Gwalior : जड़ेरूआ बांध की नहर में छोड़ेंगे एसटीपी का पानी, 3 हजार हैक्टेयर भूमि होगी सिंचित
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Gwalior : जड़ेरूआ बांध की नहर में छोड़ेंगे एसटीपी का पानी, 3 हजार हैक्टेयर भूमि होगी सिंचित

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : अमृत योजना से लाल टिपारा पर बनाया गया है 65 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट। भूमिगत जल स्तर बढ़ने के साथ पशुओं को पीने के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगा पानी।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। अमृत योजना को लेकर भले ही नकारात्मक माहौल बन गया है, लेकिन कुछ अच्छे काम भी हुए हैं। इसमें सीवर का पानी फिल्टर करने के लिए बनाए गए चारों एसटीपी मील का पत्थर साबित होंगे। इन एसटीपी से जो पानी फिल्टर होगा उसका इस्तेमाल खेती सहित निर्माण कार्य और पशुओं को पिलाने में किया जा सकेगा। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए लाल टिपारा स्थित 56 एमएलडी के एसटीपी का पानी जड़ेरूआ बांध की नहर में छोड़ने की योजना पर काम शुरू किया गया है। एसटीपी का पानी नहर के जरिए बेहटा और हस्तिनापुर क्षेत्र तक जाएगा। इस पानी से लगभग 3 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। एसटीपी से पानी नहर तक पहुंचाने के लिए 500-500 एमएम की दो पाईप लाईन डालने का काम शुरू किया गया है। लाईन पूरी डलते ही पानी नहर में पहुंचना शुरू हो जाएगा।

नगर निगम द्वारा अमृत योजना में 733 करोड़ रुपये की लागत से सीवर एवं पेयजल संबंधी कार्य कराए गए हैं। इस योजना में सीवर से संबंधित दो प्रोजेक्ट बनाए गए थे जिसमें सीवर की नई लाईन डालने के साथ चार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी बनाए गए हैं। इन चारों एसटीपी से पानी फिल्टर किया जा रहा है। वर्तमान में जलालपुर पर बने एसटीपी का पानी फिल्टर करके स्वर्ण रेखा में ही छोड़ा जा रहा है। वहीं लाल टिपारा पर बने एसटीपी का पानी फिल्टर कर नहर में छोड़ने की योजना पर काम शुरू किया गया है। निगमायुक्त किशोर कन्याल ने निगम अधिकारियों के साथ एसटीपी का निरीक्षण किया था। इसमें फिल्टर पानी का इस्तेमाल कृषि भूमि की सिंचाई के लिए करने की योजना पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि एसटीपी का पानी जड़ेरूआ बांध की नहर में छोड़ा जाएगा। यह पानी नहर तक पहुंचाने के लिए पाईप लाईन डालने का काम भी शुरू किया जा सका है। यहां 500-500 एमएलडी की दो पाईप लाईन डाली जा रही है जिनसे प्रतिदिन 30 से 40 एमएलडी पानी फिल्टर करके नहर में छोड़ा जाएगा।

3000 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित :

नगर निगम अधिकारियों की मानें तो शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में अब तक सीवर के पानी से सब्जी एवं अनाज उगाया जा रहा है। इसका घातक असर भी पड़ता है। केमिकल युक्त पानी के इस्तेमाल से उगाई गई सब्जी एवं अनाजों के सेवन से कई गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। लेकिन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से फिल्टर होकर जाने वाले पानी से बीमारियों का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यह पानी फसलों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा। लाल टिपारा एसटीपी से प्रतिदिन 30 से 40 एमएलडी पानी फिल्टर करके नहर में छोड़ा जाएगा। इस पानी से 3000 हैक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकेगा।

फिल्टर पानी से यह होंगे फायदे :

  • केमिकल युक्त पानी से अनाज एवं सब्जी उगाना बंद होगा।

  • फिल्टर पानी को तालाब एवं अन्य वाटर वॉडी में एकत्रित किया जा सकेगा।

  • वाटर बॉडी में पानी एकत्रित होने से भूमि गत जल स्तर बढ़ेगा।

  • किसान कभी भी खेती के लिए नहर से पानी ले सकेंगे।

  • वाटर बॉडी में एकत्रित पानी को पशु पी सकेंगे। साथ ही अन्य इस्तेमाल भी हो सकेगा।

  • निर्माण कार्य में भी इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

  • पानी की कमी के कारण प्रभावित होने वाली फसलों को पर्याप्त पानी मिलेगा।

अमृत योजना से इन चार जगह बने एसटीपी :

  • जलालपुर पर 145 एमएलडी का एसटीपी बना है। इसकी लागत लगभग 100 करोड़ है।

  • लाल टिपारा पर 65 एमएलडी का एसटीपी बना है। इसकी लागत लगभग 56 करोड़ है।

  • ललिया पुरा पर 4 एमएलडी का एसटीपी बना है। इसकी लागत लगभग 3 करोड़ रुपये है।

  • शताब्दी पुरम लोहरपुरा पर 8 एमएलडी का एसटीपी बना है। इसकी लागत लगभग 4.30 करोड़ रुपये है।

इन कपंनियों ने किए है सीवर प्रोजेक्ट के काम

सीवरेज लश्कर :

  • प्रोजेक्ट : जलालपुर में एसटीपी निर्माण व सीवरेज हेतु पाइप लाइन कार्य

  • लागत : 173.62 करोड़

  • कार्य : 165 एमएलडी का एसटीपी कार्य व 100 किमी पाइप लाइन डालना

  • फर्म : इनविराड सोल्यूशन प्रा. लिमिटेड

सीवरेज मुरार :

  • प्रोजेक्ट : लालटिपारा व लोहारपुरा एसटीपी निर्माण व सीवरेज हेतु पाइप लाइन कार्य

  • लागत : 207.97 करोड़

  • कार्य : 65 एमएलडी व 8 एमएलडी के एसटीपी निर्माण व 180 किमी पाइप लाइन डालना

  • फर्म : मैसर्स जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन

इनका कहना है :

सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से फिल्टर होने वाली पानी के इस्तेमाल की योजना पर हमने काम शुरू कर दिया है। लाल टिपारा पर बने एसटीपी से पानी फिल्टर करके जड़ेरूआ बांध में डालेंगे ताकि किसान इस पानी का इस्तेमाल खेती के लिए कर सकें। इसके अलावा जलालपुर पर बने एसटीपी का पानी भी जल संसाधन विभाग का दिया जाएगा।

किशोर कन्याल, निगमायुक्त

हम लाल टिपारा से जड़ेरूआ बांध तक 500 एमएम की दो लाईनें बिछा रहे हैं। इन लाईनों के जरिए पानी कैनाल तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी से लगभग 3 हजार हैक्टेयर जमीन को सिंचित किया जा सकेगा। यह पानी पशुओं को पिलाने एवं भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने का काम भी करेगा।

आरएलएस मौर्य, अधीक्षण यंत्री, पीएचई, नगर निगम

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