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सोन घड़ियाल अभयारण्य में रेत तस्करों की सलतनत
सोन घड़ियाल अभयारण्य में रेत तस्करों की सलतनत|Sudha Choubey - RE
मध्य प्रदेश

शहडोल: सोन घड़ियाल अभयारण्य में रेत तस्करों की सल्तनत

शहडोल, मध्य प्रदेश: रेत के अवैध कारोबार पर एनजीटी की रोक भी बेअसर दिख रहा है। संरक्षण अस्तित्व से जूझ रहे सोन घड़ियाल नदी भी छलनी हो रही हैं। संरक्षित क्षेत्र में 144 धारा का भी पालन नहीं हो रहा है।

Afsar Khan

हाइलाइट्स:

  • सोन घड़ियाल अभयारण्य में रेत का अवैध कारोबार जारी, 24 घंटे ट्रैक्टरों से निकाली जाती है रेत

  • सोन नदी में रोजाना करते हैं 1 हजार वाहन अवैध रेत का उत्खनन

  • एक रात में 1 करोड़ 20 लाख रूपये की रेत होती है चोरी

  • रेत के अवैध कारोबार पर एनजीटी की रोक बेअसर

  • संरक्षित क्षेत्र में धारा 144 का भी नहीं हो रहा पालन

  • रेत के अवैध कारोबार का वीडियों भी आया सामने

राज एक्सप्रेस। सोन घड़ियाल अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र में रेत के खनन पर पूर्णत: पाबंदी एनजीटी के द्वारा लगाई गई है, अपने एक आदेश में एनजीटी ने एक रिपोर्ट के हवाले से आदेश भी जारी किया था कि, सोन नदी में रोजाना 1 हजार वाहन अवैध रेत का उत्खनन और परिवहन करते हैं, जिससे 1 करोड़ 20 लाख रूपये की रेत एक रात में चोरी होती है, अधिकांश क्षेत्र सोन घड़ियाल अभयारण्य का है, जो कि 109 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है, जिले के देवलोंद थाना क्षेत्र के बुड़वा, सुखाड़ और झिरिया में स्थानीय मैनेजमेंट कर रेत माफिया संरक्षित क्षेत्र से धड़ल्ले से रेत की निकासी करा रहे हैं।

वीडियों हुआ वायरल :

सोशल मीडिया में रेत के अवैध कारोबार का वीडियों वायरल हुआ, लेकिन उसके बाद भी पुलिस और प्रशासनिक महकमा हरकत में नहीं आया, जबकि सोन घड़ियाल अभ्यारण के अधीक्षक ने जुलाई माह में सतना, सीधी व शहडोल जिले के कलेक्टरों को पत्र लिखकर घड़ियाल के संरक्षित क्षेत्र जहां से सोन नदी निकलती है, वहां पर बसे ग्रामों में धारा 144 लगाने के लिए कहा था, ताकि रेत के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके, लेकिन वॉयरल हुए वीडियो से यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि, उक्त पत्र को भी रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया।

सत्ता परिवर्तन के बाद नहीं बदली तस्वीर :

सोन घड़ियाल अभयारण्य के लिए आरक्षित क्षेत्र में शहडोल, सतना, सीधी व सिंगरौली जिले के गांव आते हैं, इन गावों की 109 किलोमीटर की सीमा सोन नदी से लगी हुई है, जहां पर रेत का अवैध खनन और परिवहन होता है, इसकी रिपोर्ट एनजीटी ने प्रदेश के मुख्य सचिव से मांगी थी, लेकिन एनजीटी के आदेश के बावजूद अवैध उत्खनन और परिवहन दायरे में आने वाले आरक्षित क्षेत्र में घटने के बजाय और भी बढ़ता चला जा रहा है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले कुछ दिनों में घड़ियालों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच जायेगा, याचिका की सुनवाई के दौरान ट्रिबुनल ने लापरवाही पर नाराजगी भी जाहिर की थी। प्रदेश में 15 सालों के बाद सत्ता भाजपा के हाथ से निकलकर कांग्रेस के पास पहुंची, लेकिन अवैध उत्खनन और परिवहन का ताण्डव अभी भी जारी है, बताया गया है कि, भाजपा शासनकाल से जमें और जुड़े रेत माफिया अभी भी इस कारोबार में शामिल हैं।

