Hoshangabad : बैंक लोन से परेशान हूं, परिवार सहित आत्महत्या कर लूंगा
पीड़ित व्यक्तिPrafulla Tiwari

Hoshangabad : बैंक लोन से परेशान हूं, परिवार सहित आत्महत्या कर लूंगा

होशंगाबाद, मध्यप्रदेश: पीड़ित ने कहा - बेटा बेरोजगार, पेंशन से गुजारा, बैंक घर नीलाम करने पर उतारु, परिवार सहित आत्महत्या कर लूंगा। एसबीआई एसपीएम शाखा से लिया था लोन, लॉकडाउन में नहीं कर पाए किश्त जमा।

होशंगाबाद, मध्यप्रदेश। बेटा सिविल कांट्रेक्टर है। मकान निर्माण में उपयोग होने वाली सेंटिंग खरीदने के लिए उसने एसपीएम स्थित एसबीआई शाखा से 20 लाख रुपए का लोन लिया था। सिक्योरिटी मेरे मकान की लगाई थी। अब तक वह 24 लाख रुपए जमा भी कर चुका है। लॉकडाऊन की वजह से बेटे का बिजनेस तबाह हो गया है। कई जगह उसका पेमेंट अटका हुआ है। जो नहीं मिल रहा। वह पूरी तरह से बेरोजगार हो गया है। मेरी सरकारी नौकरी थी, मेरी पेंशन पर पूरे परिवार का गुजारा चल रहा है। बैंक हर छोटे-बड़े अधिकारी से दो साल से बोल रहा हूं। बैंक किस्त चुकाने को तैयार हूं बस मेरे बजट के अनुसार मेरी किश्त बना दो। लेकिन बैंक अधिकारी मेरी सुनने को राजी नहीं हैं और मेरा घर नीलाम करने को उतारु हैं। मैं मानसिक रुप से प्रताड़ित हो चुका हूं पूरा परिवार भय में है ऐसा ही चलता रहा तो पूरे परिवार सहित आत्म-हत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। यह कहना है शिव कालोनी निवासी महेश कुमार वैरागी का। उनका कहना है बेटे अभिषेक वैष्णव ने यह लोन लिया था।

तत्कालीन शाखा प्रबंधक है फरार :

विदित रहे तत्कालीन प्रबंधक सिसोदिया के कार्यकाल का यह मामला है। वहीं श्री सिसोदिया ने किसान क्रेडिट कार्ड में फर्जी लोन देने का मामला सामने आया था। जांच के बाद श्री सिसोदिया पर एफआईआर दर्ज हुई थी। तब से ही वह फरार हैं। बताया जाता है कि श्री सिसोदिया ने भोपाल में एक मेडिकल स्टोर खोला है। जहां वह उसे संचालित करते हैं।

50 हजार की किश्त है और मेरी पेंशन 26 हजार :

महेश कुमार का कहना है कि बैंक से जब बेटे ने लोन लिया था। तब मासिक किश्त 50 हजार रुपए बनाई गई थी। बेटे ने पूरी किश्तें इमानदारी से भरते हुए मार्च 2019 तब 24 लाख रुपए जमा किए। जबकि लोन 20 लाख रुपए का ही है। इससे साफ जाहिर है हम लोन चुकाना चाहते हैं। लेकिन मार्च 2019 से लॉक डाऊन लगा और बेटे का पूरा व्यापार तबाह हो गया। वह बेरोजगार हो गया। मैं अपनी पेंशन से किश्त चुकाना चाहता हूं। बैंक से दो साल से मांग कर रहा हूं की मेरी पेंशन के हिसाब से मेरी किश्त बांध दी जाए और अपना पैसा वसूल कर लिया जाए। बावजूद इसके बैंक हमारी नहीं सुन रही है और चेक बाऊंस कराकर बेटे पर प्रकरण दर्ज करा दिया है। कोर्ट में मामला चल रहा है। पीड़ित ने स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है।

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