ग्वालियर परिवहन विभाग परमिट चेक करता हुआ
ग्वालियर परिवहन विभाग परमिट चेक करता हुआRaj Express

Gwalior : हाईकोर्ट का आया फरमान तो सड़क पर आया परिवहन अमला

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : शहर में बिना परमिट ऑटो रिक्शा सड़को पर फर्राटे भर रहे है। ग्वालियर परिवहन अमले ने 10 ऑटो किए जब्त।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। कई विभाग ऐसे है जिनका जो काम है उसके हिसाब से काम नहीं कर पा रहे है तो ऐसे मामलों को लेकर हाईकोर्ट को निर्देश देने पड़ते है। प्रदेश में अधिकांश शहरों में बिना परमिट ऑटो रिक्शा सड़को पर फर्राटे भर रहे है, लेकिन उनके पास परमिट है कि नहीं इसको जांचने से संबंधित विभाग बचता दिख रहा है। इसी मामले में जब एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जब जबलपुर हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को आदेश दिया कि बिना परमिट ऑटो के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है। इस आदेश के बाद से एकाएक पूरे प्रदेश में परिवहन आयुक्त ने बिना परमिट ऑटो के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए जिसके तहत ग्वालियर में भी परिवहन अमला सड़को पर उतर आया और 10 ऑटो बिना परमिट के जब्त किए।

बगैर परमिट से ग्वालियर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में दौड़ाए जा रहे ऑटा रिक्शों का मामला एक बार फिर से हाईकोर्ट में पहुंचा था। ट्रेफिक व्यवस्था बिगाड़ रहे ऐसे ऑटो की समस्या को कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन से पूछा है कि प्रदेश भर में अब तक कितने ऐसे ऑटो को जब्त किया गया जो बिना परमिट के संचालित हो रहे हैं। इस सिलसिले में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 25 नवंबर तय की गई है। हाईकोर्ट का राज्य सरकार से जवाब मांगने के बाद से ही प्रदेश का परिवहन अमला सड़को पर उतर आया है, ताकि 25 नवंबर तक कार्यवाही कर वह हाईकोर्ट मेे पेश कर सके। हाईकोर्ट का आदेश आते ही परिवहन आयुक्त ने प्रदेश के सभी आरटीओ व डीटीओ को निर्देश जारी कर दिए कि वह तत्काल बिना परमिट सड़को पर दौड़ने वाले ऑटो के खिलाफ कार्यवाही करें।

ग्वालियर में आरटीओ एचके सिंह के निर्देशन में परिवहन निरीक्षक आरके सोनी, प्रवीण नाहर अपने अमले के साथ सड़को पर उतरे और ऑटो रोककर उनके दस्तावेज चैक करने का काम किया। इस दौरान परिवहन विभाग ने करीब 75 ऑटो चैक किए जिनमें से 10 ऑटो के पास परमिट नहीं था, जिन्हें जब्त कर पुलिस थाने में खड़ा करवा दिया है। परिवहन विभाग की इस कार्यवाही के बाद अचानक ऑटो चालकों में हड़कंप मच गया और अधिकांश ऑटो सड़को से गायब हो गए ताकि वह पकड़ में न आ सके। वैसे परिवहन विभाग ने यह व्यवस्था कर रखी है कि जिनके पास परमिट नहीं है वह आरटीओ कार्यालय में आवेदन कर तत्काल परमिट बनवा ले, जिससे वह कार्यवाही से बच सकेगें, लेकिन परमिट बनवाने में आने वाले करीब 3 हजार रुपए के खर्चे को देखते हुए अधिकांश ऑटो चालक परमिट बनवाने से बचते है और अभी भी काफी कम संख्या में परमिट के लिए आवेदन आरटीओ कार्यालय आएं है।

उल्लेखनीय है कि बगैर परमिट के ऑटो के मामले को लेकर हाईकोर्ट जबलपुर में सुनवाई हुई थी। इस दौरान राज्य शासन की ओर से पूर्व निर्देश के पालन में रिपोर्ट पेश की गई। हाई कोर्ट ने इस रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेने के साथ असंतोष जताया। इस मामले की सुनवाई के दौरान यह जमीनी सच्चाई रेखांकित की गई कि बिना परमिट के चल रहे हजारों ऑटो को मामूली जुमार्ना लगाकर छोड़ दिया जाता है। हाई कोर्ट ने पाया कि 30 सितंबर 2019 को राज्य शासन ने अभिवचन दिया था कि बिना परमिट चल रहे ऑटो को तुरंत जब्त कर छोड़ा नहीं जाएगा। यही नहीं ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन रिपोर्ट में इस मामले में कोई ठोस जानकारी नहीं है।

2013 में लगाई गई थी जनहित याचिका :

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में जबलपुर के अधिवक्ता सतीश वर्मा ने प्रदेश भर में बेलगाम और नियम विरुद्ध ऑटो संचालन को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। इसी मुद्दे को लेकर कुछ अन्य याचिकाएं भी संलग्न हुईं। पूर्व में हाईकोर्ट ने कई बार दिशा निर्देश जारी किए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सतीश वर्मा ने कहा कि सरकार कागजी रिपोर्ट पेश कर गुमराह कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क पर वास्तविक स्थिति कुछ और है। ऑटो चालक ओवर लोडिंग सहित सारे नियम तोड़ रहे हैं। ऑटो में ड्राइवर सीट पर चार सवारी और पीछे 15 सवारी तक बैठा कर ले जा रहे हैं, जबकि एक बार में महज तीन सवारी ले जाने का नियम है।

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