1999 में जनता ने पहली बार चुना महापौर, जानिए भोपाल नगर निगम चुनाव का इतिहास
भोपाल नगर निगम चुनाव का इतिहासRaj Express

1999 में जनता ने पहली बार चुना महापौर, जानिए भोपाल नगर निगम चुनाव का इतिहास

राजधानी भोपाल में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीति तेज हो गई है। लेकिन भोपाल में नगर निगम की स्थापना कब हुई और कब भोपाल में पहली बार नगरीय निकाय चुनाव हुए आपको हम बताते है।

राज एक्सप्रेस। राजधानी भोपाल में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भोपाल महापौर पद के लिए भाजपा की ओर से जहां मालती राय मैदान में हैं तो वहीं कांग्रेस ने एक बार फिर से विभा पटेल को आगे किया है। भोपाल नगर निगम में कुल 85 वार्ड हैं, जहां पार्षद पद के लिए जोर आजमाइश देखने को मिल रही है।

भोपाल नगर निगम का इतिहास :

साल 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के परिणाम स्वरूप भोपाल को प्रदेश की राजधानी बनाया गया था। उस समय भोपाल नगरपालिका की सीमा बहुत छोटी थी। इसके बाद आसपास के गांवों को इसमें जोड़ा गया, जिससे सीमा का विस्तार हुआ। साल 1972 में भोपाल को जिला घोषित किया गया ,जबकि साल 1983 में भोपाल को नगर निगम का दर्जा मिला।

कब बना पहला महापौर?

नगर निगम बनने के बाद साल 1983 में भोपाल में नगरीय निकाय चुनाव हुए। उस समय भोपाल में कुल 56 वार्ड थे। इस चुनाव में कांग्रेस के आर के बिसारिया जीतकर भोपाल के पहले महापौर बने। उस समय जनता सीधे महापौर का चुनाव नहीं करती थी, बल्कि पार्षद मिलकर महापौर चुनते थे।

1999 में जनता ने चुना महापौर :

साल 1999 में हुए भोपाल नगर निगम के चुनाव में जनता को पहली बार सीधे महापौर चुनने का अधिकार मिला। इस चुनाव में जनता ने कांग्रेस उम्मीदवार विभा पटेल को भोपाल का महापौर बनाया। खास बात यह है कि विभा पटेल अब एक बार फिर से महापौर पद के लिए चुनावी मैदान में हैं। विभा पटेल के बाद सुनील सूद, कृष्णा गौर और अलोक शर्मा भोपाल के महापौर रहे हैं।

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