसे हो रहे हैं लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अगर समय रहते अधिकारी एवं नेताओ की पहल पर यह सड़क फॉर लाईन हो जाती तो यह गंभीर हादसा नहीं होता।

15 मार्च को बस ने कुचला था शिक्षिका को :

पुरानी छावनी से गोला का मंदिर तक जाने वाली सड़क पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। 15 मार्च को सेन जॉस वियानी स्कूल में पढ़ाने वाली 35 वर्षीय शिक्षिका एलिजाबेथ जोजफ पत्नी हनी जोजफ निवासी शील नगर को बस ने कुचल दिया था। स्कूल से निकलते ही स्कूटी को बस ने कुचल दिया। चूंकि सिंगल सड़क है इसलिए स्कूल से निकलते समय दूसरी तरफ से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता। इसी कारण से यह हादसे होते हैं। अगर सड़क फॉर लाईन होती तो हादसे न के बराबर हो जायंगे।

सड़क से निकले तत्कालीन मुख्यमंत्री हो गए थे नाराज :

29 मई 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ग्वालियर प्रवास पर आए थे। वह मुरैना गए थे और वहां से सड़क मार्ग से ग्वालियर पहुंचे। वह पुरानी छावनी से गोला का मंदिर होते हुए वीआईपी सर्किट हाउस पहुंचे थे और इसके बाद होटल सेन्ट्रल पार्क में स्थानिय नेता एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता सहित अन्य नेता उपस्थित थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुरानी छावनी से गोला का मंदिर तक आने वाली सड़क के फॉर लाईन न होने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कलेक्टर से कहा था कि इस सड़क को फॉर लाईन करें। जो भी बजट की आवश्यकता है वह तत्काल स्वीकृत किया जायगा। इसके बाद किसी अधिकारी एवं नेताओं ने ध्यान नहीं दिया इसलिय यह सड़क अब भी सिंगल ही बनी हुई है।

इनका कहना है :

यह बात सही है कि पुरानी छावनी से गोला का मंदिर तक जाने वाली सड़क फॉर लाईन होनी चाहिए। इस संबंध में हम अधिकारियों से पहले चर्चा भी कर चुके हैं। लेकिन अब इसे प्राथमिकता देते हुए बजट स्वीकृत कराते हुए सड़क फॉर लाईन बनवाई जायगी।

विवेक नारायण शेजवलकर, सांसद, ग्वालियर

पुरानी छावनी से गोला का मंदिर तक सड़क फॉर लाईन बनाने के विषय में प्रशासन स्तर पर चर्चा की गई है। यहां संजय नगर पर नया आरओबी बनाया जायगा और स्वर्ण रेखा पर नया पुल भी बनाना पड़ेगा।

मोहर सिंह जादौन, कार्यपालन यंत्री, सेतु संभाग, ग्वालियर

सड़क का फॉर लाईन होना आवश्यक है। इसके लिए हम योजना बना रहे हैं। लेकिन 2013 में पैसा स्वीकृत हो गया था इसकी जानकारी मुझे नहीं हैं। मैं गुरूवार को इस संबंध में अधिकारियों से जानकारी लूंगा।

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

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