जनता के बीच पहुंचे प्रद्युम्न सिंह तोमर
जनता के बीच पहुंचे प्रद्युम्न सिंह तोमरRaj Express

Gwalior : जनता के बीच पहुंच प्रद्युम्न ने कहा आप लोग कहें तो मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : किलागेट से हजीरा तक तोड़फोड़ होने के दूसरे दिन जनता के बीच पहुंचे। लोगों से कहा आप मुझे गाली दे पत्थर फेंके पर में काम वहीं करूंगा जो आने वाली पीढ़ी के लिये लाभकारी हो।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र लम्बे समय से राजनीति का केन्द्र बना हुआ है चाहे वह सड़को का मामला हो या फिर गंदा पानी व सीवर के उफान की समस्या हो इसको लेकर कांग्रेस लगातार ऊर्जा मंत्री को घेरती आ रही है और उनके खिलाफ आंदोलन भी किए जा रहे है। हजीरा सब्जी मंडी को वहां से हटाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि किलागेट से हजीरा चौराहे पर दर्जनों मकान व दुकानों को प्रशासन की कार्यवाही में उजाड़ दिया गया जिसको लेकर आमजन में ऊर्जा मंत्री के खिलाफ जमकर आक्रोश है। इसी आक्रोश को शांत करने के लिए ऊर्जा मंत्री सोमवार को आमजन के बीच पहुंचे तो लोगो ने उनके खिलाफ कई तरह की शब्दावली का प्रयोग किया, लेकिन ऊर्जा मंत्री ने साफ कह दिया कि आप लोग अगर कहें तो में मंत्री पद से इस्तीफा दे दूं और काम मैं वहीं करूंगा जो आने वाली पीढ़ी के लिये लाभकारी होगा।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की विधानसभा में रविवार को जिला प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही से स्थानीय लोग खासे नाराज हैं। इस नाराजगी से ऊर्जा मंत्री भी अवगत है और अगले साल विधानसभा चुनाव होना है ऐसे में जनता को समझाने के लिए सोमवार को वह जिनके मकान व दुकाने टूटी है उनके बीच पहुंचे। इस दौरान ऊर्जा मंत्री को पहले तो लोगों ने जमकर खरी खोटी सुनाई इससे माहौल गर्मा गया तो ऊर्जा मंत्री ने हाथ जोड़कर लोगों से कहा कि आप पहले मेरी बात भी तो सुन लें।

आपको लगता है कि प्रद्युम्न सिंह निकम्मा है :

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आपको लगता है कि प्रद्युम्न सिंह निकम्मा है तो मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा, आप लोगों को अगर लगता है, तो आप मुझे पत्थर मारिए, जूते मारने है तो मारो, लाठी चलाइए जो करना है करिए, लेकिन मैं वही करूंगा, जिससे आने वाली पीढ़ी और ग्वालियर का भला होगा। जनसेवक कहलाना पसंद करने वाले और हमेशा जनता के बीच रहकर उनकी परेशानियों को समझकर उनका हल निकालने वाले, जनता के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाने वाले, उनकी तकलीफ में चप्पल उतार देने वाले, अपने हाथ से नाले नाली साफ करने वाले ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को सोमवार को उसी जनता ने खरी खोटी सुनाई। अब हालात यह है कि जिस ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में विकास और जन सुविधाओं के करोड़ों के काम कराने वाले ऊर्जा मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर को जिला प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ भारी पड़ रही है। यही कारण है कि क्षेत्रीय जनता ऊर्जा मंत्री पर जमकर भड़ास निकाल रही थी पर मंत्री शांत होकर हाथ जोड़े खड़े हुए थे। क्षेत्रीय लोगों ने तो यहां तक कहा कि आज आ गए कल जब लोगों के मकान व दुकाने तोड़ी जा रही थी तब आने की फुर्सत नहीं थी।

लोगों के आक्रोश को देख भावुक हुए प्रद्युम्न :

अब जनता का जब नुकसान होता है और उसका घर व रोजीरोटी का साधन छिनता है तो उसका नाराज होना लाजिमी है, क्योंकि इन्ही प्रद्युम्न सिंह ने जब वह विपक्ष में हुआ करते थे तब इन्ही लोगों से कहा था कि आपकी एक इंच जमीन नहीं जाने दूंगा, लेकिन अब सत्ता में होने के बाद वह उस वादे को भूल गए और आम जनता की दुकाने व मकान पूरी तरह से धाराशाई कर दिए गए। अब इससे नाराज होना स्वाभाविक है और इसको प्रद्युम्न सिंह भी समझ रहे है। यही कारण है कि सोमवार को ऊर्जा मंत्री अपने क्षेत्र की जनता की बातें सुनकर भावुक हो गए और आखिर जनता के गुस्से का शांत कराने के लिए उन्हें यह कहना पड़ा कि अगर आप लोगों को लगता है कि प्रद्युम्न सिंह तोमर निकम्मा है, काम नहीं कर रहा, आप लोगों के साथ अन्याय किया है, तो मैं क्षत्रिय बालक हूँ, आप यहां कहेंगे तो में मंत्री पद से इस्तीफा देकर कुर्सी छोड़ दूंगा उन्होंने कहा कि मुझे तोड़फोड़ पर कुछ नहीं कहना, आपको लाठी चलानी है लाठी चलाइए, आपको पत्थर फेंकने है फेंकिए, जूते मारने है मारिये, लेकिन मैं वही करूंगा, जिसमें आने वाली पीढ़ी और ग्वालियर का भला होगा। मेरी बात सुन लें, यदि नहीं है भरोसा, यदि नेताओं की तरह मुझे भी गिनना चाहते हो तो गिनिए मुझे तकलीफ नहीं होगी।

यह मेरा कोई चुनावी भाषण नहीं है :

ऊर्जा मंत्री को अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है यही कारण है कि अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही उनको अब भारी दिखने लगी है, क्योंकि अभी हजीरा सब्जी मंडी को वहां से हटाने का मामला शांत भी नहीं हुआ है। यही कारण है कि ऊर्जा मंत्री को यह कहना पड़ा कि मैंने पहले भी कहा था कि मैं रहूं या नहीं रहूं प्रशासन कार्यवाही करेगा, लेकिन आप लोगों ने मेरी बात को कोई तवज्जो नहीं दी। साल डेढ़ साल से काम रुका रहा, प्रशासन यह कहने लगा कि आप हमें काम नहीं करने दे रहे हो। मेरा ये कहना कि आप लोग प्रशासन के साथ बैठकर सहमति बना लें, बीच का रास्ता निकाल लें ये सेवक आपके साथ है, मैं बैठने के लिए तैयार हूं।

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