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रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन
रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन|Pankaj Yadav
मध्य प्रदेश

छतरपुर: प्रशासनिक संरक्षण में हो रहा रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन

ईशानगर, छतरपुर : ईशानगर थाना क्षेत्र से निकली विभिन्न नदियों में इन दिनों रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन का कार्य जोरों पर है।

Pankaj Yadav

राज एक्सप्रेस। थाना क्षेत्र से निकली विभिन्न नदियों में इन दिनों रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन का कार्य जोरों पर है। सूत्रों के माध्यम से पता चला है कि यह कार्य पुलिस व खनिज विभाग के संरक्षण में हो रहा है और कार्यवाही करने के पूर्व रेत माफियाओं को सूचित कर दिया जाता है फिर ट्रैक्टरों और लिफ्टरों को नदी के दूसरे किनारों पर छिपा दिया जाता है।

जानकारी के अनुसार

ग्राम दिदौल के स्थित बर्दाघाट पर इन दिनों दो लिफ्टर व 50 से अधिक ट्रैक्टर रेत निकालने का कार्य कर रहे हैं। यहां से रोजाना तकरीबन 100 से अधिक ट्रॉली रेत निकाली जा रही है। इसके साथ ही बालू से भरे ट्रैक्टरों को नदी से बाहर निकालने के लिए नाबालिग बच्चों की जान को जोखिम में डालते हुए उन्हें को ट्रैक्टर पर आगे बैठाया जाता है ताकि ट्रैक्टर का अगला हिस्सा ऊपर की ओर न उठे। वर्तमान में धसान नदी के जिन घाटों से उत्खनन हो रहा है उनमें दिदौल का बर्दाघाट, पचेर घाट, सलैया का गौखुर घाट, कुर्रा घाट, सीलप नदी और अचट्ट घाट शामिल हैं।

बीते दिनों प्रभारी मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर ने जिला स्तरीय बैठक के दौरान रेत के अवैध उत्खनन को लेकर लगातार हो रही कांग्रेस की बदनामी को पत्रकारों के समक्ष प्रशासन को अवैध रेत उत्खनन पर कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया था कि, पुलिस राजस्व और खनिज विभाग की एक संयुक्त टीम बनाकर इन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करे लेकिन अभी तक मंत्री के इन निर्देशों पर किसी भी तरह का अमल नहीं किया गया है।

बहरहाल अब देखना यह है -

आने वाले दिनों में प्रशासन गंभीरता से रेत के खेल को बंद करा पाता है या नहीं। रातभर निकल रहे रेत से भरे ट्रैक्टर ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय रेत से भरे ओवरलोड ट्रैक्टर निकलते हैं और यह सिलसिला पूरी रात जारी रहता है। तेज गति से चलने वाले इन वाहनों से कई हादसे भी हो रहे हैं। यह ट्रैक्टर ईशानगर से पराचौकी बौंड़ा, बंधीकला,परापट्टी, देरी, धौरी, कालापानी, अचट्ट, कीरतपुरा और नंदगांयकला जाते हैं। यदि पुलिस चाहे तो इन ट्रैक्टरों को ईशानगर के पड़ाव चौराहे पर रोककर कार्यवाही की जा सकती है लेकिन प्रशासन आंखें बंद किए हुए है।

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