शहडोल : जनता के हितैषी हैं तो, छोड़े शासन से मिलने वाला वेतन

शहडोल, मध्य प्रदेश : पूर्व नौकरशाह ने इस्तीफा देने वाले विधायकों पर खड़े किये सवाल। उपचुनाव में एक बार फिर जनता की जेब पर पड़ेगा भार।
शहडोल : जनता के हितैषी हैं तो, छोड़े शासन से मिलने वाला वेतन
जनता के हितैषी हैं तो, छोड़े शासन से मिलने वाला वेतनAfsar Khan

शहडोल, मध्य प्रदेश। 31 मार्च को संभाग में अपनी सेवाएं कमिश्नर के तौर पर देते हुए सेवानिवृत्त हुए 2002 बैच के आईएएस अधिकारी आर.बी. प्रजापति ने उपचुनाव के ऐलान के साथ ही कोरोना काल में विधानसभा से इस्तीफा देने वाले विधायकों पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि चुनाव होने से जनता पर सीधा बोझ पड़ेगा, प्रदेश में 25 सीटें ऐसी जहां पर इस्तीफे के बाद चुनाव होने हैं, 2 सदस्य की मृत्यु होने के चलते उपचुनाव होंगे, मतदान 3 नवम्बर को होगा और जिसके परिणाम 10 नवम्बर को आयेंगे। 25 सदस्यों ने विधासभा से इस्तीफा दे दिया, जिसके चलते उपचुनाव की नौबत सूबे में आ खड़ी है, आर.बी. प्रजापति ने बताया कि अगर यह विधायक इस्तीफा नहीं देते तो, चुनाव की नौबत नहीं आती, अगर वह सही मायने में जनता के हितैषी हैं तो हर माह शासन से मिलने वाले वेतन नहीं लेना चाहिए।

जनता पर पड़ेगा बोझ :

शासन के द्वारा चुनावी तैयारियों के साथ ही चुनाव संपन्न कराने में करोड़ो रूपये खर्च होते हैं, वहीं राजनैतिक दल भी अपने प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने से लेकर सभी गतिविधियों में लाखों रूपये खर्च करती है, यह पैसा जनता की जेब से टैक्स के तौर पर जाता है। कोरोना ने सारी व्यवस्थाएं ही चौपट कर रखी है, उपचुनाव होने से जनता पर एक बार फिर टैक्स का दबाव बढ़ेगा, जिसकी मार आमजनों के जेब पर पड़ेगी। यह बात जनता भी जानती है, आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा।

इस्तीफा देने वाले उठाये चुनाव का खर्चा :

आर.बी. प्रजापति का कहना है कि अगर जनता के हितों को ध्यान में रखकर और उनके लिए 25 विधायकों ने इस्तीफा दिया है, साथ ही उन्हें क्षेत्र और जनता के विकास की चिंता है तो, इन विधायकों को चुनाव में खर्च होने वाली राशि को भी वहन करना चाहिए, तभी तो वह सच्चे जनसेवक हो सकते हैं। सुख-सुविधाओं के साथ विधायकों को वेतन भी मिलता है, इसका भी त्याग होना चाहिए।

जीतेंगे तो, छोड़ेंगे वेतन :

पूर्व नौकरशाह ने इन 25 इस्तीफा देने वाले विधायकों से सवाल किया है कि अगर उन्होंने किसी लालच से इस्तीफा नहीं दिया है, केवल जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास के लिए ऐसा किया है तो, हर माह एक विधायक को वेतन के तौर पर 30 हजार रूपये मिलता है, जो कि साल में 10 लाख 80 हजार रूपये होता है, 25 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दिया है, कुल यह राशि शेष बचे हुए 36 माहो में करोड़ों रूपये की राशि जनता के लिए छोड़ देनी चाहिए, केवल भत्ते जिनमें कम्प्यूटर ऑपरेटर सहित अन्य जनता से जुड़े कार्य होते हैं, वह लेनी चाहिए, तब तो वह जनता के सही मायनों में हितैषी होंगे।

केवल भत्ता लेकर करेंगे सेवा :

मूलत: छतरपुर के रहने वाले पूर्व नौकरशाह आर.बी. प्रजापति टीकमगढ़, पन्ना, सीधी, भिण्ड, गुना, दतिया, खरगौन, बड़वानी, शिवपुर, विदिशा, खण्डवा, बुरहानपुर, शिवपुरी, शिवनी में एसडीएम रह चुके हैं, 5 जिलों में सीईओ जिला पंचायत का कार्यकाल पूरा करने के बाद अशोक नगर में कलेक्टर, उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त डायरेक्टर, श्रम, स्वास्थ्य और वन विभाग में अतिरिक्त सचिव के अलावा चंबल संभाग में अतिरिक्त कमिश्नर रहने के साथ ही फूड कमीशन के सदस्य-सचिव भी थे, शहडोल संभाग में उन्होंने संभागायुक्त के तौर पर कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त हुए, इतना ही नहीं महराजा कालेज छतरपुर में राज्य प्रशासनिक सेवा में आने से पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है, उन्होंने ने बताया कि जिन जिलो की विधानसभा सीटों में चुनाव होने हैं, वहां से उपचुनाव में मैदान में उतरेंगे और जीतने के बाद केवल भत्ते से ही क्षेत्र की सेवा करेंगे।

इनका कहना है :

जनता भी जानती है कि चुनाव का बोझ उसी के सर पर पड़ने वाला है, जिन लोगों ने इस्तीफे दिये, जिनके चलते उपचुनाव हो रहे हैं, उन्हें जीतने के बाद वेतन नहीं लेना चाहिए और चुनाव का खर्चा भी वहन करना चाहिए, जिन जिलों की विधानसभा सीटों में चुनाव होने है, जहां पर उन्होंने सेवाएं दी हैं, उनमें से किसी सीट से चुनाव लड़ेंगे और जनता की सेवा के लिए वेतन शासन से नहीं लेगें, केवल भत्ते लेंगे, जो कि जनता के काम से जुड़े होंगे।

आर.बी. प्रजापति, पूर्व कमिश्नर, शहडोल

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