Gwalior : नन्हीं सी जान को दो पल भी नसीब नहीं हुई ममता की छांव
नन्हीं सी जान को दो पल भी नसीब नहीं हुई ममता की छांवराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Gwalior : नन्हीं सी जान को दो पल भी नसीब नहीं हुई ममता की छांव

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म देने के दो दिन बाद दम तोड़ दिया, नन्हीं सी जान को मां की ममता की छांव दो पल भी नसीब नहीं हुई।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म देने के दो दिन बाद दम तोड़ दिया, लेकिन नन्हीं सी जान को मां की ममता की छांव दो पल भी नसीब नहीं हुई, क्योंकि डिलेवरी से पहले मां का रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया गया था। इसमें वह पॉजिटिव आई थीं। ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया इसलिए बच्चे को मां से दूर रखा था। हालांकि बच्चा अभी स्वस्थ है। उसकी देखभाल दादी और बुआ कर रही हैं। बच्चा स्वस्थ रहे इसके लिए परिजन डॉक्टरों के सम्पर्क में बने हुए हैं।

डबरा के गोमतीपुरा निवासी अशोक उर्फ नीतेश गुप्ता दिल्ली में एमएनसी कंपनी में जॉब करते हैं। नीतेश की एक साल पहले कोविड के माहौल में डबरा निवासी 25 वर्षीय वर्षा गुप्ता से शादी हुई थी। दोनों काफी खुश थे। वर्षा, पति के साथ ही दिल्ली चली गई थी। इसके बाद वह प्रेग्नेंट हो गई। दीपावली पर दोनों घर आए थे। वर्षा सात माह की गर्भवती थी, इसलिए इस बार नीतेश उसे ससुराल में ही छोड़ गया, जिससे अच्छे से देखभाल हो सके। 10 जनवरी को परिजन एक निजी अस्पताल मेें वर्षा को डिलीवरी के लिए लेकर पहुंचे। यहां डिलीवरी से पहले उसका रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया गया, जिसमें वह संक्रमित निकली थी, जबकि उसे न खांसी थी न जुकाम। वर्षा ने 10 जनवरी को सीजर के बाद बेटे को जन्म दिया। शादी के एक साल बाद गुप्ता परिवार में चिराग के जन्म पर खुशियां मनने लगीं। कोविड पेशेंट होने के चलते बेटे को उसकी मां से दूर रखा जा रहा था। 11 जनवरी को अचानक वर्षा की हालत बिगडऩे लगी। ब्लड प्रेशर गिरने लगा। सांसें उखडऩे लगीं। डॉक्टरों ने उसे निगरानी में ले लिया। उसे पहले जेएएच के टीबी वार्ड में रखा गया फिर सुपर स्पेशियलिटी में भी रखा, लेकिन बुधवार को वर्षा ने दम तोड़ दिया। जो परिवार दो दिन पहले बेटे के जन्म पर खुशियां मना रहा था, वो अब सदमे में है।

वर्षा की आखिरी निशानी उसका दो दिन का बेटा :

वर्षा की मौत का दर्द पूरे परिवार को है और हमेशा रहेगा, लेकिन अब गुप्ता परिवार के ऊपर वर्षा की आखिरी निशानी उसका दो दिन का बेटा है। इसी मासूम के लिए उनके परिजन दर्द भूल गए हैं। अभी मासूम की जिम्मेदारी उसकी दादी और बुआ संभाल रही हैं। वही उसकी देखरेख कर रही हैं। बच्चे के पास कोई और नहीं जा रहा है।

क्या कहते हैं बाल रोग विशेषज्ञ :

चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. विनीत चतुर्वेदी की मानें तो बच्चा सिर्फ दो दिन का है। यह समय उसके लिए बड़ा ही मुश्किल है। वो भी ऐसे समय में जब उसकी मां का निधन हो गया है। ऐसे बच्चे को किसी दूसरी मां का दूध दिया जा सकता है, क्योंकि बच्चा अभी बाहर का दूध पचा नहीं पाएगा। मां का दूध न मिले तो गाय का दूध पानी मिलाकर दिया जा सकता है।

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