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हटवारा व नंबर 2 स्कूल में आत्महत्या निषेध कार्यक्रम संपन्न
हटवारा व नंबर 2 स्कूल में आत्महत्या निषेध कार्यक्रम संपन्न|Pankaj Yadav
मध्य प्रदेश

छतरपुर: हटवारा व नंबर 2 स्कूल में आत्महत्या निषेध कार्यक्रम संपन्न

छतरपुर, मध्य प्रदेश: हटवारा हायर सेकेंडरी एवं क्रमांक 2 हायर सेकेंडरी स्कूलों में आत्महत्या निषेध कार्यक्रम का संचालन हुआ। कार्यक्रम में 300 छात्र छात्राएं शामिल हुए और अपनी कमजोरियों को सांझा किया।

Pankaj Yadav

हाइलाइट्स :

  • हटवारा हायर सेकेंडरी एवं क्रमांक 2 हायर सेकेंडरी स्कूलों में आत्महत्या निषेध कार्यक्रम का संचालन

  • इस कार्यक्रम में 300 छात्र छात्राएं हुए सम्मिलित

  • कार्यक्रम में सभी ने अपनी अपनी कमजोरियों को सांझा किया

  • छात्र छात्राओं को रोजाना कम से कम 20 मिनट एकांत में शांत बैठने की दी सलाह

राज एक्सप्रेस। छतरपुर में मंगलवार को शहर के हटवारा हायर सेकेंडरी एवं क्रमांक 2 हायर सेकेंडरी स्कूलों में मास्टर ट्रेनर अध्यात्म लखनलाल असाटी ने आत्महत्या निषेध कार्यक्रम के अंतर्गत सत्रों का संचालन किया, जिसमें लगभग 300 छात्र छात्राएं सम्मिलित हुए। तनाव और अवसाद से बचने के लिए ध्यान, योग, संगीत, अल्पविराम को सभी ने उपयोगी माना हटवारा स्कूल प्राचार्य हरि शंकर दीक्षित भी कार्यक्रम में सम्मिलित रहे।

अपना-अपना अनुभव सांझा किया :

स्कूल की छात्रा मानसी गोस्वामी, साहिल नाहर, गोविंद दास कुशवाहा, अकरम, पुष्पेंद्र नामदेव, आकला खातून, तना खातून, खुशबू राजपूत, पूजा कुशवाहा, स्नेहा श्रीवास आदि ने शांत समय लेने के बाद अपनी अपनी कमजोरियों को साझा किया। किसी को गुस्सा, किसी को ज्यादा बोलने की आदत, किसी के मन की अस्थिरता, किसी को जल्दी बुरा लग जाना, किसी की याददाश्त कमजोर होना, किसी को जल्दी रोना, तो किसी को आलस अपनी कमजोरी लगा।

प्रशिक्षण के दौरान बताया :

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि, जितना अधिक वह खुद की संपर्क में रहेंगे उतना अधिक उनमें सुधार की गुंजाइश होगी, क्योंकि गलतियों को स्वीकार कर लेने के बाद ही सुधार का मार्ग प्रशस्त होता है। छात्र छात्राओं से आग्रह किया गया कि, वह रोजाना कम से कम 20 मिनट एकांत में शांत बैठे जो उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए।

इष्ट का करें स्मरण :

प्रेरणा प्राप्त करने के लिए वह अपने इष्ट का स्मरण करें, फिर दिन भर के कार्यक्रमों को तय करें और पिछले दिन के कामों में सुधार की गुंजाइश पर भी विचार करें इंद्रियों और मन से संचालित होने के स्थान पर अधिक से अधिक बुद्धि और आत्मा से संचालित होने का अभ्यास करें। एक परीक्षा परिणाम पूरी जिंदगी का निर्धारण नहीं कर सकता है। जिंदगी में लगातार अवसर आते हैं, जिन का सदुपयोग कर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।