शराब पर उमा के विरोध को देख नई नीति बनाने हो रहा मंथन
शराब पर उमा के विरोध को देख नई नीति बनाने हो रहा मंथनRaj Express

Gwalior : शराब पर उमा के विरोध को देख नई नीति बनाने हो रहा मंथन

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : उमा के विरोध को देखते हुए सरकार नई आबकारी नीति बनाने में जुट गई है और उसको लेकर फिलहाल मंथन चल रहा है साथ ही सुझाव भी मांगे जा रहे है।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। शराब नीति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती लगातार विरोध करती आ रही है और उनके विरोध को देखते हुए सरकार ने भी उनसे कुछ समय मांगा था। उमा भारती ने दिसंबर तक का समय दिया था और उसके बाद अगर शराब नीति में बदलाव नहीं किया गया तो वह इसके विरोध में मैदान में उतर आएंगी। उमा के विरोध को देखते हुए सरकार नई आबकारी नीति बनाने में जुट गई है और उसको लेकर फिलहाल मंथन चल रहा है साथ ही सुझाव भी मांगे जा रहे है।

शराब मामले को लेकर भाजपा की वरिष्ठ नेत्री व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का जिस तरह से विरोध देखने को मिला उससे भाजपा के अंदर ही हलचल मच गई थी, क्योंकि एक दुकान पर तो उमा भारती ने अपने हाथो से पत्थर फेंका था, जिससे दुकान के अंदर रखी शराब की बोतले टूट गई थी। वहीं सड़क पर शराब पीकर वाहन चलाने वालो के खिलाफ कार्यवाही किए जाने को लेकर भी उमा भारती का कहना था कि जब शहर में अहाते सरकार ने ही खुलवाएं हुए है तो वहां जो शराब पीएगा तो क्या वह सोएगा, घर तो जाएगा ओर घर जाएगा तो अपने वाहन से ही जाएगा तो उसे चलाएगा ही वही फिर उसके खिलाफ कार्यवाही करने का क्या औचित्य है। जब सरकार ही अहाता खुलवाकर लोगो को शराब पीने की छूट दे रही है तो फिर लोग शराब पीकर सड़को पर चलेंगे ही। उमा भारती ने यह भी कहा था कि इस मामले में सरकार को नीति बनाते समय ध्यान रखना चाहिए। यही कारण है कि अगले साल होने वाले शराब ठेको से पहले नई नीति बनाने के लिए मंथन शुरू हो गया है ओर उसमें उमा भारती का जो विरोध है उसको कैसे दूर किया जाए इसका भी ध्यान रखने की बात कही जा रही है। अब देखना यह है कि शराब की नई नीति बनाते समय उमा के विरोध का ध्यान रखा जाता है कि नहीं ओर अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक बार फिर उमा भारती शराब मामले को लेकर मैदान मेें आ सकती है।

अधिकारियों व शराब बनाने वालो से लिया जा रहा सुझाव :

प्रदेश सरकार नई आबकारी नीति बनाने के लिए तैयारी कर रही है। वैसे तो प्रदेश के सभी जिलों ने नई नीति को लेकर प्रस्ताव भोपाल भेज दिए हैं। शराब के ठेकेदार, आबकारी अधिकारी, शराब निर्माताओं से सुझाव लिया जा रहा है। नई नीति बनाते समय इस बार भी शराब की कीमतो में 15 प्रतिशत तक की वृदधी की जा सकती है, क्योंकि सरकार को शराब से ही सर्वाधित राजस्व मिलता है। शराब नीति में इस बार सरकार कोई चौंकाने वाला बदलाव तो नहीं करेगी क्योंकि आने वाला ससमय चुनाव का है। देशी शराब के दाम घटाने को लेकर कच्ची शराब व जहरीली शराब की घटनाओं में कमी आने का सुझाव मिला है, इसलिए इस बार नई नीति में इसके दाम कुछ बढ़ सकते हैं या यथावत रखे जाएंगे। आबकारी के उपायुक्त स्तर के अधिकारियों से भोपाल में चर्चा हो चुकी है अब विभाग के प्रमुख सचिव के साथ प्रजेंटेशन होगा बाकी है, इसके बाद नीति का पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा।

यहां यह बता दें कि अगला साल विधानसभा चुनाव का है। इसके साथ ही नशा मुक्त अभियान और शराब को लेकर पहले भी उठने वाले सवालों को देखते हुए नीति निर्माण का काम किया जा रहा है। नई शराब नीति बनाने के लिए मुख्यालय ने सभी जिलों से सुझाव मांगे हैं, जिन्हें कच्चे ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। आबकारी के ठेकेदारों से भी बात की गई है। वर्तमान में लागू आबकारी का कंपोजिट दुकानों का फार्मूला आगे भी यथावत रखा जा सकता है।

रूपरेखा तैयार,जल्द लग सकती है मुहर :

नई आबकारी नीति को लेकर मोटे तौर पर रूपरेखा को आए सुझाव व प्रस्तावों के आधार पर तैयार कर लिया गया है। वाणिज्यकर विभाग के प्रमुख सचिव के समक्ष इसका प्रजेंटेशन भी हो चुका है। इसमें आबकारी आयुक्त ओपी श्रीवास्तव सहित शीर्ष अधिकारी शामिल रहेंगें। आंशिक बदलावों के साथ जल्द अब नई नीति पर मुहर लग सकती है। दिसंबर में फायनल कर ली जाएगी और जनवरी में शासन इसके जारी कर देगा।

इनका कहना है :

नई आबकारी नीति को लेकर तैयारी चल रही है। सभी जिलों से प्रस्ताव मंगवा लिए गए हैं और हर स्तर पर चर्चा भी कर ली गई है। इस बार सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

ओपी श्रीवास्तव, आयुक्त, आबकारी, मप्र

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