मनमानी से होती है हैवी ब्लास्टिंग, मुहेर में मकान गिरने का भी खतरा
मनमानी से होती है हैवी ब्लास्टिंग, मुहेर में मकान गिरने का भी खतराप्रेम एन गुप्ता

मनमानी से होती है हैवी ब्लास्टिंग, मुहेर में मकान गिरने का भी खतरा

सिंगरौली। गोरबी समय तय होने के बावजूद इसके पहले या बाद में भी कम्पनियों की ओर से मनमाने तरीके से होने वाली ब्लास्टिंग मुहेर के लोगों के लिए मुसीबत साबित हो रही है।

सिंगरौली। गोरबी समय तय होने के बावजूद इसके पहले या बाद में भी कम्पनियों की ओर से मनमाने तरीके से होने वाली ब्लास्टिंग मुहेर के लोगों के लिए मुसीबत साबित हो रही है। मनमानी का आलम यह है कि कम्पनियां कभी-कभी तो रात को भी ब्लास्टिंग करने से नहीं चूक रही। इस प्रकार मनमानी ब्लास्टिंग इस गांव के अधिकतर निर्धन लोगों की जान व माल दोनों के लिए खतरा बनी हुई है। कहा जा सकता है कि ऐसे हालात में इस गांव के लोग हर समय दहशत में जी रहे हैं और मानक से अधिक हेवी ब्लास्टिंग का असर वहां घर की दीवारों पर साफ देखा जा सकता है।

जिला मुख्यालय से सटे गांव मुहेर के चारों तरफ अलग कम्पनियों की ओर से कोयले के लिए खदानों में दिन में कई बार ब्लास्टिंग की जाती है। हालांकि कम्पनियों के लिए ब्लास्टिंग करने का समय तय है मगर शिकायत है कि कम्पनियों के स्तर पर इस काम में समय के नियम की पालना नहीं की जा रही। बताया गया कि ब्लास्टिंग के लिए दोपहर में एक से दो बजे तथा शाम को पांच से छह बजे तक का समय तय है। मगर शिकायत है कि गांव के बाहर स्थित अपनी खदानों में गोरबी बी ब्लाक की कम्पनी एनसीएल सहित रिलायंस व अन्य कम्पनियों की ओर से तय समय के अलावा भी ब्लास्टिंग की जाती रही है और अब भी ऐसा चल रहा है।

नियमानुसार इन खदानों में ब्लास्टिंग के स्तर का भी पैमाना निश्चित है मगर ग्रामीणों की शिकायत है कि एक ही बार में अधिकतम कोयले के लिए कम्पनियों की ओर से इस नियम की अनदेखी की जा रही है। इस प्रकार हर कम्पनी की ओर से हेवी ब्लास्टिंग करने का खे भी किया जा रहा है। शिकायत है कि कई बार तो कम्पनियां रात को भी ब्लास्टिंग करने से नहीं चूकती। ऐसी हालत में ग्रामीण लोगों को रात को भी खतरे का अनुमान होने पर बचाव के लिए घरों से बाहर भागना पड़ता है। जबकि रात को ब्लास्टिंग नहीं किया जाना भी नियम में शामिल बताया गया।

मुहेर के ग्रामीणों की शिकायत है कि दिन में दो तीन बार रोज कम्पनियों की ओर से बहुत हेवी ब्लास्टिंग की जाती है। इस कारण वहां अधिकतर कच्चे व पक्के मकानों की दीवारों में दरारें आ गई है और हर बार होने वाली हेवी ब्लास्टिंग के कारण क्षतिग्रस्त हो गए काफी मकानों के ढह जाने का डर सताता रहता है।

शिकायत है कि कुछ कम्पनियां तो खनन करते हुए आबादी क्षेत्र के बहुत निकट तक आ गई हैं। इसलिए उसके आसपास के लोगों व उनके आवास ब्लास्टिंग से होने वाले किसी भी नुकसान के सबसे अधिक जोखिम में हैं। बताया गया कि हर बार की हेवी ब्लास्टिंग के समय जान बचाने के लिए मुहेर के लोगों को फुर्ती के साथ घर से बाहर खुली जगह पर भागना पड़ता है। इस प्रकार गांव के अधिकतर लोग हर समय खतरे के साए में जी रहे हैं।

इससे परेशान मुहेर निवासी सोनू जायसवाल, हीरामणि कहार, प्रदीप जायसवाल, अशोक खैरवार व अन्य ने ब्लास्टिंग को लेकर कम्पनियों के लिए तय नियमों की कड़ाई से पालना कराए जाने की मांग की है ताकि आबादी और लोगों के आशियाने दोनों को खतरा कम हो सके। उल्लेखनीय है कि मुहेर में अधिकतर आदिवासी व अनुसूचित जाति की आबादी ही निवास करती है जो हेवी ब्लास्टिंग के साथ ही कई अन्य परेशानी का सामना कर रही है।

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