Gwalior : जेएएच में दवाओं का टोटा, नहीं हो रहीं कई जांच
जेएएच में दवाओं का टोटा, नहीं हो रहीं कई जांचराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Gwalior : जेएएच में दवाओं का टोटा, नहीं हो रहीं कई जांच

जेएएच के दवा वितरण केन्द्र पर कई महत्वपूर्ण दवाएं खत्म हो चुकी हैं इसी की वजह से माधव डिस्पेंसरी में चलने वाली ओपीडी हो या फिर वार्डों में भर्ती मरीज उन्हें दवाएं तक नहीं मिल पा रही है।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य चिकित्सालय के अस्पतालों के हालात ऐसे हो गए हैं कि यहां पर उपचार के लिए आने वाले मरीजों को डॉक्टर्स का उपचार तो मिल रहा है, लेकिन उन्हें दवाई नहीं मिल पा रही है। जेएएच के दवा वितरण केन्द्र पर कई महत्वपूर्ण दवाएं खत्म हो चुकी हैं इसी की वजह से माधव डिस्पेंसरी में चलने वाली ओपीडी हो या फिर वार्डों में भर्ती मरीज उन्हें दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।

फिर चाहे वह बुखार में प्रयोग होने वाली पेरासिटामोल हो फिर ब्लड प्रेशर, खून को पतला करने वाली दवा हो या फिर अस्थमा के मरीजों के साथ ही खून बढ़ाने एवं पेट दर्द की दवा तक प्रबंधन के पास नहीं है इसी की वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है। शासन के नियमानुसार अस्पताल में आने वाले मरीजों को करीब 300 प्रकार की दवाएं मुफ्त में मिलनी चाहिए, लेकिन प्रबंधन के पास मरीजों के लिए 100 तरह की दवाएं भी नहीं हैं। प्रबंधन ने करीब 176 प्रकार की दवाओं को कुछ स्टॉक करके रखा है जिसकी वजह से पोर्टल पर दवा खत्म न हो, लेकिन यह दवाएं मरीजों को नहीं दी जा रही हैं।

इसी की वजह से डॉक्टरों को दिखाने के लिए बाद जब मरीज ओपीडी में घंटों लाइन में लगने के बाद जब उसका नंबर आता है तो विंडों पर बैठे कर्मचारी दवा नहीं होने की बात कहकर उन्हें लौटा रहे हैं। दूसरी ओर प्रबंधन के अधिकारी आर्डर किए जाने व दवाईयों की शार्टेज का रोना रोते नजर आते हैं। ऐसे में शासन की योजनाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है और मरीजों को मजबूरी में बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। हालांकि प्रबंधन के अधिकारियों को कुछ दवाएं लोकल पर्चेज से खरीदने का अधिकार हैं, लेकिन इसके बाद भी दवाओं की खरीदी नहीं की और मरीज परेशान हो रहे हैं। ओपीडी की बात की जाए तो जेएएच की ओपीडी में हर रोज दो हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं।

बाहर से टेस्ट कराने को मजबूर मरीज :

अंचल के सबसे बड़े अस्पताल में इन दिनों मरीज न केवल दवाएं बल्कि जांचों के लिए भी मरीज परेशान हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में बनी सीपीएल लैब में मरीजों की ब्लड शुगर, आरएफटी, एलफटी जैसी कई महत्सपूर्ण जांचे नहीं हो रही हैं जिसकी वजह से मरीजों को जांचे बाजार में करानी पड़ रही है। यह जांचे की भी बजट के अभाव में नहीं आ पा रही है, शासन द्वारा कॉलेज प्रबंधन को मशीनों की रीएजेंट नहीं उपलध कराए जा रहे हैं, जिसकी वजह से जांच नहीं हो पाई है। जांच किट नहीं होने का यह मुद्दा अभी हाल ही में संभागायुक्त आशीष सक्सेना की अध्यक्षता में हुई कॉलेज काउंसिल की बैठक में डॉक्टर यह मेंटर उठा चुके हैं।

इस संबंध में डॉक्टर देवेन्द्र कुशवाह पीआरओ जेएएच का कहना है कि यह बात सहीं है कि कई दवाएं खत्म हो चुकी हैं। बजट के अभाव में दवाएं कार्पोरेशन नहीं आ पा रही थी, हमने पहले ही ऑर्डर लगा दिए थे। अलग-अलग हेड बजट मिल गया है, जल्द दवाओं की शार्टेज समाप्त होगी।

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