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कलेक्‍ट्रेट परिसर और दुकानों के सामने नाले का पानी
कलेक्‍ट्रेट परिसर और दुकानों के सामने नाले का पानी |Priyanka Sahu -RE
मध्य प्रदेश

भिण्ड: अपव्यय के मामले में नगर पालिका का कोई तोड़ नहीं

भिण्ड : कलेक्‍ट्रेट परिसर के सामने और दुकानों के सामने नाले का पानी भर जाता है, इस पर न तो नगर पालिका के पार्षदों का ध्यान गया और न ही जिला प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान दिया है।

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

हाइलाइट्स :

  • बरसात के बाद नाले का पानी ओवरफ्लो होकर कलेक्‍ट्रेट व दुकानों के सामने भरने लगा।

  • नगरपालिका 4 महीने में 3 लाख 20 हजार रूपये कर चुकी खर्च।

  • इस राशि का उपयोग स्थायी पानी निकास व नाला बनाने में होता, तो ये संकट नहीं होता।

  • नाले का पानी निकालने के लिए प्रतिदिन नगर पालिका के कर्मचारी दमकल लेकर आते हैं।

राज एक्‍सप्रेस। कलेक्‍ट्रेट परिसर के सामने नाले के पास, नाले का पानी भर जाता है, प्रतिदिन नगर पालिका का अमला दमकल लेकर आता हैं और पानी को खींचकर रिलायंस पैट्रोल पंप से सटे हुए नाले में डालता है। ये कार्य प्रतिदिन नगर पालिका के तीन कर्मचारी और दमकल (पानी निकालने वाला यंत्र) करते हैं।

नगरपालिका ने किया ये उपक्रम :

पानी खींचने के उपयोग में लिये दमकल में लगभग 500 रुपए कीमत के डीजल की खपत प्रतिदिन होती है। तीन कर्मचारियों का वेतन इसमें जोड़ दिया जाये, तो ये खर्च 2500 रूपये प्रतिदिन पर पहुंचता है। बरसात प्रारंभ होने के बाद नाले का पानी ओवरफ्लो होते ही कलेक्‍ट्रेट के सामने और दुकानों के सामने भरने लगा था, जिसको निकालने के लिए नगर पालिका ने ये उपक्रम किया, हालांकि इसके बावजूद भी पूरी तरह न तो कलेक्‍ट्रेट के सामने से पानी समाप्त हुआ और न ही दुकानों के सामने से अभी तक नगरपालिका इस पर चार महीने में लगभग तीन लाख बीस हजार रूपये खर्च कर चुकी है।

जिला प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया :

अगर इस राशि का उपयोग स्थायी पानी निकास और नाला बनाने में किया जाता, तो भविष्य में कभी भी ये संकट पैदा नहीं होता। इन अस्थायी व्यवस्थाओं में नगरपालिका जो खर्च करती है, उसे अपव्यय ही कहा जाएगा। इस पर न तो नगरपालिका के पार्षदों का ही ध्यान गया है और न ही जिला प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान दिया है। ऐसे अपव्ययों को रोकने की कार्यवाही तुरंत की जानी चाहिए।