इंटरपोल का नकली पुलिस अफसर गिरफ्तार
इंटरपोल का नकली पुलिस अफसर गिरफ्तारसांकेतिक चित्र

Indore : नकली पुलिस के बाद अब पकड़ा गया इंटरपोल का नकली पुलिस अफसर

इंदौर, मध्यप्रदेश : इंदौर क्राइम ब्रांच और एमआईजी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर नकली इंटरपोल अफसर को गिरफ्तार किया है, जिसने करोड़ों रुपए वापस दिलवाने का झांसा देकर की ठगी।

इंदौर, मध्यप्रदेश। नकली पुलिस और अन्य अफसर बनकर ठगी की कई वारदातें शहर में हो चुकी है। अब ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें क्राइम ब्रांच-एमआईजी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली इंटरपोल अफसर को गिरफ्तार किया है। ये नकली अफसर भूमाफियाओं से 30 करोड़ की वसूली के लिए इंदौर आया था और यहां ठाठ-बाट से एक होटल में रह रहा था। उसके पास से कुछ नकली बैज और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। कई सनसनीखेज खुलासे होने की संभावना है। आरोपी का नाम विपुल शैफर्ड बताया गया है। वह मूल रुप से बैतूल का रहने वाला है। उससे पूछताछ में ये रहस्य सामने आया है कि इंदौर के एक हुंडी कारोबारी ने भूमाफियों से 30 करोड़ रुपए की वसूली के लिए उसे बुलवाया था। इस वसूली के बाद आरोपी को एक मोटी रकम मिलने की बात भी तय हुई थी।

डीसीपी संपत उपाध्याय ने बताया कि पता चला था कि बैतूल का रहने वाला विपुल शैफर्ड होटल श्रीमाया में अपने आपको इंटरपोल अफसर बताकर ठहरा है। उसकी कई गतिविधियां संदिग्ध हैं। इसके बाद क्राइम ब्रांच और एमआईजी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए विपुल को होटल पर छापा मारकर पकड़ा। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसे केशरबाग रोड निवासी कारोबारी हेमंत नेमा के बेटे पीयूष नेमा ने बुलाया था। हुंडी कारोबारी पीयूष नेमा को भूमाफिया दीपक मद्दा, चिराग शाह, मन्ना चौकसे, कमलेश पांचाल से करीब 30 करोड़ रुपए लेना था। विपुल से पीयूष की उज्जैन के बिल्डर पवन कुमार बनवारी ने मुलाकात करवाई थी। पीयूष उसके झांसे में फंसकर 3.50 लाख रुपए भी दे चुका था। करीब ढाई महीने से होटल श्रीमाया में ठहरे विपुल का बिल भी पीयूष नेमा अदा कर रहा था।

विपुल ने पीयूष पर प्रभाव डालने के लिए पीयूष से एक आवेदन लिखवाया था और वह एडिशनल कमिश्नर, क्राइम राजेश हिंगणकर से भी मिला था। तब पीयूष को लगा कि विपुल अपने स्तर पर इंटरपोल अफसर होने के नाते क्राइम ब्रांच के अफसरों की सहायता से उसे 30 करोड़ रुपए दिलवा देगा। विश्वास होने के बाद पीयूष ने विपुल को 2.50 लाख रुपए नकद भी दे दिए थे। 30 करोड़ रुपए में भी उसका हिस्सा तय था। इसके साथ ही विपुल ने पीयूष की कई रसूखदारों से भी बातचीत भी करवाई थी। उसने क्राइम ब्रांच के अफसरों को फोन भी लगाया था। क्राइम ब्रांच को शक हुआ और उसके बाद कार्रवाई की गई।

एमआईजी पुलिस को पीयूष नेमा ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि होटल श्रीमाया में ठहरा हुआ विपुल शैफर्ड उसे तीन माह से उसके डूबे हुए करोड़ों रुपए वापस दिलवाने के नाम पर झांसा दे रहा है। वह उससे 3.50 लाख रुपए वसूल चुका है। उज्जैन के एक परिचित ने उससे उसका परिचय करवाया था और कहा था कि ये इंटरपोल अफसर है। इसके बाद विपुल को गिरफ्तार किया गया। विपुल के बारे में पता चला है कि वह मूल रुप से यूपी का रहने वाला है और एमबीए तक शिक्षा प्राप्त की है। फिलहाल वह बैतूल में रह रहा है। शिकायत करने के बाद पुलिस ने होटल पर छापा मारकर विपुल को गिरफ्तार कर लिया है।

उसके पास से कुछ डायरियां भी मिली हैं। जिसमें इंदौर के कई पुलिस अफसरों के नाम है। इसकी जांच की जा रही है। उसके पास से एक कार्ड भी मिला है जिस पर इंटरनेशनल पुलिस आर्गेनाइजेशन लिखा है। इस कार्ड के बारे में पुलिस ने दिल्ली तक पूछताछ की, वहां से जांच में पता चला कि ये नकली कार्ड है।

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