कोरोना संबंधी मामलों की संयुक्त सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
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कोरोना संबंधी मामलों की संयुक्त सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कोरोना को लेकर दायर मामलों की संयुक्त सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि कोरोना की रोकथाम सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, इसके लिये लोगों को भी जागरूकता दिखानी होगी।

जबलपुर, मध्य प्रदेश। कोरोना को लेकर दायर मामलों की संयुक्त सुनवाई करते हुए बुधवार को हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि कोरोना की रोकथाम सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, इसके लिये लोगों को भी जागरूकता दिखानी होगी। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने विगत दिनो अधिकारिक तौर पर किये गये टूर के दौरान व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग मॉक्स तक नहीं पहने हुए थे। युगलपीठ ने आयुष्मान योजना के संबंध में पेश की गई रिपोर्ट की प्रति संबंधित पक्षकारों को देने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को निर्धारित की है, हालांकि विस्तृत आदेश फिलहाल प्रतीक्षित है।

गौरतलब है कि प्रदेश के शाजापुर जिले स्थित एक निजी अस्पताल के प्रबंधन के बिल की राशि का भुगतान नहीं होने पर वृद्ध मरीज को बेड से बांधकर रखे होने सहित कोरोना को लेकर करीब आधा दर्जन से ज्यादा दायर याचिकाओं पर न्यायालय ने संयुक्त रूप से सुनवाई के निर्देश दिये थे। शाजापुर मामले के संबंध में अखबारों में फोटो सहित समाचार प्रकाशित हुए थे। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्टार जनरल ने 11 जून को मप्र हाईकोर्ट को पत्र लिखा था। जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल डॉ. अश्वनी कुमार द्वारा उक्त घटना का उल्लेख करते हुए सर्वोच्च न्यायालय को 8 जुलाई को एक पत्र लिखा था। जिसमें उक्त घटना को मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भेजे गय पत्र की सुनवाई युगलपीठ द्वारा जनहित याचिका के रूप में करते हुए प्रदेश सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे। मामले की पूर्व सुनवाई पर न्यायालय को बताया गया था कि उक्त अस्पताल को सीज करते हुए लायसेंस निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है और मानव अधिकार आयोग को भी स्थिति से अवगत कराया गया है।

मामले में न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ को कोर्ट मित्र नियुक्त करते हुए आर्थिक रूप से असक्षम लोगों के लिए प्राईवेट हॉस्पिटल में निशुल्क मेडिकल सुविधा तथा उपचार के लिए गाइड लाईन निर्धारित करने सुझाव पेश करने के निर्देश दिये थे। मामलो की पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने युगलपीठ को बताया था कि प्रदेश में दो करोड़ लोग आयुष्मान योजना के तहत पात्र है। वर्तमान में सिर्फ 25 प्रतिशत लोगों के पास आयुष्मान योजना का कार्ड है। आयुष्मान योजना का कार्ड होने से असक्षम व्यक्ति पांच लाख रूपये तक का उपचार योजना के तहत निर्धारित अस्पताल में करवा सकता है। इसके अलावा योजना में अधिक से अधिक निजी अस्पतालों को शामिल किया जाये। युगलपीठ ने इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा था। मामलों में बुधवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने लोगों द्वारा बरती जा रही लापरवाही पर नराजगी व्यक्त करते हुए उक्त तल्ख टिप्पणी की। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के तौर पर वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने पैरवी की।

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