भाजपा में डैमेज नहीं तो पूर्व मंत्रियों को साधने का काम क्यों
भाजपा में डैमेज नहीं तो पूर्व मंत्रियों को साधने का काम क्यों|Social Media
मध्य प्रदेश

भाजपा में डैमेज नहीं तो पूर्व मंत्रियों को साधने का काम क्यों

ग्वालियर, मध्यप्रदेश: भाजपा ने 22 विधायकों को अपने मिला कर प्रदेश में सरकार तो बना ली पर अपनों के नाराज़ होने का डर भी सता रहा है, इसलिए अंचल में डैमेज कंट्रोल करने के लिए नरोत्तम मिश्रा सक्रिय हैं।

राज एक्सप्रेस

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ग्वालियर, मध्यप्रदेश। प्रदेश में सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के भाजपा में आने के बाद सत्ता तो भाजपा को मिल गई, लेकिन अब अपनों के नाराज होने का डर भी सताने लगा है। यही कारण है कि डैमेज कंट्रोल करने के लिए भाजपा अभी से सक्रिय हो गई है जबकि अभी उप चुनाव की घोषणा भी नहीं हुई है। इस लिहाज से भाजपा ने उप चुनाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन कांग्रेस अभी सिर्फ प्रत्याशियों की खोज में ही लगी हुई है। अंचल में मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी संभाली हुई है और वह भाजपा के पूर्व मंत्रियों के घर जाकर उनसे मुलाकात भी कर चुके हैं। अब भाजपा भले ही कहे कि जब डैमेज ही नहीं है तो कंट्रोल किसका, लेकिन सच्चाई कुछ अलग ही है।

ग्वालियर-चंबल संभाग में सिंधिया समर्थक 15 विधायकों के इस्तीफा दिए जाने के कारण उप चुनाव होना है जिसमें एक सीट जौरा की अलग है जहां विधायक बनवारीलाल शर्मा के निधन से खाली हुई है। अब 15 सीट ऐसी है जहां सिंधिया के साथ भाजपा में आएं पूर्व विधायको को ही भाजपा मैदान मेें उतारेगी, ऐसे में वहां से जो भाजपा के दावेदार रहे हैं, उनका नाराज होना स्वाभाविक है। नाराजगी को भाजपा ने भांप लिया है इसलिए उसने अभी से कंट्रोल करने का काम शुरू कर दिया है। ग्वालियर-चंबल संभाग में डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार केवल कद्दावर मंत्री नरोत्तम मिश्रा संभाले हुए है और वह ग्वालियर में आकर पहले दौर में जहां भाजपा के पूर्व मंत्रियों जयभान सिंह पवैया, अनूप मिश्रा, माया सिंह एवं नारायण सिंह कुशवाह से चर्चा कर चुके है और दूसरे चक्कर में वह सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल एवं डबरा में पूर्व मंत्री इमरती देवी से मिल चुके है। इस मुलाकात के पीछे मकसद यह था ताकि सिंधिया समर्थक भाजपा के रंग में पूरी तरह से रंग जाएं ओर कार्यकर्ता भी उनको अपनाने का काम कर ले। नरोत्तम इस काम में कुछ हद तक सफल दिखाई दिए हैं, क्योंकि उनके दौरे के बाद से ही पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह एवं पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल के कार्यक्रमों में भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शिरकत करने के लिए पहुंचने लगे हैं। सूत्र का कहना है कि सिंधिया समर्थक नेताओं से नरोत्तम ने साफ कह दिया है कि वह भाजपा कार्यकर्ताओ को अपनाने का काम करें, क्योंकि भाजपा में व्यक्ति नहीं बल्कि कार्यकर्ता काम करते है। प्रदेश सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा की बात को सिंधिया समर्थक समझ गए और उनके बताएं रास्ते को भी तत्काल पकड़ लिया।

भाजपा नेताओं को मनाने का काम तो किया पर क्या वह मानेगें ?

अंचल में जिन विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होना है वहां भाजपा सिंधिया के साथ आने वालों को ही टिकट लगभग देगी। ऐसी स्थिति में उन क्षेत्रो में सक्रिय रहने वाले भाजपा नेता एवं दावेदारों का नाराज होना स्वाभाविक है, क्योंकि उनको सिंधिया समर्थकों के आने के बाद से अपने राजनीतिक गतिरोध का खतरा बढ़ गया है इसलिए उप चुनाव में वह गड़बड़ कर सकते हैं। इस बात का भान भाजपा प्रदेश नेतृत्व को भी है, यही कारण है कि मंत्री नरोत्तम मिश्रा का ऐसे भाजपा नेताओं को कंट्रोल करने की जिम्मेदारी दी है। अब नरोत्तम मिश्रा जो भी जिम्मेदारी मिलती है उसको तहेदिल ने निभाने का काम करते है और इसमें फिलहाल वह सफल दिखाई भी दे रहे हैं। अब सवाल यह है कि जिन भाजपा के पूर्व मंत्रियों के आवास पर मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहुंचे और उनसे बात की तो क्या वह मान जाएंगे? इसको लेकर अभी कई तरह की अटकले चल रही है। रविवार को भी मंत्री नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर आएं ओर पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य के निवास पर उनसे मुलाकात करने के लिए पहुंचे है। लाल सिंह आर्य गोहद विधानसभा से पिछला चुनाव हार गए थे, लेकिन अब कांग्रेस से भाजपा में आएं रणवीर जाटव भाजपा से उम्मीदार होगें ऐसे में आर्य नाराज बताएं जा रहे हैं।

भाजपा के नाराज नेताओ पर कांग्रेस की निगाह :

सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस अब उप चुनाव में हिसाब बराबर करने के लिए अपनी रणनीति बनाने में लगी हुई है। उप चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन के लिए कमलनाथ सर्वे करा रहे है। इसके साथ ही कांग्रेस की निगाह भाजपा से नाराज नेताओं पर भी टिकी हुई है। कांग्रेस सूत्र का कहना है कि अंचल में भाजपा के कई नाराज नेता ऐसे है जो उनके संपर्क में है। कांग्रेस की इसी बात से भाजपा के काम खड़े हो गए हैं और वह अपने घर की नाराजगी को दूर करने में अभी से लग गई है।

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