Gwalior : जब पुलिस पहुंची हॉस्टल तो छतों से भागते हुए दिखे जूनियर डॉक्टर

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : पुलिस ने हॉस्टल में घुसकर जूनियर डॉक्टरों को किया संट। सुबह 3 बजे ही बड़ी संख्या में पहुंची पुलिस।
जूनियर डॉक्टरों के हॉस्टल पर पुलिस का धावा
जूनियर डॉक्टरों के हॉस्टल पर पुलिस का धावाRaj Express

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। पुलिस के साथ अभद्रता करना जूनियर डॉक्टरों को भारी पड़ गया। रात में जहां जूनियर डॉक्टरों ने पुलिस से मारपीट व अभद्रता की, वहीं सुबह होने से पहले ही बड़ी संख्यां में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस के जवान न केवल हॉस्टल के अंदर गए, बल्कि जो भी जूनियर डॉक्टर जवानों के हाथ लगा। उसके साथ पुलिस के जवान सख्ती से पेश आए और उनकी जमकर ठुकाई की। इस दौरान जूनियर डॉक्टर बचने के लिए हॉस्टल की छतों पर भागते हुए नजर आए।

मंगलवार व बुधवार की मध्य रात के 2 बजे से शुरू हुआ विवाद बुधवार की शाम जाकर खत्म हुआ। असल में रात में सीनियर रेसीडेंट विश्वेश शर्मा रात में पुलिस की तलाश की वजह से भागकर रविशंकर शुक्ल हॉस्टल पहुंच गया। जहां पर डॉक्टर शर्मा के साथ दे रहे जूनियर डॉक्टरों ने जमकर पुलिस के साथ अभद्रता की। सिर्फ अभद्रता करने के बाद भी जूनियर डॉक्टर रुके नहीं, उन्होंने सीएसपी का मोबाइल तोड़ दिया। साथ ही जूनियर डॉक्टर गनर को घसीटते हुए हॉस्टल के अंदर ले जाने का प्रयास कर रहे थे। सीएसपी की कार को लॉक कर उसमें रखा हुआ वायरलेस सेट गायब कर दिया, मोबाइल तोड़ दिया और गाड़ी को लॉक कर दिया। इस मामले को जब रात में सीनियर रेसीडेंट डॉक्टर शर्मा के पक्ष में आकर जूनियर डॉक्टरों ने अंजाम दिया तो पुलिस भी सुबह होने से पहले अपने असली रूप में आ गई। बड़ी संख्यां में एकजुट हुए पुलिस के जवान हॉस्टल में घुसे और जूनियर डॉक्टरों के साथ लाठियां भांजना शुरू कर दी। नतीजतन कुछ जूनियर डॉक्टरों के शरीर पर लाठियों के निशान भी नजर आए।

तीन साल तक नप सकते हैं डॉक्टर :

आईपीएस व उनके गनर पर हमला करने वाले जूनियर डॉक्टर तीन साल तक नप सकते है। पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ 147, 148, 149 की धारा के तहत बलवा और शासकीय कार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। जिसमें दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों को दो से तीन साल की सजा हो सकती है। पुलिस बलवे में शामिल अन्य डॉक्टरों की पहचान करने में पुलिस जुट गई है।

जूडा और पुलिस रही आमने सामने :

जीआरएमसी के रविशंकर हॉस्टल में रह रहे जूनियर डॉक्टर और पुलिस अफसरों के बीच छह घंटे तक कटोराताल पर तनातनी चलती रहीं। पूरे इलाके को छावनी बना दिया गया, इसके बाद यह इलाका तनाव में रहा, हालांकि ऐसी कोइ घटना नहीं हुई, फिलहाल मेडिकल कॉलेज के 10 जूनियर डॉक्टरों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। साथ ही उन्हें देर शाम नोटिस पर छोड़ा गया।

दहशत में आए लोग :

जिस तरह पुलिस की संख्या और अफसरों के पहुंचने पर पूरे इलाके में पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी। पुलिस हॉस्टल की सर्चिंग कर रही थी। यह सब देख आस-पास रहने वाले लोग दहशत में थे, क्योंंकि तनाव बढ़ने पर स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई थी।

मैं भी डॉक्टर हूं, लेकिन ऐसी अभद्रता :

आईपीएस ऋषिकेश मीणा खुद भी एमबीबीएस डॉक्टर है। जब हॉस्टल में उन्होंने जूनियर डॉक्टरों की अभद्रता देखी तो उन्होंने बताया कि वह खुद भी डॉक्टर हैं। लेकिन इस प्रकार की अभद्रता उन्होंने डॉक्टरों द्वारा कभी नहीं देखी।

शहर में व्हीव्हीआईपीए मूवमेंट, नहीं तो :

15 सितम्बर को शहर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। साथ ही पीएम मोदी की ट्रांजिट विजिट संभावित है। एसपीजी और जेट प्लस सिक्योरिटी ने शहर में डेरा डाल रखा है। जिसके चलते शहर हाई अलर्ट पर है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों द्वारा इस प्रकार का विवाद पैदा करना पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। चूंकि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का पूरा ध्यान शहर में होने वाले कार्यक्रमों पर है। इसलिए पुलिस विवाद को ज्यादा तूल देना नहीं चाहती है। जिसके चलते फिलहाल पुलिस ने इस मामले को शांत कर दिया है।

इनका कहना है :

सीनियर रेसीडेंट रात में सड़क पर गाड़ी में बैठकर शराब पी रहे थे। मैं गश्त पर था और मैंने डॉक्टर की गाड़ी पर दस्तक देकर पूछा कि यहां क्यों बैठे हो। इतना बोलते ही वह गाड़ी लेकर हॉस्टल में चला गया। वहां पहुंचे तो जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता की।

ऋषिकेश मीणा, सीएसपी, मुरार

जो घटना हुई है उसके संवाद के बाद सुलझा लिया गया है। हमने एसएसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों से चर्चा करके सभी छात्रों को लॉकअप से छुड़ा लिया है। आगे इस तरह की घटनाएं न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

डॉ. अक्षय निगम, डीन, जीआरएमसी

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