इंदौर : नए स्ट्रेन के कारण जनवरी फरवरी में बढ़ सकते हैं केस
नए स्ट्रेन के कारण जनवरीफरवरी में बढ़ सकते हैं केसSyed Dabeer-RE

इंदौर : नए स्ट्रेन के कारण जनवरी फरवरी में बढ़ सकते हैं केस

इंदौर, मध्य प्रदेश : विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूके में मिला कोविड-19 का मिला नए स्ट्रेन के कारण आने वाले जनवरी और फरवरी माह में केस बढ़ सकते हैं।

इंदौर, मध्य प्रदेश। वर्ष 2020 समाप्त होने जा रहा है और लोगों की उम्मीद थी कि आने वाला वर्ष 2021 की शुरुआत कोविड-19 मुक्त माहौल से होगी, लेकिन ऐसे लोगों को विशेषज्ञों ने एक बुरी खबर दी है और उन्होंने आशंका जताई है कि यूके में मिले कोविड के नए स्ट्रेन से जनवरी-फरवरी माह में संक्रमण के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए अलर्ट रहना जरूरी है। 23 दिसंबर को डेथ ऑडिट-मैनेजमेंट-एडमिनिस्ट्रीव कमेटी की बैठक कमिश्नर डॉ. पवन शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें 21 नवंबर से 22 दिसंबर के बीच कोविड-19 से हुई मौतों की समीक्षा की गई। इसमें यह बात सामने आई है कि 10 ऐसे मरीजों की मौत हुई है, जो केवल एक ही दिन अस्पताल में भर्ती रहे थे, उन्हें मधुमेह, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर था।

सावधानी रखें, अस्पताल में विशेष व्यवस्था करें :

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूके में मिला कोविड-19 का मिला नए स्ट्रेन के कारण आने वाले जनवरी और फरवरी माह में केस बढ़ सकते हैं। समिति के सदस्यों ने अधिकारियों और डॉक्टरों को सलाह दी है कि वे इसके लिए तैयारी पूरी करें और स्थिति को संभालने के लिए सभी सुविधाओं को सुनिश्चित करें। संभागीय आयुक्त डॉ. पवन शर्मा की अगुवाई में हुई बैठक में अस्पतालों में बिस्तर की उपलब्धता, ऑक्सीजन क्षमता और उपलब्धता, दवा की उपलब्धता और अस्पताल के इलेक्ट्रिक बैक-अप पर भी चर्चा की।

एक माह में हुई 115 मौतें :

कमेटी के सदस्य और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने जानकारी दी कि 21 नवंबर से 21 दिसंबर की अवधि में 115 मौतें हुईं। डेथ ऑडिट में 12 मरीजों की मौतों की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि 85 प्रतिशत मरीज मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा जैसी बीमारियों से ग्रस्त थे। 12 में से 10 मरीज केवल एक दिन अस्पताल में भर्ती रहे और उनकी मौत हो गई। इससे यह साबित होता है कि लोग इलाज के लिए अस्पताल में अभी भी देरी से पहुंच रहे हैं।

कोरोना के लक्षण नहीं और हो गई मौत :

बैठक में जिन मरीजों की मृत्यु की समीक्षा की गई, उनमें कुछ ऐसे मामले भी थे, जिनमें मरीज में कोरोना के लक्षण नहीं थे, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव आई और मरीज की मौत हो गई। इनमें मरीज राधेश्याम गुप्ता उम्र 65 वर्ष को 24 नवंबर को गैस की तकलीफ होने तथा उनकी पेशाब रुकने से निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। मरीज का कोरोना टेस्ट कराया गया, 24 नवंबर को रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 25 नवंबर को उनकी मौत हो गई। लक्ष्मण जायसवाल उम्र 35 वर्ष को 20 नवंबर में पेट दर्द हुआ, 21 को भर्ती किया, पैंक्रियास इन्फेक्शन होना बताया, इलाज से मरीज ठीक हुआ 25 को डिस्चार्ज किया, लेकिन रात में सांस चलने लगी, जांच में आक्सीजन लेवल कम आया, एमटीएच अस्पताल, इंदौर जाने की सलाह दी गई 26 नवंबर को मरीज की मौत हो गई। सैयद अतर अली 82 को 2-3 दिन से कमजोरी महसूस हो रही थी, इसके अलावा और कोई लक्षण नहीं। परिजनों ने 3 दिसंबर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, 5 दिन बाद डॉक्टर ने बताया कि मरीज को डायलिसिस की जरूरत है, उस अस्पताल में सुविधा न होने से मरीज को 9 दिसंबर को सेम्स रेफर किया गया, जहां मौत हो गई।

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