संकट में घड़ियालों का अस्तित्व :

सोन घड़ियाल अभयारण्य से लगे बुड़वा, सुखाड़ और झिरिया क्षेत्र में सैंकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर रोजाना रेत की निकासी के लिए सोन नदी में उतर रहे हैं, वॉयरल वीडियों में पूरी हकीकत भी सामने आ रही है, लेकिन माफियाओं का मैनेजमेंट इतना तगड़ा है कि, खुलेआम हो रही इस रेत की तस्करी में लगाम लगाने की बजाय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें खुली छूट दे रखी है। एनजीटी ने सख्त आदेश भले ही जारी कर दिये, लेकिन निचले स्तर पर इसका पालन होता दिखाई नहीं दे रहा, सोन नदी तो अपना अस्तित्व तो खो ही रही है, वहीं अभ्यारण में रहने वाले घड़ियालों सहित अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

सांठ-गांठ से कारोबार :

उक्त क्षेत्र में स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों के माध्यम से सोन घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र से अवैध रेत की निकासी कर बुड़वा, सुखाढ़ और झिरिया में भंडारित कराई जाती है, फिर रीवा, सतना, सीधी और उत्तरप्रदेश के विभिन्न इलाकों से आने वाले वाहनों को भण्डारित स्थल पर लाया जाता है और मशीन के माध्यम से रेत को ट्रक में लोड कर ऊंचे दाम लेकर बेच दिया जाता है। बीते वर्षा का अगर इतिहास देखा जाए, तो पुलिस और प्रशासन के द्वारा बुड़वा में कैंप लगाया जाता था, लेकिन इस वर्ष कैंप तक नहीं लगा, जिससे यह साफ होता है कि, कहीं न कहीं सांठ-गांठ से ही अभ्यारण और उसके आस-पास के क्षेत्र में रेत का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है।

पुलिस की भूमिका संदिग्ध :

बताया गया है कि, रेत के इस कारोबार में पूरा गिरोह काम करता है और यहां पर 24 घंटे रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जाता है, झिरिया घाट में बैस बंधुओं का कब्जा है, तो वहीं सुखाढ़ ने द्विवेदी ने कमान सम्हाल रखी है, सूत्र बताते हैं कि, इस पूरे कारोबार में देवलोंद पुलिस की भी भूमिका संदिग्ध है, वर्दी के संरक्षण में ही गोरखधंधा फल-फूल रहा है, प्रति वाहनों के हिसाब से महीने में थाने में मैनेजमेंट होता है, इसके चलते रेत का अवैध कारोबार उक्त क्षेत्र में धड़ल्ले से जारी है, ऐसा नहीं है कि, इस बात की जानकारी जिले और संभाग के अधिकारियों को नहीं है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही न होना कई सवालों का जन्म दे रही है।

नहीं लगी शिकायत पेटी, न लगे कैमरे :

3 वर्ष पूर्व एनजीटी ने अवैध उत्खनन वाले क्षेत्रों में आने वाले घाटों में शिकायत पेटी लगाने के साथ ही सीसीटीव्ही कैमरा लगाने के आदेश दिये थे, लेकिन उसका भी पालन अभी तक नहीं हो पाया, इतना ही नहीं आदेश में यह भी कहा गया था कि, जिन घाटों में रेत की अवैध निकासी होती है, उन्हें चिन्हित किया जाना था, लेकिन आज तक पुलिस, प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों ने आदेशों का पालन करना मुनासिब नहीं समझा।