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सागौन के वृक्षों की अवैध कटाई
सागौन के वृक्षों की अवैध कटाई| Ashish Saini
मध्य प्रदेश

नहीं थम रही हरे-भरे सागौन के वृक्षों की अवैध कटाई

सिलवानी, रायसेन: सिलवानी वन परिक्षेत्र की चौका बीट वन विभाग की मिली भगत से बेश कीमती सागौन के वृक्षों पर वन माफियाओं द्वारा बेरहमी से आरी और कुल्हाड़ी चलाई जा रही है।

Ashish Saini

राज एक्‍सप्रेस। मिलान 10 वर्ष पुराने रिकॉर्ड से किया जाए तो आज लहलहाते खेतों में जंगल नजर आएगा, लेकिन रिकॉर्ड दिखाएगा कौन? विनाश में यहां सबकी भागीदारी है, यानि संलिप्तता कनिष्ठ से वरिष्ठ तक की प्रतीत होती है। संभवतः यही कारण है कि, रक्षक खुलेआम भक्षक बने हुए हैं।

दिन दहाड़े जंगल से अवैध लकड़ी सप्लाई :

आरोप है कि, दिन दहाड़े जंगल से अवैध लकड़ी सप्लाई होती है। फर्नीचर उद्योग अवैध सागौन पर आश्रित है। जेबें अतिक्रमण, वनभूमि पर खेती, वन क्षेत्र से अवैध खनिज, ईट भट्टे, फर्जी फर्नीचर बिलों पर सील-हस्ताक्षर आदि से गर्म होती हैं। कड़वी बात यह कि, जांच हो तो इस विनाश में सरकारी चोरों की भागीदारी अधिक दिखाई देगी।

कौन पहुंचा रहा नुकसान :

बद किस्मत है, वह आवाम जिसकी आंखों के सामने जीवन उपयोगी वन क्षेत्र मैदानी रूप ले रहा है। विडम्बना यह है कि, इस कारगुजारी को अंजाम कोई और नहीं, बल्कि वन विभाग के अनेक नुमाइंदे मिलकर पहुंचा रहे हैं। यह वो जालसाज हैं, जो शासकीय संपत्ति के पतन के साथ शासन को बेहिसाब चूना लगाकर स्वयं की जेबें भरते हैं।

धड़ल्ले से हो रही अवैध कटाई :

सिलवानी वन परिक्षेत्र की चौका बीट वन विभाग की मिलीभगत से बेशकीमती सागौन के वृक्षों पर वन माफियाओं द्वारा बेरहमी से आरा और कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। धड़ल्ले से हो रही अवैध कटाई वनों को वीरान बनाया जा रहा है, जिससे कुछ हद तक स्वयं वन विभाग की कार्यशैली नजर आ रही है। वन माफियाओं द्वारा दिन में ही वनों की कटाई की जा रही है और विभाग आंख मूंद के तमाशा देख रहा है।

सागौन के वृक्षों की अवैध कटाई
सागौन के वृक्षों की अवैध कटाई
Ashish Saini

रोड किनारे के वृक्ष अब नहीं है सुरक्षित :

चौका बीट में रोड के किनारे दर्जनों पेड़ के ठूंठ नजर आ रहे हैं, जब रोड के किनारे लगे हुए वृक्ष ही सुरक्षित नहीं है, तो जंगल के अंदर की तस्वीर ही कुछ और है। सागौन के पेड़ों में लकड़ी चोरों द्वारा आरा और कुल्हाड़ी चलाई गई, जो स्वयं अपनी सुरक्षा बचाओ की गुहार लगा रहे हैं। वहीं वन विभाग है, जो कुंभकरण की नींद में सो रहा है।

चाहें तो जांच करके देख लें :

  • 10 वर्ष पूर्व और अब के क्षेत्रफल का मिलान हो।

  • अब तक के प्लांटेशनों की हालिया स्थिति क्या है?

  • कितने प्लांटेशन में सागौन के स्थान पर घांस बचा है।

  • जंगल में बसे गांवों के अंदर कैसे होती है चिराई।

  • फर्नीचर उद्योग पर कब-कब हुई कार्रवाई।

  • नीलामी का लॉट और फर्नीचर सप्लाई में देखें अंतर।

  • संबंधों की दुहाई में काला कारोबार अवैध सागौन से सु-सज्जित फर्नीचर उद्योग नगर में बरसों से फलफूल रहा है।

कारण व्यवसायी उन लोगों से संबंधों की दुहाई देकर अफसरों को फुसलाते हैं, जो लोग इस अवैध कारोबार की पूरी जानकारी रखते हैं, हालांकि नगर छोटा होने के कारण एक-दूसरे से पारिवारिक संबंध होना लाजमी है, लेकिन उन संबंधों के आधार पर विरोध नहीं ठीक नहीं है। जबकि उठाने वालों ने तो अब तक यह सवाल भी नहीं उठाया है कि, नियम विरूद्ध यहां कितने वर्षों से कौन-कौन एक ही स्थान पर पदस्थ करके रखा है, वह भी मलाईदार कंपार्टमेंट्रस के अंदर।