Indore Goli Kand : रिमांड में शराब माफियाओं के सनसनीखेज राज उजागर होगें..!
रिमांड में शराब माफियाओं के सनसनीखेज राज उजागर होगें..!
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Indore Goli Kand : रिमांड में शराब माफियाओं के सनसनीखेज राज उजागर होगें..!

इंदौर, मध्यप्रदेश : आरोपियों के रिमांड के बीच अब ये माना जा रहा है कि शराब माफियाओं से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं। शराब की दुकान और अहातों पर कब्जों को लेकर सच्चाई भी सामने आ सकती है।

इंदौर, मध्यप्रदेश। शराब ठेकेदार अर्जुन ठाकुर पर दिनदहाड़े हुए गोलीकांड में गिरफ्तार दोनों आरोपी सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर को विजय नगर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने कोर्ट से यह कहते हुए रिमांड मांगा कि पूछताछ अभी बाकी है। इन्हें दिल्ली लेकर भी जाना है। इस पर कोर्ट ने आरोपियों को 28 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया। आरोपियों के रिमांड के बीच अब ये माना जा रहा है कि शराब माफियाओं से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं। शराब की दुकान और अहातों पर कब्जों को लेकर सच्चाई भी सामने आ सकती है। अब सवाल ये उठ रहा है कि पुलिस ये राज उजागर करने में कामयाब होगी या फिर राजनीति संरक्षण के कारण इन सवालों का दम घोंट दिया जाएगा।

आरोपियों को जब कोर्ट में पेश किया गया तो इनके वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ पिटाई की जा रही है। सतीश भाऊ ने जब सरेंडर किया था तो उसके हाथ पर चोट नहीं थी लेकिन पुलिस ने उसे इतना मारा कि हाथ टूट गया है। वकील ने आशंका जताई कि पुलिस इनका एनकाउंटर कर सकती है। इस गोलीकांड को लेकर सतीश भाऊ और चिंटू ठाकुर को लेकर भी अलग-अलग बाते सामने आ रही है। कुछ का कहना है कि इन दोनों आरोपियों ने बुधवार को सरेंडर कर दिया था। दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि उन्हें घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया है। गुरुवार को विजय नगर पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर जिला कोर्ट पहुंची।

कब और क्यों हुआ था गोलीकांड..?

उल्लेखनीय है कि सोमवार शाम सत्यसाईं चौराहा स्थित सिंडिकेट के दफ्तर में शराब ठेकेदारों की बैठक आयोजित की गई थी। गांधी नगर की शराब दुकान से अर्जुन ठाकुर के पिता स्व.वीरेंद्रसिंह ठाकुर के माला चढ़े फोटो को सड़क पर फैंकने के मामले में हेमू ठाकुर और चिंटू ठाकुर एवं अर्जुन ठाकुर के बीच विवाद हो गया था। इस बैठक में इस विवाद में राजीनामे को लेकर अर्जुन को पिंटू भाटिया ने ही फोन कर बुलवाया था। राजीनामे के पहले ही हेमू ठाकुर ने अर्जुन ठाकुर को गोली मार दी।

पुलिस सच कब बताएगी..?

दूसरी ओर इस कांड में एकेसिंह और पिंटू भाटिया के शामिल होने की बात भी घायल अर्जुनसिंह ने कही थी। इन दोनों को लेकर पुलिस सच्चाई क्यों सामने नहीं ला रही ह कि एफआईआर में इनके नाम बढाए गए हैं या नहीं। दूसरी ओर कहा जा रहा है कि इन दोनों के नाम एफआईआर में बढा दिए गए हैं जबकि पुलिस ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। गोलीकांड में घायल अर्जुनसिंह ठाकुर की तरफ से विजयनगर टीआई को लिखित आवेदन दिया गया, जिसमें एके सिंह और पिंटू भाटिया को मास्टर माइंड बताया गया है। आवेदन में अर्जुन ने बताया कि उसे सुनियोजित षड्यंत्र के तहत एके सिंह, पिंटू भाटिया व अन्य द्वारा चर्चा के लिए सिंडिकेट आफिस बुलाया गया था। आफिस पहुंचने के आधे घंटे बाद एके सिंह, पिंटू भटिया व अन्य अंदर आए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। चिंटू ठाकुर द्वारा चलाई गई गोली मेरे पेट पर लगी जबकि हेमू ठाकुर व अन्य लोगों द्वारा चलाई गई गोली मेरे साथी मोहित आहूजा के पैर के पास से निकल गई। घटना के प्रत्यक्षदर्शी भी हैं। एकेसिंह और पिंटू ठाकुर बार-बार कह रहे थे कि आज इसे जान से मार डालो। मुझे ज्ञात हुआ कि विजयनगर थाने पर दर्ज प्रकरण में एके सिंग व पिंटू भाटिया को आरोपी नहीं बनाया गया है। अर्जुन ने मामले में पिंटू भाटिया व एके सिंग को भी आरोपी बनाने की मांग की है।

गैंगवार को रोकने में सफल हो पाएगी पुलिस..?

इस गोलीकांड के बाद ये माना जा रहा है कि ये शराब माफियाओं के बीच गैंगवार का श्रीगणेश है। इस वारदात के बाद इस तरह की कई घटनाएं होगीं, खून बहेगा और आशंका तो ये भी है कि कई अपनी जान से भी हाथ धो सकते हैं। शराब दुकानों के साथ ही अहातों पर ज्यादातर नामचीन गुंडों का कब्जा है। कई अहातों में काफी जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है। शहर में गैंगवार होना कोई नई बात नहीं है। इसके पहले भी कई बार गैंगवार हो चुके हैं और कई गुंडों की हत्या हो चुकी है। इसके पूर्व गुंडों के बीच वर्चस्व ,पुरानी दुश्मनी को लेकर खून खराबा हो चुका है लेकिन इस बार गैंगवार का रुप बदल सकता है। शराब माफियाओं के बीच होने वाले गैंगवार में किराए के गुंडे-बदमाशों के भी शामिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। शहर में चर्चा तो ये भी चल रही है कि शराब माफियाओं के दोनों गुटों के बीच अब हथियार एकत्र किए जाने की होड़ लग गई है। कई गुंडे बदमाश सलाखों के पीछे हैं उनके आका अब उनकी जमानत करवाने में जुट गए हैं।

सूत्र बताते हैं कि गुंडे बदमाशों को राजनीति संरक्षण मिलने के कारण शहर की शांति भंग होने का डर बना रहता है। कुछ अरसा पहले तक शहर में दबंग अफसर तैनात रहे। गुंडे बदमाशों के एनकाउंटर भी हुए लेकिन लंबे अरसे से पुलिस ने अपना रौद्र रुप नहीं दिखाया है। ये माना जा रहा है कि केवल आपरेशन क्राइम कंट्रोल से शहर में क्राइम कंट्रोल नहीं हो सकता अब तो गुंडे बदमाशों पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए। उच्च स्तर पर भी ऐसे कदम उठाए जाना चाहिए कि जिन गुंडों को राजनीति संरक्षण है उन पर तत्काल कार्रवाई कर ऐसी कार्रवाई हो कि आम जनता राहत महसूस करे। इसके लिए ये भी जरुरी है कि गुंडो को संरक्षण देने वाले नेता कोई सी भी पार्टी के हों उन पर भी कार्रवाई की जाए। ये भी कटु सत्य है कि यदि गुंडों को संरक्षण देने वाले रसूखदारों के चेहरे बेनकाब कर दिए जाएं और उन पर कार्रवाई हो तो काफी हद तक क्राइम कंट्रोल हो सकता है लेकिन ऐसा करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है।

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