ग्वालियर : बालाजी मैरिज गार्डन का टीन शेड तोड़ा, नगर निगम की कार्यवाही

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : प्रशासन एवं नगर निगम अधिकारियों की मौजूदगी में गांधी रोड पर स्थित बालाजी गार्डन का टीन शेड तोड़ा गया। पक्का निर्माण हटाने की 24 घंटे की दी मोहलत।
ग्वालियर : बालाजी मैरिज गार्डन का टीन शेड तोड़ा, नगर निगम की कार्यवाही
बालाजी मैरिज गार्डन का टीन शेड तोड़ाRaj Express

हाइलाइट्स :

  • कांग्रेस नेता के चाचा का है मैरिज गार्डन।

  • गार्डन संचालक ने कहा द्ववेश पूर्ण भावना से कार्यवाही कर रही है सरकार।

  • उच्च न्यायालय में चल रहा है मामला, स्टे के बावजूद टीन शेड तोड़ा।

  • सही सीमांकन न करने पर संचालक ने नहीं लिया प्रशासन का नोटिस।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। जिला प्रशासन ने सरकारी जमीनों पर कार्यवाही का शुभारंभ कर दिया है। बुधवार दोपहर प्रशासन एवं नगर निगम अधिकारियों की मौजूदगी में गांधी रोड पर स्थित बालाजी गार्डन का टीन शेड तोड़ा गया। यह गार्डन कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह के चाचा इंदर सिंह का है। तुड़ाई के बाद प्रशासन ने अंदर की तरफ बने पक्के निर्माण को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन गार्डन संचालक के वकील कोर्ट द्वारा दिया गया स्टे लेकर पहुंच गए। वकील से चर्चा के बाद एडीएम आशीष सिंह ने सीमांकन कराने एवं दस्तावेज दिखाने के लिए 24 घंटे का समय दिया। हालांकि सीमांकन कराने के लिए जब तहसीलदार एवं पटवारी ने नोटिस तामिल कराना चाहा तो गार्डन संचालक ने मना कर दिया। शाम 4.30 बजे अमला वापस लौट गया। कांग्रेसी नेता ने इस कार्यवाही को द्वेष पूर्ण बताया है।

उपस्थित प्रशासनिक अधिकारी
उपस्थित प्रशासनिक अधिकारीRaj Express

कांग्रेस शासन काल में चलाए गए एंटी माफिया अभियान की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी कार्यवाही करने का मन बना लिया है। मिलावट खोरों पर कार्यवाही के लिए नौ चलित प्रयोगशालाओं का शुभारंभ किया जा चुका है और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश भी दिए गए हैं। इंदौर से इसकी शुरूआत की गई है और बुधवार को प्रशासन ने कांग्रेसी नेता के परिजनों को निशाना बनाते हुए बालाजी मैरिज गार्डन का टीन शेड तोड़ दिया। गांधी रोड़ पर स्थित बालाजी गार्डन की जमीन को लेकर उच्च न्यायालय में मामला लंबित है और स्टे भी दिया गया है। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना नोटिस दिए बुधवार को कार्यवाही की।

प्रशासन, पुलिस एवं नगर निगम अधिकारियों की टीम दोपहर में मौके पर पहुंच गई थी। इस टीम में एडीएम आशीष तिवारी, अपर आयुक्त नगर निगम मुकुल गुप्ता, एसडीएम विनोद भार्गव, नायब तहसीलदार कुलदीप दुबे, सीएसपी, एसीपी सहित पुलिस अधिकारी मौजूद थे। अमले ने सर्वप्रथम जेसीबी की सहायता से गार्डन के मुख्य गेट के सामने बने टीन शेड को तोड़ दिया। इसी दौरान गार्डन के संचालक मौके पर पहुंच गए और वकील को मौके पर बुला लिया। गार्डन संचालक की तरफ से वकील आरके सोनी उच्च न्यायालय का स्टे लेकर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि चार सर्वे नंबरों को लेकर प्रकरण उच्च न्यायालय में चल रहा है और अभी सुनवाई पूरी नहीं हुई है। ऐसे में बिना नोटिस दिए कार्यवाही करना अवैधानिक है। इसके बाद एडीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और सीमांकन के लिए 24 घंटे का समय देकर वापस लौट गए। इसके बाद सीमांकन करने पहुंची प्रशासन की टीम ने जब गार्डन संचालक को नोटिस तामील कराने के लिए कहा कि तो उन्होंने इंकार कर दिया। उनका कहना था कि बिना नोटिस दिए यह कार्यवाही की गई है और सीमांकन पुराने मोनूमेंट या कुंए से किया जाना चाहिए। सड़क से कभी सीमांकन नहीं होता। इसके बाद पूरा अमला वापस चला गया। अब गुरूवार सुबह प्रशासन क्या एक्शन लेता है यह किसी को नहीं पता। कार्यवाही के दौरान कांग्रेसी नेता अति सुंदर सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

इन सर्वे नंबरों को लेकर चल रहा है प्रकरण :

उच्च न्यायालय में चार सर्वे नंबरो को लेकर प्रकरण चल रहा है। इसमें 914, 915, 917, 918 एवं 1937/1 है। इन सर्वे नंबरों को लेकर हरचरण, अशोक सिंह, रमको बाई, जण्डेल सिंह, श्याम बाबू एवं राजेश सिंह ने मुकदमा पेश किया है। अब तक मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। ऐसे में प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवाही को लेकर कांग्रेसी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं।

ऐप में देखकर नहीं हो सकता सीमांकन :

मौके पर मौजूद गार्डन संचालक के परिजनों का कहना था कि यह साढ़े 6 बीघा जमीन का मामला है। यह कई साल से चल रहा है। चार बार सीमांकन हो चुका है। फिर भी बार-बार अमला आ जाता है। जिस तरह प्रशासन सीमांकन कराने की बात कह रहा है वह गलत है। ऐप पर देखकर सीमांकन नहीं किया जा सकता। सीमांकन पुराने कुंए से किया जाता था।

इनका कहना है :

सरकारी जमीन पर गार्डन बने होने की शिकायत हमें मिली थी। इसी आधार पर कार्यवाही की गई है। गार्डन संचालक ने मामला उच्च न्यायालय में पेडिंग होने की बात कही है इसलिए हमनें दस्तावेज दिखाने एवं सीमांकन संबंधी कार्यवाही के लिए 24 घंटे का समय दिया है। इसके बाद जो भी उचित कार्यवाही होगी वह की जाएगी।

आशीष तिवारी, एडीएम

हमने उच्च न्यायालय के स्टे संबंधी पूरे दस्तावेज अधिकारियों को दिखा दिए हैं। लेकिन बिना नोटिस दिए जो कार्यवाही की गई है वह उचित नहीं है। हम अपना जबाव कोर्ट में पेश करेंगे।

आरके सोनी, अभिभाषक, उच्च न्यायालय

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